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Farrukhabad: जवान बेटों के शव देख पथराईं पिता की आंखें, पुलिस बोली-सील करने के लिए कपड़ा मंगवाओ

Sun, 09 Nov 2025 11:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 09 Nov 2025 11:40 PM IST
सार

Farrukhabad News: बाइकों की भिड़ंत में जान गंवाने वाले संभव और प्रवीन को कादरीगेट पुलिस बॉडी बैग भी उपलब्ध नहीं करवा पाई। 

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Farrukhabad: father's eyes filled with tears upon seeing the bodies of his young sons
मृतकों की फाइल फोटो, मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुलिस कितनी संवेदनशील है, इसका सच लोहिया अस्पताल की मोर्चरी के बाहर देखने को मिला। जवान बेटों संभव और प्रवीन के शव सामने रखे थे। उस वक्त पुलिस दोनों के परिजनों से बोली, बाजार से कपड़ा मंगवाओ। इसके बाद शवों को सील करेंगे। बेटे के शव से लिपटे संभव के पिता चीखने लगे, जल्दी ले आओ बेटे के लिए आखिरी कपड़ा। यह सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
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कादरीगेट पुलिस ने रविवार को संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। शनिवार रात बाइकें भिड़ने से संभव मिश्रा और प्रवीन यादव की मौत हो गई थी। दोनों के शव लोहिया अस्पताल की मोर्चरी से रविवार सुबह निकाले गए। उस समय दोनों के परिजन बेहाल थे। मां, भाई-बहन, पिता शवों से लिपट कर दहाड़ें मार रहे थे। उसी समय पंचनामा भरने पहुंचे थाने के एक दरोगा ने परिजनों से कहा कि बाजार से कपड़ा मंगवाओ ताकि शवों को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया जा सके।
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प्रवीन के परिजन पहले कपड़ा ले आए तो उसका शव सील कर दिया गया। संभव के शव से मां, बहन, रिश्तेदार और पिता राजन मिश्रा लिपटकर रो रहे थे। दरोगा की बात सुनकर राजन अचानक चीख पड़े। बोले, मेरे बेटे के लिए जल्दी कपड़ा ले आओ। इसके बाद स्ट्रेचर पर पड़े संभव के शव पर अपना सिर रखकर फफकने लगे। पिता की यह दशा देख हर आंख नम हो गई।
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Farrukhabad: father's eyes filled with tears upon seeing the bodies of his young sons
मृतक कमल मिश्रा के रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पुलिस पर भी सवाल खड़े हुए कि जब शासन से बॉडी बैग की धनराशि मिलती है तो छह माह से उसे मंगवाने की जरूरत क्यों नहीं समझी गई। आखिरकार जब परिजन कपड़ा लाए, तब संभल के शव को सील किया जा सका। सूत्र बताते हैं कि कादरीगेट थाने में पिछले छह माह से बॉडी बैग नहीं हैं। इसके चलते पुलिस कर्मियों को मरने वाले के परिजनों से बॉडी बैग मंगाने पड़ते हैं।

 

Farrukhabad: father's eyes filled with tears upon seeing the bodies of his young sons
निजी अस्पताल में परिजनों से बातचीत करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
जरा जिम्मेदारों की बात भी सुनों
एसपी आरती सिंह के सीयूजी नंबर पर फोन किया गया तो पीआरओ ने रिसीव किया। उन्होंने बताया कि मैडम अभी आईं हैं। बात नहीं हो सकती। बॉडी बैग न होने की उन्हें जानकारी नहीं है। एएसपी डा. संजय कुमार ने बताया कि बॉडी बैग पुलिस लाइन में उपलब्ध हैं। यदि थाने से मांग की गई होती तो जरूर उपलब्ध कराए जाते। कादरीगेट प्रभारी थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने बताया कि उन्हें आज ही पता चला है कि थाने में बॉडी बैग नहीं हैं। जल्द ही इसकी व्यवस्था करेंगे।

साड़ी में सील हुआ कमल का शव
गंगानगर में फंदा लगाकर जान देने वाले कमल मिश्रा को भी बॉडी बैग नसीब नहीं हुआ। उसके शव को साड़ी में सील कर पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया।
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