फतेहपुर धमाका: विस्फोट का राज अब भी अनसुलझा, कार्बाइड से बनी गैस पर टिकी जांच, एसपी की अपील- अफवाह न फैलाएं
Fatehpur News: फतेहपुर जिले में कानपुर-प्रयागराज हाईवे के पास 28 सितंबर को फल कारोबारी सुरेश गुप्ता के घर हुए भीषण विस्फोट में पांच की मौत के तीन दिन बाद भी हादसे की मुख्य वजह अनसुलझी है। शुरुआती जांच में रसोई गैस सिलिंडर को वजह माना जा रहा था, लेकिन मलबे से एक किलो से अधिक कार्बाइड और पथरीले टुकड़े मिलने के बाद अब जांच की सुई एसिटिलीन गैस पर टिक गई है।
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फतेहपुर जिले में कानपुर-प्रयागराज हाईवे से करीब 100 मीटर दूर फल कारोबारी के घर 28 सितंबर को हुए भीषण विस्फोट की जांच में तीन दिन बाद भी टीमें किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं। हालांकि टीम की जांच अब कार्बाइड से बनी गैस पर टिकी है।
मलवां थाने के कस्बा बनियन मोहल्ला निवासी फल कारोबारी सुरेश गुप्ता उर्फ धुन्नर के घर सोमवार शाम हुए विस्फोट में दूसरी मंजिल की छत ढह गई थी। हादसे में सुरेश गुप्ता के पुत्र कुणाल (18), भतीजा आलोक गुप्ता (25), भतीजे अर्पित (15), वेद (8) पुत्र स्व. रोहित और परिवार के ही गुड्डन का पुत्र यश उर्फ टुकटुक (6) की मौत हो गई थी।
घर से एक किलो से अधिक कार्बाइड मिला
पुलिस और प्रशासन की प्राथमिक जांच में विस्फोट की वजह रसोई गैस सिलिंडर बताई गई थी। साथ ही, फल कारोबारी के घर एक किलो से अधिक कार्बाइड मिलने के बाद इसे भी विस्फोट की संभावित वजह मानकर जांच की जा रही है। मौके से कार्बाइड की मौजूदगी और पथरीले टुकड़े मिलने के कारण जांच टीम इस पहलू को भी गंभीरता से देख रही है।
अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है पुलिस
वहीं, आतिशबाजी के भंडारण की भी जांच की जा रही है। हालांकि, आतिशबाजी से कई धमाके होने की संभावना रहती है, जबकि मौके पर एक ही धमाका हुआ। एसडीआरएफ, दमकल, फॉरेंसिक और गैस एजेंसी की टीमें घटनास्थल की जांच कर चुकी हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।
विस्फोट में बचे कार्बाइड के हो सकते हैं टुकड़े
आसपास के घरों में मिले पथरीले टुकड़ों को लेकर भी जांच की जा रही है। आतिशबाजी निर्माताओं के अनुसार आतिशबाजी में इतने बड़े पत्थर के टुकड़ों का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि बेहद बारीक कणों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आशंका है कि ये टुकड़े विस्फोट में बचे कार्बाइड के हो सकते हैं।
कोई पटाखा फैक्टरी संचालित नहीं थी
कार्बाइड के संपर्क में पानी या नमी आने से बनने वाली गैस तक किसी तरह की चिंगारी पहुंचने पर विस्फोट की स्थिति बन सकती है। एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि विस्फोट को लेकर कई बिंदुओं पर जांच जारी है। जल्द ही कारण स्पष्ट होगा। मौके पर कोई पटाखा फैक्टरी संचालित नहीं थी। उन्होंने अवैध पटाखा फैक्टरी की भ्रामक अफवाह न फैलाने की अपील की है।
कार्बाइड का काफी लोग इस्तेमाल करते हैं। कार्बाइड में नमी के बाद ही विस्फोट संभव है। कार्बाइड में पानी या नमी पहुंचने पर बंद जगह में एसिटिलीन गैस बनती है। यह गैस ज्वलनशील होती है। यदि बंद स्थान में इसकी मात्रा बढ़ती जाए और आग या चिंगारी का संपर्क हो तो भीषण विस्फोट हो सकता है। मौके पर आतिशबाजी जैसी सामग्री होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में विस्फोटक सामग्रियों का मिश्रण भी भीषण विस्फोट का रूप ले सकता है। -डाॅ. मधुलिका, रसायन विज्ञान प्रवक्ता, डाॅ. बीआर आंबेडकर महिला डिग्री कॉलेज
कुएं से झोले में निकला होली खेलने का सामान
विस्फोट के बाद हादसास्थल से करीब 20 मीटर दूर कुएं में संदिग्ध झोला पड़े होने की चर्चा ग्रामीणों में रही। झोले में आतिशबाजी होने की आशंका जताई गई। ग्रामीणों ने कूड़े-कचरे से पटे झोले को कुएं से बाहर निकाला। उसमें होली खेलने में इस्तेमाल होने वाला स्प्रे, मिठाई का खाली डिब्बा, सफेद कपड़ा, पूजा सामग्री और मूर्ति मिली। ग्रामीणों के अनुसार झोला कई दिनों से कुएं में पड़ा था। किसी ने झोले में आतिशबाजी भरकर फेंकने की अफवाह फैलाई थी।