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Kanpur News: विवि से निकलेंगे फॉरेंसिक एक्सपर्ट, नए सत्र से 30 सीटों पर होगी पढ़ाई
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सीएसजेएमयू
- फोटो : फाइल फोटो
कानपुर। किसी घटना में सबूतों को एकत्र करने में फॉरेंसिक एक्सपर्ट का महत्वपूर्ण योगदान होता है। कोर्स की मांग को देखते हुए अब छत्रपति शाहूजी महाराज विवि ने भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट तैयार करने का बीड़ा उठाया है। विवि में नए सत्र से फॉरेंसिक साइंस विषय शुरू करने की तैयारी है। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। शुरुआत में 30 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
विवि में हाल ही में आयोजित हुई मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने फॉरेंसिक साइंस की महत्ता पर चर्चा की थी। इसके बाद से विवि ने भी इसे नए सत्र से शुरू करने की तैयारी कर दी है। पहले चरण में एमएससी में इस पाठ्यक्रम को शुरू किया जाएगा। बीएससी बायो के छात्र इसमें दाखिला ले सकेंगे। लीगल से जुड़ी जानकारियों के साथ छात्रों को टेस्टिंग, डीएनए, क्राइम सीन का परीक्षण करना, फिंगर प्रिंट जुटाना सहित अन्य विषयों को पढ़ाया जाएगा। केवल लॉ के छात्रों के लिए यह कोर्स नहीं होगा। इसके लिए साइंस का बैकग्राउंड होना आवश्यक होगा।
प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस में सोशल साइंस, लाइफ साइंस, लॉ सभी कुछ समाहित होता है। अभी इसे एमएससी से लागू करने की तैयारी है। हालांकि अभी इस पर कुलपति प्रो. विनय पाठक की अंतिम मुहर लगनी है। उन्होंने कहा कि इस कोर्स की काफी डिमांड है और स्कोप भी अच्छा है।
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यहां हो सकती है नियुक्ति
इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), अस्पताल, पुलिस विभाग, लॉ फर्म, डिफेंस/आर्मी, सेंट्रल गवर्नमेंट, फॉरेंसिक साइंस लैब, प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी।
जॉब प्रोफाइल
फॉरेंसिक एक्सपर्ट, इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर, क्राइम सीन इन्वेस्टिगेटर्स, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट।
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विवि में हाल ही में आयोजित हुई मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने फॉरेंसिक साइंस की महत्ता पर चर्चा की थी। इसके बाद से विवि ने भी इसे नए सत्र से शुरू करने की तैयारी कर दी है। पहले चरण में एमएससी में इस पाठ्यक्रम को शुरू किया जाएगा। बीएससी बायो के छात्र इसमें दाखिला ले सकेंगे। लीगल से जुड़ी जानकारियों के साथ छात्रों को टेस्टिंग, डीएनए, क्राइम सीन का परीक्षण करना, फिंगर प्रिंट जुटाना सहित अन्य विषयों को पढ़ाया जाएगा। केवल लॉ के छात्रों के लिए यह कोर्स नहीं होगा। इसके लिए साइंस का बैकग्राउंड होना आवश्यक होगा।
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प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस में सोशल साइंस, लाइफ साइंस, लॉ सभी कुछ समाहित होता है। अभी इसे एमएससी से लागू करने की तैयारी है। हालांकि अभी इस पर कुलपति प्रो. विनय पाठक की अंतिम मुहर लगनी है। उन्होंने कहा कि इस कोर्स की काफी डिमांड है और स्कोप भी अच्छा है।
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यहां हो सकती है नियुक्ति
इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), अस्पताल, पुलिस विभाग, लॉ फर्म, डिफेंस/आर्मी, सेंट्रल गवर्नमेंट, फॉरेंसिक साइंस लैब, प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी।
जॉब प्रोफाइल
फॉरेंसिक एक्सपर्ट, इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर, क्राइम सीन इन्वेस्टिगेटर्स, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट।