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ठंड न पड़ने से अन्नदाताओं के माथे पर बल
अमर उजाला ब्यूूराो, कानपुर देहात।
Updated Fri, 08 Jan 2016 12:56 AM IST
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कड़ाके की ठंड न पड़ने से किसान खासे परेशान हैं। खेतों में गेहूं, आलू
सहित अन्य फसलों की बुवाई तो कर दी लेकिन तापमान में गिरावट न होने से
फसलों में बढ़िया पैदावार को लेकर संकट मंडरा रहा है।
वहीं, कृषि अधिकारियों की माने तो तापमान में गिरावट न आई तो गेहूं, आलू की पैदावार 10 फीसदी तक कम हो सकती है।
आमतौर पर मध्य दिसंबर माह से कड़ाके की सर्दी का प्रकोप शुरू हो जाता है। लेकिन, इस साल मौसम की चाल बिल्कुल उलट है। जनवरी का प्रथम सप्ताह बीतने के बावजूद कड़ाके की ठंड तो दूर की बात सुबह के समय नाममात्र का कोहरा रहता है। सुबह 10 बजे के बाद सूर्यदेव की तपिश बढने लगती है।
जो दोपहर तक अपने चरम पर पहुंच जाती है। पूर्व वर्षों के दौरान जनवरी माह में अधिकतम तापमान 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था। लेकिन, इस वर्ष अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। जिसका दुष्प्रभाव गेहूं, आलू सहित अन्य फसलों पर पड़ रहा है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले के 40 फीसदी खेतों में समयावधि के दौरान गेहूं, आलू सहित अन्य फसलों की बुवाई की गई है। जबकि सूखे के चलते बारिश का इंतजार कर रहे 60 फीसदी किसानों ने पिछेती गेहूं की बुवाई की है। ऐसे में गेहूं, आलू फसल में लिए जरूरी अधिक ठंड न होने से अगेती फसल बुवाई करने वाले किसान परेशान हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गेहूं की बढ़िया पैदावार के लिए करीब 15 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। लेकिन, मौजूदा समय में तापमान 25 डिग्री के आसपास चल रहा है। जिसके चलते गेहूं में किल्ले नहीं फूटेंगे। साथ ही आलू के कंद भी नहीं बढ़ेंगे। कम ठंड होने का असर फसलों की पैदावार पर होगा और गेहूं, आलू का उत्पादन घटेगा।
वहीं, कृषि अधिकारियों की माने तो तापमान में गिरावट न आई तो गेहूं, आलू की पैदावार 10 फीसदी तक कम हो सकती है।
आमतौर पर मध्य दिसंबर माह से कड़ाके की सर्दी का प्रकोप शुरू हो जाता है। लेकिन, इस साल मौसम की चाल बिल्कुल उलट है। जनवरी का प्रथम सप्ताह बीतने के बावजूद कड़ाके की ठंड तो दूर की बात सुबह के समय नाममात्र का कोहरा रहता है। सुबह 10 बजे के बाद सूर्यदेव की तपिश बढने लगती है।
जो दोपहर तक अपने चरम पर पहुंच जाती है। पूर्व वर्षों के दौरान जनवरी माह में अधिकतम तापमान 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता था। लेकिन, इस वर्ष अधिकतम तापमान 22 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। जिसका दुष्प्रभाव गेहूं, आलू सहित अन्य फसलों पर पड़ रहा है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले के 40 फीसदी खेतों में समयावधि के दौरान गेहूं, आलू सहित अन्य फसलों की बुवाई की गई है। जबकि सूखे के चलते बारिश का इंतजार कर रहे 60 फीसदी किसानों ने पिछेती गेहूं की बुवाई की है। ऐसे में गेहूं, आलू फसल में लिए जरूरी अधिक ठंड न होने से अगेती फसल बुवाई करने वाले किसान परेशान हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गेहूं की बढ़िया पैदावार के लिए करीब 15 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। लेकिन, मौजूदा समय में तापमान 25 डिग्री के आसपास चल रहा है। जिसके चलते गेहूं में किल्ले नहीं फूटेंगे। साथ ही आलू के कंद भी नहीं बढ़ेंगे। कम ठंड होने का असर फसलों की पैदावार पर होगा और गेहूं, आलू का उत्पादन घटेगा।