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देशभर में ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला रोगी कानपुर के हैलट अस्पताल में मिला, ये हैं लक्षण
Mon, 21 Jun 2021 12:28 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 21 Jun 2021 12:28 PM IST
सार
हैलट में भर्ती ऑप्टिक न्यूराइटिस मरीज के इलाज के साथ डॉक्टरों ने उस पर शोध भी शुरू कर दिया है। आप्टिक न्यूराइटिस मरीज आशीष (30) को 15 दिन पहले हैलट में भर्ती किया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर के हैलट अस्पताल में ब्लैक फंगस से ऑप्टिक न्यूराइटिस का पहला मरीज मिला है। अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि यह देशभर में पहला केस है। इसमें मरीज की आंखों की नसों में सूजन आ जाती है। नसों में खराबी आने से मरीज की आंखों की रोशनी चली जाती है।
हैलट में भर्ती मरीज के इलाज के साथ डॉक्टरों ने उस पर शोध भी शुरू कर दिया है। आप्टिक न्यूराइटिस मरीज आशीष (30) को 15 दिन पहले हैलट में भर्ती किया गया था। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि आर्टरी ब्लॉकेज के तो कई मरीज आए हैं।
लेकिन, ऑप्टिक न्यूराइटिस का यह पहला मरीज है। फिलहाल, उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित है। इस मरीज ने ब्लैक फंगस के एक नए प्रभाव को उजागर किया है कि फंगल संक्रमण से नसों में सूजन आ जाती है। इस पर विभाग के डॉक्टरों की टीम ने शोध शुरू कर दिया है।
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उन्होंने दावा किया कि अभी तक देशभर में ऑप्टिक न्यूराइटिस का कोई भी मरीज नहीं मिला है। शोध पूरा होने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भेजा जाएगा। बताया कि ब्लैक फंगस के जितने मामले आ रहे हैं, उन पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
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हैलट में भर्ती मरीज के इलाज के साथ डॉक्टरों ने उस पर शोध भी शुरू कर दिया है। आप्टिक न्यूराइटिस मरीज आशीष (30) को 15 दिन पहले हैलट में भर्ती किया गया था। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि आर्टरी ब्लॉकेज के तो कई मरीज आए हैं।
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लेकिन, ऑप्टिक न्यूराइटिस का यह पहला मरीज है। फिलहाल, उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित है। इस मरीज ने ब्लैक फंगस के एक नए प्रभाव को उजागर किया है कि फंगल संक्रमण से नसों में सूजन आ जाती है। इस पर विभाग के डॉक्टरों की टीम ने शोध शुरू कर दिया है।
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उन्होंने दावा किया कि अभी तक देशभर में ऑप्टिक न्यूराइटिस का कोई भी मरीज नहीं मिला है। शोध पूरा होने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल में भेजा जाएगा। बताया कि ब्लैक फंगस के जितने मामले आ रहे हैं, उन पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
अब तक आते रहे ऑर्टरी ब्लॉकेज के केस
डॉ. परवेज के मुताबिक, कोरोना के साथ या फिर निगेटिव होने के बाद जिन मरीजों को ब्लैक फंगस हुआ, उनकी आंख की ऑर्टरी में ब्लॉकेज की शिकायत थी। इलाज के लिए जो जल्दी अस्पताल पहुंचे, उनकी रोशनी बचाने की गुंजाइश रही।
इस दौरान नेत्ररोग विभाग में ऑर्टरी ब्लॉकेज के अधिक रोगी आए। बताया कि ज्यादातर मरीज कोरोना से उबरने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट आए। दरअसल, कोरोना के इलाज में उन्हें स्टेरॉयड भी दी गई। अधिकांश मरीजों की कोरोना के इलाज के दौरान ब्लड शुगर बढ़ गई।
इससे उन्हें ब्लैक फंगस का भी संक्रमण हुआ। उनके मुताबिक, कोरोना की पहली लहर में ऑर्टरी ब्लॉकेज का सिर्फ एक रोगी आया था। दूसरी लहर में इसके छह रोगी आए, जिनका हैलट में इलाज चल रहा है।
डॉ. परवेज के मुताबिक, कोरोना के साथ या फिर निगेटिव होने के बाद जिन मरीजों को ब्लैक फंगस हुआ, उनकी आंख की ऑर्टरी में ब्लॉकेज की शिकायत थी। इलाज के लिए जो जल्दी अस्पताल पहुंचे, उनकी रोशनी बचाने की गुंजाइश रही।
इस दौरान नेत्ररोग विभाग में ऑर्टरी ब्लॉकेज के अधिक रोगी आए। बताया कि ज्यादातर मरीज कोरोना से उबरने के बाद ब्लैक फंगस की चपेट आए। दरअसल, कोरोना के इलाज में उन्हें स्टेरॉयड भी दी गई। अधिकांश मरीजों की कोरोना के इलाज के दौरान ब्लड शुगर बढ़ गई।
इससे उन्हें ब्लैक फंगस का भी संक्रमण हुआ। उनके मुताबिक, कोरोना की पहली लहर में ऑर्टरी ब्लॉकेज का सिर्फ एक रोगी आया था। दूसरी लहर में इसके छह रोगी आए, जिनका हैलट में इलाज चल रहा है।