{"_id":"7d3ce22e2927936465d23610e7729119","slug":"fees-scam-in-government-polytechnic-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय पाॅलीटेक्निक में फीस घोटाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय पाॅलीटेक्निक में फीस घोटाला
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 16 May 2015 01:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय पाॅलीटेक्निक में फीस का बड़ा घोटाला किया गया है। इसका खुलासा प्रिंसिपल एफआर खान की प्रारंभिक छानबीन से हुआ है। स्टूडेंट्स से पूरी फीस ली गई लेकिन सरकारी खाते में आधी या उससे भी कम जमा की गई है। अब प्रिंसिपल की सिफारिश के बाद प्राविधिक शिक्षा निदेशक ओपी वर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं।
इस सिलसिले में जल्द ही एक हाई पावर कमेटी गठित की जा सकती है। शैक्षिक सत्र 2013-14 में राजकीय पाॅलीटेक्निक से 2.70 करोड़ रुपये फीस जमा कराई गई थी। जब प्रिंसिपल ने फीस जमा कराने में गड़बड़ी पकड़ी और सख्ती की तो यही फीस शैक्षिक सत्र 2014-15 में 3.80 करोड़ रुपये जमा हुई।
यानी एक साल की सख्ती से ही 1.10 करोड़ रुपये फीस बढ़ गई। प्रिंसिपल के मुताबिक लंबे समय से चल रहे इस खेल में पाॅलीटेक्निक का स्टाफ भी शामिल है। इसलिए जांच-पड़ताल से पहले ही प्रिंसिपल को हटाने की साजिश रच दी गई है। दरअसल राजकीय पाॅलीटेक्निक में फीस के चार स्ट्रक्चर (10590, 6590, 4440 और 440 रुपये) हैं।
विज्ञापन
स्ट्रक्चर के हिसाब से सालाना फीस ली जाती है लेकिन सरकारी खाते में पूरी नहीं जमा की जाती है। फीस जमा कराने की व्यवस्था मैनुअल है, इसका फायदा घोटालेबाज उठा रहे हैं। जिन स्टूडेंट से 10590 रुपये फीस ली जाती है, उनके अकाउंट में 5590 रुपये फीस जमा होती है। यानी एक स्टूडेंट की फीस से 5000 रुपये मारे जाते हैं।
प्रिंसिपल ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2014-15 से ही बैंक अकाउंट में फीस जमा कराने की व्यवस्था की जानी थी, जिसे साजिशन सफल नहीं होने दिया गया। यही वजह है कि इस सत्र की 15 लाख रुपये फीस सरकारी खाते में नहीं जमा कराई गई। राजकीय पाॅलीटेक्निक की फीस लंबे समय से नहीं बढ़ी है।
इसके बावजूद फीस जमा कराने का बड़ा अंतर खुलकर सामने आ चुका है। अब मामले की जांच प्राविधिक शिक्षा निदेशालय को करानी है। फीस से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज सुरक्षित हैं। जांच-पड़ताल करके घोटालेबाजों को पकड़ा जा सकता है।
प्रिंसिपल ने कहा कि फीस में गड़बड़ी से संबंधित फाइलें खोलीं और साजिश के शिकार हो गए। स्टूडेंट को आगे करके जगह-जगह शिकायतें कराई जा रही हैं। जो शिकायतें हुईं और आंदोलन चले, उसके पीछे फीस के घोटालेबाज लगे हैं।
कम फीस जमा कराए जाने का मामला सामने आया है। राजकीय पाॅलीटेक्निक कानपुर के प्रिंसिपल की शिकायत पर जांच कराई जाएगी। यह मामला बेहद गंभीर है। जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय, कानूनी कार्रवाई के साथ ही घोटालेबाजों से फीस की पुरानी रकम भी वसूली जाएगी।
- ओपी वर्मा, निदेशक प्राविधिक शिक्षा
विज्ञापन
इस सिलसिले में जल्द ही एक हाई पावर कमेटी गठित की जा सकती है। शैक्षिक सत्र 2013-14 में राजकीय पाॅलीटेक्निक से 2.70 करोड़ रुपये फीस जमा कराई गई थी। जब प्रिंसिपल ने फीस जमा कराने में गड़बड़ी पकड़ी और सख्ती की तो यही फीस शैक्षिक सत्र 2014-15 में 3.80 करोड़ रुपये जमा हुई।
विज्ञापन
यानी एक साल की सख्ती से ही 1.10 करोड़ रुपये फीस बढ़ गई। प्रिंसिपल के मुताबिक लंबे समय से चल रहे इस खेल में पाॅलीटेक्निक का स्टाफ भी शामिल है। इसलिए जांच-पड़ताल से पहले ही प्रिंसिपल को हटाने की साजिश रच दी गई है। दरअसल राजकीय पाॅलीटेक्निक में फीस के चार स्ट्रक्चर (10590, 6590, 4440 और 440 रुपये) हैं।
विज्ञापन
स्ट्रक्चर के हिसाब से सालाना फीस ली जाती है लेकिन सरकारी खाते में पूरी नहीं जमा की जाती है। फीस जमा कराने की व्यवस्था मैनुअल है, इसका फायदा घोटालेबाज उठा रहे हैं। जिन स्टूडेंट से 10590 रुपये फीस ली जाती है, उनके अकाउंट में 5590 रुपये फीस जमा होती है। यानी एक स्टूडेंट की फीस से 5000 रुपये मारे जाते हैं।
प्रिंसिपल ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2014-15 से ही बैंक अकाउंट में फीस जमा कराने की व्यवस्था की जानी थी, जिसे साजिशन सफल नहीं होने दिया गया। यही वजह है कि इस सत्र की 15 लाख रुपये फीस सरकारी खाते में नहीं जमा कराई गई। राजकीय पाॅलीटेक्निक की फीस लंबे समय से नहीं बढ़ी है।
इसके बावजूद फीस जमा कराने का बड़ा अंतर खुलकर सामने आ चुका है। अब मामले की जांच प्राविधिक शिक्षा निदेशालय को करानी है। फीस से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज सुरक्षित हैं। जांच-पड़ताल करके घोटालेबाजों को पकड़ा जा सकता है।
प्रिंसिपल ने कहा कि फीस में गड़बड़ी से संबंधित फाइलें खोलीं और साजिश के शिकार हो गए। स्टूडेंट को आगे करके जगह-जगह शिकायतें कराई जा रही हैं। जो शिकायतें हुईं और आंदोलन चले, उसके पीछे फीस के घोटालेबाज लगे हैं।
कम फीस जमा कराए जाने का मामला सामने आया है। राजकीय पाॅलीटेक्निक कानपुर के प्रिंसिपल की शिकायत पर जांच कराई जाएगी। यह मामला बेहद गंभीर है। जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय, कानूनी कार्रवाई के साथ ही घोटालेबाजों से फीस की पुरानी रकम भी वसूली जाएगी।
- ओपी वर्मा, निदेशक प्राविधिक शिक्षा