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परमट मंदिर के तीन पूर्व कर्मचारियों पर बलवा व लूट की एफआईआर

Thu, 08 Jul 2021 01:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jul 2021 01:16 AM IST
सार

  • मंदिर के 14 दानपात्रों व कोठार कक्ष का ताला तोड़कर लाखों रुपये व सोना चांदी लूटने का आरोप
  • पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय महामंत्री महंत प्रेमगिरि ने दर्ज कराई रिपोर्ट, जांच शुरू

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FIR against three former employees of Parmat temple for rioting and looting
FIR

विस्तार

परमट मंदिर के तीन पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के राष्ट्रीय महामंत्री व महामंडलेश्वर महंत प्रेम गिरि ने बलवा, लूट, गालीगलौज व धमकी देने के आरोप में ग्वालटोली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि कर्मचारियों ने 14 दानपात्रों व कोठार कक्ष का ताला तोड़कर लाखों रुपये व सोना चांदी लूटे हैं। साथ ही अखाड़े के साधुओं और मंदिर के महंतों को जान से मारने की धमकी दी। महंत प्रेम गिरि के मुताबिक आनंदेश्वर मंदिर परमट, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा की संपत्ति है। 

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संस्था के संविधान एवं नियमावली के साथ मंदिर के तत्कालीन महंत श्याम गिरि थे। पूर्व में जूना अखाड़ा के साथ (पदेन मंत्री महंत हरि गिरि) के साथ एवं विधिवत रजिस्टर्ड करार तीन जुलाई 2006 को किया गया था। आरोप है कि महंत श्याम गिरि ने उक्त करार एवं हिंदू धर्म एवं नैतिक भावनाओं के विपरीत आचरण कर अनुचित व आपराधिक कृत्य किए।
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इस वजह से उनको महंत पद से हटाकर जून 2011 में रमेश पुरी जी, रामानंद गिरि जी, देवानंद सरस्वती एवं श्री राम गिरि जी को महंत पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। महंत श्याम गिरि को मंदिर के कार्यों से मुक्त कर दिया गया और उनके इलाज का पूरा खर्च व व्यक्तिगत खर्चों के लिए मासिक भत्ते का भुगतान प्रतिमाह किया जाता है। 2020 तक रमेश पुरी ने मंदिर की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
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उनकी मौत के बाद मंदिर में प्रबंधक के रूप में महंत इच्छा गिरि, महंत अरुण भारती, महंत दीपेश्वर गिरि व महंत भावपुरी को मंदिर की व्यवस्था और पूजा पाठ के लिए श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने नियुक्त किया। आरोप है कि मंदिर की संपत्ति पर कब्जा करने व व्यवस्था भंग करने के लिए पूर्व कर्मचारी हरिओम शास्त्री, मनीष शर्मा, वेद प्रकाश दीक्षित उर्फ छोटे कुब्बड़ जबरदस्ती मंदिर प्रांगण में रहे।


उन्होंने आठ-नौ साथियों के साथ मिलकर दो जुलाई को मंदिर की गोशाला में महंत इच्छा गिरि जी, महंत अरुण भारती व महंत दीपेश्वर गिरि को धमकाया व गाली गलौज की और मंदिर छोड़कर जाने के लिए कहा। इसकी सूचना महंतों ने जूना अखाड़े के उच्च पदाधिकारियों को दी। तीन जुलाई की दोपहर बाद वेद प्रकाश दीक्षित व उसके साथियों ने मंदिर के 14 दान पात्रों व कोठार कक्ष का ताला तोड़कर लाखों रुपये व सोने चांदी लूट ली। साधुओं को जान से मारने की धमकी भी दी। तब से जूना अखाड़े के पदाधिकारी मंदिर में प्रवास कर रहे हैं। एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर आरोपों की जांच की जा रही है।
 

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