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4 घंटे स्कूल के कमरे में ‘कैद’ रहे बच्चे, किसानों ने बंद कर दिए 50 आवारा जानवर
Fri, 25 Jan 2019 12:18 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 25 Jan 2019 12:18 AM IST
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विद्यालय परिसर में बंद आवारा जानवर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर देहात में झींझक ब्लॉक के जुरिया गांव के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल परिसर में गुरुवार सुबह 9 बजे गांव के किसानों ने 50 आवारा जानवर बंद कर दिए। उस समय स्कूल में 13 बच्चे मौजूद थे। धमाचौकड़ी मचाते घुसे आवारा जानवरों को देख सहमे शिक्षकों से बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। लेखपाल और पुलिस के आने पर 1 बजे परिसर से जानवरों के निकलने के बाद बच्चों को कमरे से निकालकर घर भेजा गया।
जुरिया गांव का प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में है। प्राथमिक स्कूल में 77 और उच्च प्राथमिक स्कूल में 33 बच्चे पंजीकृत हैं। गुरुवार को सुबह 9 बजे उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जगराम व प्राथमिक के प्रधानाध्यापक आदित्य वर्मा, शिक्षक व 13 बच्चे स्कूल पहुंच गए थे। इसी बीच गांव के किसान खेतों से करीब 50 आवारा जानवर खदेड़कर लाए और स्कूल परिसर में बंद कर दिए। किसान गेट पर डंडे लेकर खडे़ रहे। परिसर में जानवरों की धमाचौकड़ी से बच्चों के साथ शिक्षक भी सहम गए।
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जुरिया गांव का प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में है। प्राथमिक स्कूल में 77 और उच्च प्राथमिक स्कूल में 33 बच्चे पंजीकृत हैं। गुरुवार को सुबह 9 बजे उच्च प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जगराम व प्राथमिक के प्रधानाध्यापक आदित्य वर्मा, शिक्षक व 13 बच्चे स्कूल पहुंच गए थे। इसी बीच गांव के किसान खेतों से करीब 50 आवारा जानवर खदेड़कर लाए और स्कूल परिसर में बंद कर दिए। किसान गेट पर डंडे लेकर खडे़ रहे। परिसर में जानवरों की धमाचौकड़ी से बच्चों के साथ शिक्षक भी सहम गए।
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शिक्षकों ने बच्चों को जूनियर स्कूल के एक कक्ष में बंद कर दिया। इसके बाद अपने उच्चाधिकारियों के अलावा ग्राम प्रधान कमलेश, थाना और लेखपाल मोहन सिंह को सूचना दी। कुछ देर बाद प्रधान मौके पर पहुंचे गए लेकिन लेखपाल व चौकी प्रभारी अनुराग पांडेय करीब दो घंटे बाद पहुंचे। पुलिस, लेखपाल व प्रधान ने किसानों को समझाया।
करीब एक बजे किसान माने तब लेखपाल ने जानवरों को परिसर से निकलवाकर जलिहापुर के जंगलो में छुड़वा दिया। परिसर में जानवर बंद करने के बाद जो बच्चे आए उन्हें गेट पर खड़े किसानों ने ही घर लौटा दिया था।
करीब एक बजे किसान माने तब लेखपाल ने जानवरों को परिसर से निकलवाकर जलिहापुर के जंगलो में छुड़वा दिया। परिसर में जानवर बंद करने के बाद जो बच्चे आए उन्हें गेट पर खड़े किसानों ने ही घर लौटा दिया था।