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संकट की घड़ी: सिर्फ एक शिफ्ट में रिफिल होते ऑक्सीजन सिलिंडर, प्राणवायु के लिए मचा त्राहिमाम
Wed, 28 Apr 2021 12:24 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 28 Apr 2021 12:24 PM IST
सार
फतेहपुर जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल करने का प्लांट मुरारी एयर प्रोडक्ट के नाम से सौंरा में साल 2014- 15 से संचालित है। इस प्लांट की रिफलिंग क्षमता फिलहाल 7000 क्यूबिक लीटर की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना महामारी के दौर में ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर जिलेभर में आपाधापी मची है। हर कोई प्राणवायु ऑक्सीजन का कम से कम एक सिलिंडर लेकर रख लेना चाहता है। जनपद के इकलौते ऑक्सीजन प्लांट को क्षमता के लिहाज से महज एक शिफ्ट में ही चलाया जा रहा है। जिससे सिलिंडर रिफिलिंग को रफ्तार नहीं मिल पा रही है।
रोजाना बड़ी संख्या में जरूरतमंद निराश हो रहे हैं। जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल करने का प्लांट मुरारी एयर प्रोडक्ट के नाम से सौंरा में साल 2014- 15 से संचालित है। इस प्लांट की रिफलिंग क्षमता फिलहाल 7000 क्यूबिक लीटर की है। यहां पर जमशेदपुर और राउरकेला से ऑक्सीजन आती है।
इन जगह से आने वाली लिक्विड ऑक्सीजन को प्लांट में सिलिंडरो में रिफिल किया जाता है। लिक्विड को एयर में बदल करके ऑक्सीजन के सिलिंडर रिफिल किए जाते हैं। इस वक्त रोजाना प्लांट की कार्यक्षमता छोटे और बड़े तकरीबन 600 सिलिंडर रिफिल करने की है।
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जिसमें 400 बड़े और 200 छोटे सिलिंडर भरे जा सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हो पा रहा है। मौजूदा समय में यह प्लांट प्रतिदिन औसतन चार से सवा चार सौ सिलिंडर दे पा रहा है। यही कारण है कि रोज बड़ी संख्या में इस प्लांट के बाहर आमजन की हताशा उजागर हो रही है।
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रोजाना बड़ी संख्या में जरूरतमंद निराश हो रहे हैं। जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल करने का प्लांट मुरारी एयर प्रोडक्ट के नाम से सौंरा में साल 2014- 15 से संचालित है। इस प्लांट की रिफलिंग क्षमता फिलहाल 7000 क्यूबिक लीटर की है। यहां पर जमशेदपुर और राउरकेला से ऑक्सीजन आती है।
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इन जगह से आने वाली लिक्विड ऑक्सीजन को प्लांट में सिलिंडरो में रिफिल किया जाता है। लिक्विड को एयर में बदल करके ऑक्सीजन के सिलिंडर रिफिल किए जाते हैं। इस वक्त रोजाना प्लांट की कार्यक्षमता छोटे और बड़े तकरीबन 600 सिलिंडर रिफिल करने की है।
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जिसमें 400 बड़े और 200 छोटे सिलिंडर भरे जा सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हो पा रहा है। मौजूदा समय में यह प्लांट प्रतिदिन औसतन चार से सवा चार सौ सिलिंडर दे पा रहा है। यही कारण है कि रोज बड़ी संख्या में इस प्लांट के बाहर आमजन की हताशा उजागर हो रही है।
डेढ़ महीने पहले मिला मेडिकल सप्लाई का लाइसेंस
फतेहपुर जिले के इकलौते एयर प्रोडक्ट प्लांट अभी तक रेलवे और इंडस्ट्रियल एरिया के सिलिंडर रिफिल करता रहा है। डेढ़ महीने पहले ऑक्सीजन प्लांट को मेडिकल सप्लाई का लाइसेंस हासिल हुआ है। इस प्लांट से जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों समेत कानपुर के भी नौ निजी अस्पताल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है।
5 साल बाद भी नहीं बढ़ाई गई क्षमता
जिले के इकलौते एयर प्लांट से 24 घंटे में 600 के आसपास सिलिंडर रिफिल किया जा सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में स्थापित हुई 7000 क्यूबिक लीटर की यूनिट का एक शिफ्ट में ही संचालन हो रहा है। पहले इस प्लांट में शाम 6:00 बजे तक काम होता था। बदले परिवेश में 2 घंटे ज्यादा काम हो रहा है।
फतेहपुर जिले के इकलौते एयर प्रोडक्ट प्लांट अभी तक रेलवे और इंडस्ट्रियल एरिया के सिलिंडर रिफिल करता रहा है। डेढ़ महीने पहले ऑक्सीजन प्लांट को मेडिकल सप्लाई का लाइसेंस हासिल हुआ है। इस प्लांट से जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों समेत कानपुर के भी नौ निजी अस्पताल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है।
5 साल बाद भी नहीं बढ़ाई गई क्षमता
जिले के इकलौते एयर प्लांट से 24 घंटे में 600 के आसपास सिलिंडर रिफिल किया जा सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में स्थापित हुई 7000 क्यूबिक लीटर की यूनिट का एक शिफ्ट में ही संचालन हो रहा है। पहले इस प्लांट में शाम 6:00 बजे तक काम होता था। बदले परिवेश में 2 घंटे ज्यादा काम हो रहा है।
ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए मौजूदा वक्त इस एयर प्लांट को सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक चलाया जा रहा है। प्लांट की क्षमता 7000 क्यूबिक है। जिसे बढ़ा करके 15000 क्यूबिक करने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। - दिनेश अग्निहोत्री, कार्यवाहक मैनेजर