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‘रहस्यमय सुसाइड’ का ऐसा अनोखा मामला जो विश्व में शायद कभी नहीं हुआ, आप भी जानकर रह जाएंगे दंग
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 05 May 2017 08:22 AM IST
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यूपी के कानपुर शहर में खुदकुशी का एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जिसने पुलिस से लेकर डॉक्टरों के पैनल तक को हैरान कर दिया है। पुलिस का कहना है कि हंसपुरम में रहने वाले एक विकलांग कारोबारी ने गैस की रबर से खुद का गला कसकर खुदकुशी कर ली लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसा होना संभव नहीं। कोई अपना गला कसेगा तो मरने से पहले बेहोश जरूर होगा और जब बेहोश हो जाएगा तो गला कस कैसे पाएगा। दुनिया में अपने हाथ से अपना गला घोंटकर सुसाइड का ऐसा कोई मामला आज तक सामने नहीं आया है। इसलिए दाल में कुछ काला जरूर है। हालांकि कारोबारी की जेब से सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने छेड़खानी के आरोप और दरोगा की प्रताड़ना से परेशान होकर खुदकुशी की बात लिखी है। अगर यह खुदकुशी साबित हो जाती है तो यह देश का ही नहीं, बल्कि विश्व का पहला मामला होगा।
कौशल दोनों पैरों से विकलांग था
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नौबस्ता हंसपुरम निवासी परमेश्वर दयाल तिवारी के पांच बेटों में सबसे बड़ा कौशल किशोर (45) दोनों पैरों से विकलांग था। उसका क्षेत्र में लोहे की चेन बनाने का कारखाना था। भाई श्याम शरण ने बताया कि कारखाने के पास ही उसने किराये पर एक कालोनी ले रखी थी, जिसमें गोदाम था। परिजनों के मुताबिक कौशल मंगलवार रात घर से खाना खाकर गोदाम में जाकर सो गया। बुधवार सुबह नौ बजे छोटे भाई श्याम ने उसे फोन किया तो कहा थोड़ी देर में आ रहे हैं। नहीं आने पर छोटा भाई बुलाने गया तो बिस्तर में उसका शव पड़ा मिला। उसकी मौत से भड़के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाकर थाने में हंगामा कर छह लोगों के खिलाफ तहरीर दी है, जिनका सुसाइड नोट में जिक्र किया गया है।
यह था कमरे का हाल
विकलांग का शव गोदाम पर फर्श पर लगे बिस्तर पर इस तरह से पड़ा था कि जैसे वह सो रहा हो। उसका सिर तकिया पर था, दोनों पैर सीधे थे, गर्दन में रबर लिपटी थी। गोदाम के पंखे के कुंडे पर एक नई रस्सी इस तरह बंधी लटक रही थी कि जैसे उससे किसी को फांसी लगानी हो। पंखे के नीचे कुर्सी भी रखी थी। इसके अलावा कमरे में कपड़े लटकाने के लिए एक और रस्सी बंधी थी।
यह था कमरे का हाल
विकलांग का शव गोदाम पर फर्श पर लगे बिस्तर पर इस तरह से पड़ा था कि जैसे वह सो रहा हो। उसका सिर तकिया पर था, दोनों पैर सीधे थे, गर्दन में रबर लिपटी थी। गोदाम के पंखे के कुंडे पर एक नई रस्सी इस तरह बंधी लटक रही थी कि जैसे उससे किसी को फांसी लगानी हो। पंखे के नीचे कुर्सी भी रखी थी। इसके अलावा कमरे में कपड़े लटकाने के लिए एक और रस्सी बंधी थी।
इन सवालों से हत्या का इशारा हो रहा है
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- कौशल को खुद का गला घोटकर सुसाइड करना था तो फांसी लगाने के लिए पंखे पर रस्सी क्यों बांधी। अगर दोनो पैरों से विकलांग था तो पंखे पर रस्सी बांधी कैसे।
- जब कमरे में पहले से रस्सी थी तो नई रस्सी लाने की क्या जरूरत थी
-कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने गला कस कर मारने के बाद शव को पंखे पर लटकाने की तैयारी की हो।
-कारोबारी का घर था तो वह छोटे से गोदाम में सोने क्यों गया
-गोदाम में गैस-चूल्हा नहीं था, तो क्या रबर घर से लेकर गोदाम में गए
-खुदकुशी के और भी रास्ते हैं, फिर इतना अजीबोगरीब रास्ता क्यों चुना
- जब कमरे में पहले से रस्सी थी तो नई रस्सी लाने की क्या जरूरत थी
-कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने गला कस कर मारने के बाद शव को पंखे पर लटकाने की तैयारी की हो।
-कारोबारी का घर था तो वह छोटे से गोदाम में सोने क्यों गया
-गोदाम में गैस-चूल्हा नहीं था, तो क्या रबर घर से लेकर गोदाम में गए
-खुदकुशी के और भी रास्ते हैं, फिर इतना अजीबोगरीब रास्ता क्यों चुना
ये हैं एक्सपर्ट्स के कमेंट
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मेडिकल कॉलेज फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. पुनीत अवस्थी ने बताया कि मैं पहली बार सुन रहा हूं कि कोई खुद का गला घोटकर सुसाइड करेगा। विदेशों में कुछ ऐसे केस सामने आए हैं, जिसमें मरने वाला गले में फंदा बनाकर कोई भारी वस्तु लटका लेता है, ऐेसे में गला कस जाता है लेकिन यहां पर सीधे-सीधे रबर से अपना गला घोटकर सुसाइड करना बताया जा रहा है। यह संभव नहीं है।
संभव नहीं
सीनियर एडवोकेट कौशल किशोर शर्मा ने कहा कि यह संभव नहीं है। जब किसी का गला कसा जाता है तो वह पहले बेहोश होता है और फिर कोमा में जाने के बाद उसकी मौत होती है। बेहोश होने की स्थिति में हाथ से रबर की पकड़ छूट जाएगी और जान नहीं जाएगी।
गूगल में भी नहीं मिला कोई केस
सीनियर एडवोकेट शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि उनके जीवन में ऐसा कोई केस सामने नहीं आया। गूगल पर भी सर्च किया, लेकिन ऐसा कोई केस नहीं मिला है।
संभव नहीं
सीनियर एडवोकेट कौशल किशोर शर्मा ने कहा कि यह संभव नहीं है। जब किसी का गला कसा जाता है तो वह पहले बेहोश होता है और फिर कोमा में जाने के बाद उसकी मौत होती है। बेहोश होने की स्थिति में हाथ से रबर की पकड़ छूट जाएगी और जान नहीं जाएगी।
गूगल में भी नहीं मिला कोई केस
सीनियर एडवोकेट शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि उनके जीवन में ऐसा कोई केस सामने नहीं आया। गूगल पर भी सर्च किया, लेकिन ऐसा कोई केस नहीं मिला है।
छेड़खानी के आरोप और पुलिस प्रताड़ना को जिम्मेदार बताया
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विकलांग के पास से मिले सुसाइड नोट में उसने छेड़खानी के आरोप और पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर खुदकुशी के बारे में लिखा है। सुसाइड नोट के मुताबिक उसने जरौली फेस टू निवासी शिव मोहन दुबे को तीन लाख रुपयेेे दिए थे, जिसका तगादा करने पर उसने 27 अप्रैल को अपनी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ और जबरन शादी का दबाव बनाने का आरोप लगाकर एसएसपी से शिकायत की थी। इस पर चौकी इंचार्ज लल्लूराम और दरोगा राजेश रावत मामले को रफादफा करने के लिए 60 हजार रुपये की मांग रहे थे। परिजनों का आरोप है कि दरोगा ने कहा था कि तीन लाख शिवमोहन को दे सकते हो, लेकिन 20 फीसद रुपया देकर छुटकारा नहीं पाना चाहते। अगर रुपये नहीं दिए तो पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धारा में जेल भेज दूंगा।
पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया
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कौशल किशोर ने सुसाइड नोट में लिखा है कि शिवमोहन दुबे, उसकी पत्नी लक्ष्मी और बेटी कोमल ने उसे मरने के लिए मजबूर किया है। उसे तभी शांति मिलेगी जब तीनों को जेल और फांसी मिलेगी। इस पर पुलिस ने शिव मोहन को हिरासत में ले लिया। सीओ गोविंद नगर आतिश कुमार ने बताया कि प्रथमदृष्टया मामला सुसाइड का लग रहा है। पोस्टमार्टम से मौत की वजह स्पष्ट हो जाएगी। पुलिस एक्सपर्ट से सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग की जांच कराएगी। कौशल ने सुसाइड नोट में जिनको इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है, उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। चौकी इंचार्ज और दरोगा पर लगे आरोपों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।