पूर्व भाजपा नेता ने रचा बीमारी का ढोंग: कोर्ट में लगाए अस्पताल के फर्जी कागज, किसान आत्महत्या मामले में आरोपी
किसान आत्महत्या मामले में आरोपी पूर्व भाजपा नेता डॉ. प्रियरंजन आशु दिवाकर ने कोर्ट में अस्पतालों के फर्जी दस्तावेज पेश किए। जांच के बाद उनके खिलाफ धाराएं बढ़ा दी गई हैं। पुलिस रविवार को उसके चकेरी व मैनपुरी स्थित घर में नोटिस चस्पा करेगी।
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कानपुर जिले के किसान बाबू सिंह यादव की खुदकुशी के मामले में आरोपी पूर्व भाजपा नेता डॉ. प्रियरंजन आशु दिवाकर की तरफ से शहर के दो अस्पतालों के जो दस्तावेज लगाए गए थे, वे फर्जी निकले। जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान आशु दिवाकर के वकील ने इन दस्तावेजों को पेश कर कहा था कि वह अस्पताल में भर्ती था। पुलिस की जांच में पता चला है कि वह किसी अस्पताल में भर्ती नहीं रहा। अब उसके खिलाफ धोखाधड़ी की भी धारा बढ़ेगी। वहीं, हाजिर न होने पर कोर्ट ने उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस भी जारी कर दिया है। पुलिस रविवार को उसके चकेरी व मैनपुरी स्थित घर में नोटिस चस्पा करेगी।
करोड़ों की जमीन पर कब्जा होने से आहत चकेरी निवासी किसान बाबू सिंह यादव ने नौ सितंबर को ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। इस मामले में डॉ. प्रियरंजन आशु दिवाकर समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस दो आरोपियों राहुल जैन व मधुर पांडेय को जेल भेज चुकी है। डॉ. प्रियरंजन, किसान का भतीजा जितेंद्र यादव, बबलू यादव व शिवम सिंह फरार हैं। इन सभी पर पुलिस एक-एक लाख का इनाम घोषित कर चुकी है। डॉ. प्रियरंजन ने गिरफ्तारी के बचने के लिए पहले जिला अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की। बाद में नॉट प्रेस करा दी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत व एफआईआर निरस्त कराने के लिए अधिवक्ता की तरफ से अर्जी दिलाई।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली, तो फिर डॉ. प्रियरंजन ने एक और दांव खेला। अधिवक्ता ने स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी। शुक्रवार को अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान डॉ. प्रियरंजन की ओर से कहा गया कि वह चिकित्सक और राजनीतिक छवि वाला व्यक्ति है और वह पूरी तरह निर्दोष है। वह फरार नहीं था। माइनर हार्ट अटैक पड़ने पर रीजेंसी और फार्च्यून अस्पताल में भर्ती रहा था। डॉ. प्रियरंजन की तरफ से अस्पताल के दस्तावेज और दवाओं पर्चे भी प्रस्तुत किए गए थे।
जेसीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने बताया कि डॉ. प्रियरंजन की तरफ से अदालत में दाखिल दोनों अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच मैनुअल और टेक्निकल दोनों तरह से कराई गई। अस्पताल से पूछताछ भी की गई है। इसमें पता चला है कि दस्तावेज फर्जी हैं। अब बाबू सिंह खुदकुशी मामले में दर्ज एफआईआर की विवेचना में डॉ. प्रियरंजन पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज बनाकर इस्तेमाल करने की धारा बढ़ाई जाएगी। संभव है कि अलग से भी उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए।
एक लाख के इनामी फरार डॉ. प्रियरंजन आशु दिवाकर के खिलाफ अदालत ने शनिवार को कुर्की (सीआरपीसी की धारा 82) का नोटिस जारी कर दिया है। रविवार को चकेरी थाना पुलिस उसके चकेरी और मैनपुरी स्थित घरों में मुनादी कराकर कुर्की का नोटिस चस्पा करेगी। आरोपी डॉ. प्रियरंजन ने अपर जिला जज-24 अशुमान पटनायक की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी। शुक्रवार को अदालत ने अर्जी खारिज कर दी तो शनिवार को विवेचक और चकेरी थाना प्रभारी अशोक कुमार दुबे उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई के लिए अदालत में अर्जी दी। इस पर अदालत ने कुर्की का नोटिस जारी कर दिया। जेसीपी ने बताया कि डॉ. प्रियरंजन के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शनिवार को शुरू की जाएगी।