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Kanpur News: सीएसजेएमयू में तलाशा जाएगा विकसित प्रदेश के निर्माण का फाॅर्मूला
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कानपुर। विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का फॉर्मूला छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) से तलाशा जाएगा। यहां 19 और 20 सितंबर को ‘उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा’ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शिक्षा व्यवस्था को ज्ञान, नवाचार, अनुसंधान, कौशल से जोड़कर राज्य के समग्र विकास की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर मंथन होगा।
यहां कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, डॉक्टर, उद्यमी, व्यापारी, प्रशासनिक अधिकारी जुटेंगे। सीएसजेएमयू और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली ज्ञान सभा का मुख्य विषय ‘विकसित उत्तर प्रदेश हेतु शिक्षा’ है। आयोजन को विकसित भारत-2047 की संकल्पना से भी जोड़ा जा रहा है। समन्वयक डॉ. अवनीश सिंह ने बताया कि औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और अनुसंधान को विकसित करने पर भी मंथन होगा। विश्वविद्यालय के समन्वयक डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि सतत विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर भी विचार होगा।
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शिक्षा गुणवत्ता, अनुसंधान पर लिए जाएंगे सुझाव
इसमें नीति-निर्माता, कुलपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी विभिन्न विषयों पर संवाद करेंगे। विषयगत सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा और उद्योग-शिक्षा संवाद में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार और नवाचार से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे।
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नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण पर होगी चर्चा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं में शिक्षा, नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण पर भी चर्चा होगी। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल शिक्षा, विज्ञान-तकनीक, उद्यमिता और कौशल विकास को शिक्षा से जोड़ने के उपाय तलाशे जाएंगे।
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यहां कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, डॉक्टर, उद्यमी, व्यापारी, प्रशासनिक अधिकारी जुटेंगे। सीएसजेएमयू और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली ज्ञान सभा का मुख्य विषय ‘विकसित उत्तर प्रदेश हेतु शिक्षा’ है। आयोजन को विकसित भारत-2047 की संकल्पना से भी जोड़ा जा रहा है। समन्वयक डॉ. अवनीश सिंह ने बताया कि औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और अनुसंधान को विकसित करने पर भी मंथन होगा। विश्वविद्यालय के समन्वयक डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि सतत विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर भी विचार होगा।
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शिक्षा गुणवत्ता, अनुसंधान पर लिए जाएंगे सुझाव
इसमें नीति-निर्माता, कुलपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी विभिन्न विषयों पर संवाद करेंगे। विषयगत सत्रों, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा और उद्योग-शिक्षा संवाद में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार और नवाचार से जुड़े मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे।
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नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण पर होगी चर्चा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं में शिक्षा, नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण पर भी चर्चा होगी। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल शिक्षा, विज्ञान-तकनीक, उद्यमिता और कौशल विकास को शिक्षा से जोड़ने के उपाय तलाशे जाएंगे।