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कल बेटी का निकाह और 29 साल पुराने मुकदमे में पिता चला गया जेल
Sat, 13 Feb 2021 03:48 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला , कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला , कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 13 Feb 2021 03:48 PM IST
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जो पिता अपनी बेटी को धूमधाम से घर से रुखसत करने के लिए उसके निकाह की तैयारी कर रहा था वह पिता अचानक कोर्ट से 29 साल पुराने मुकदमे में सजा हो जाने के कारण जेल चला गया। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट पवन कुमार श्रीवास्तव ने चार गैंगस्टर को चार-चार साल कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा शुक्रवार को सुनाई है।
सजा पाने वालों में वह पिता भी है जो सोमवार को दोष सिद्ध होने के बाद न्यायिक हिरासत से फरार हो गया था। चमनगंज थाने में वर्ष 1992 में पांच आरोपियों चमनगंज के इकबाल उर्फ बाले, इस्लामुद्दीन, निजामुद्दीन, मो.खुर्शीद उर्फ मामा और पप्पू के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इस्लामुद्दीन की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। इकबाल 19 साल से जेल में ही कैद है। विशेष लोक अभियोजक घनश्याम श्रीवास्तव ने बताया कि चारों आरोपी जेल से कोर्ट लाए गए और सजा सुनाई गई। सोमवार को चारों आरोपियों को दोषसिद्ध कर दिया गया था लेकिन आरोपी मो.खुर्शीद उर्फ मामा के न्यायिक हिरासत से फरार हो जाने के कारण सजा नहीं सुनाई जा सकी थी।
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मामा ने मंगलवार को कोर्ट में कर दिया था समर्पण
गैंगस्टर मामले में कोर्ट ने सोमवार को चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था इसके बाद मोहम्मद खुर्शीद उर्फ मामा सजा सुनने से पहले ही कोर्ट से घर चला गया। अगले दिन जब अखबारों में उसकी फरारी की सूचना छपी और कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज होने की बात उसे पता चली तो मंगलवार को मामा ने अपने अधिवक्ता इफ्तिखार जमशेद के माध्यम से कोर्ट में समर्पण कर दिया था।
समर्पण अजी में उसने लिखा था कि वह जानबूझकर हिरासत से नहीं भागा। 14 फरवरी को उसकी बेटी का निकाह है अचानक घर से पत्नी की तबीयत खराब होने की सूचना फोन पर मिली जिस पर वह हड़बड़ाहट में घर चला गया। सजा सुनाए जाने की जानकारी उसे नहीं थी।
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सजा पाने वालों में वह पिता भी है जो सोमवार को दोष सिद्ध होने के बाद न्यायिक हिरासत से फरार हो गया था। चमनगंज थाने में वर्ष 1992 में पांच आरोपियों चमनगंज के इकबाल उर्फ बाले, इस्लामुद्दीन, निजामुद्दीन, मो.खुर्शीद उर्फ मामा और पप्पू के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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इस्लामुद्दीन की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। इकबाल 19 साल से जेल में ही कैद है। विशेष लोक अभियोजक घनश्याम श्रीवास्तव ने बताया कि चारों आरोपी जेल से कोर्ट लाए गए और सजा सुनाई गई। सोमवार को चारों आरोपियों को दोषसिद्ध कर दिया गया था लेकिन आरोपी मो.खुर्शीद उर्फ मामा के न्यायिक हिरासत से फरार हो जाने के कारण सजा नहीं सुनाई जा सकी थी।
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मामा ने मंगलवार को कोर्ट में कर दिया था समर्पण
गैंगस्टर मामले में कोर्ट ने सोमवार को चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था इसके बाद मोहम्मद खुर्शीद उर्फ मामा सजा सुनने से पहले ही कोर्ट से घर चला गया। अगले दिन जब अखबारों में उसकी फरारी की सूचना छपी और कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज होने की बात उसे पता चली तो मंगलवार को मामा ने अपने अधिवक्ता इफ्तिखार जमशेद के माध्यम से कोर्ट में समर्पण कर दिया था।
समर्पण अजी में उसने लिखा था कि वह जानबूझकर हिरासत से नहीं भागा। 14 फरवरी को उसकी बेटी का निकाह है अचानक घर से पत्नी की तबीयत खराब होने की सूचना फोन पर मिली जिस पर वह हड़बड़ाहट में घर चला गया। सजा सुनाए जाने की जानकारी उसे नहीं थी।