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लॉकडाउन में भूले मालिक को अनलॉक में याद आए मजदूर, बोले तुम लौट आओ कार का किराया हम देंगे
Tue, 02 Jun 2020 01:35 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 02 Jun 2020 01:35 AM IST
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लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर
- फोटो : social media
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फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले मजदूरों को भूलने वाले मालिकों को अनलॉक शुरू होते ही उनकी याद आ गई है। वे फोन कर कर्मचारियों को बुलाने लगे हैं। और तो और किराया भी देने को तैयार हैं।
ऐसा ही कान्हेपुर गांव में हुआ। यहां के दो युवक दिल्ली में एक कंपनी के अधिकारी की कार चलाते थे। उनके मालिक ने दो माह बाद फोन कर बुलाया। दोनों ने पैसे न होने की बात की तो उन्होंने मनुहार की वे कार बुककर चले आएं, किराया वे दे देंगे।
इस पर दोनों युवक किराये की गाड़ी से रविवार रात दिल्ली रवाना हो गए। गांव कान्हेपुर निवासी आदित्य कुमार व बृजेश दिल्ली में एक कंपनी के अधिकारी की निजी कार चलाकर परिवार का पालन पोषण करते थे।
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ऐसा ही कान्हेपुर गांव में हुआ। यहां के दो युवक दिल्ली में एक कंपनी के अधिकारी की कार चलाते थे। उनके मालिक ने दो माह बाद फोन कर बुलाया। दोनों ने पैसे न होने की बात की तो उन्होंने मनुहार की वे कार बुककर चले आएं, किराया वे दे देंगे।
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इस पर दोनों युवक किराये की गाड़ी से रविवार रात दिल्ली रवाना हो गए। गांव कान्हेपुर निवासी आदित्य कुमार व बृजेश दिल्ली में एक कंपनी के अधिकारी की निजी कार चलाकर परिवार का पालन पोषण करते थे।
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लॉकडाउन होने पर मालिक ने साथ छोड़ दिया। इस कारण दोनों परिवार समेत गांव लौट आए थे। अनलॉक शुरू होने से पहले ही उनके मालिक को उनकी याद आ गई। जाने से पहले दोनों ने बताया कि आर्थिक परेशानी से वे काम करने दिल्ली गए थे।
लॉकडाउन होने पर वहां जब संकट पैदा हुआ तो घर लौट आए। गांव में रोजगार न होने से आर्थिक के साथ अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। 29 मई को जब मालिक का फोन आया तो उनको बताया कि दिल्ली तक आने के लिए उनके पास पैसे नहीं है।
इस पर मालिक ने मनुहार की कि वे कार बुक कर दिल्ली चले आएं। वहां पहुंचने पर कार का भुगतान वह कर देंगे। दोनों युवक 31 मई देर रात सात हजार रुपये में किराये पर गाड़ी करके परिवार समेत दिल्ली चले गए।
लॉकडाउन होने पर वहां जब संकट पैदा हुआ तो घर लौट आए। गांव में रोजगार न होने से आर्थिक के साथ अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। 29 मई को जब मालिक का फोन आया तो उनको बताया कि दिल्ली तक आने के लिए उनके पास पैसे नहीं है।
इस पर मालिक ने मनुहार की कि वे कार बुक कर दिल्ली चले आएं। वहां पहुंचने पर कार का भुगतान वह कर देंगे। दोनों युवक 31 मई देर रात सात हजार रुपये में किराये पर गाड़ी करके परिवार समेत दिल्ली चले गए।