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UP: किसान सुसाइड केस! प्रियरंजन का बड़ा आरोप, बोला- साजिश के पीछे अखिलेश यादव, राजाराम की भी थी जमीन पर नजर

Sat, 02 Dec 2023 08:51 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 02 Dec 2023 08:51 AM IST
सार

Kanpur Crime: प्रियरंजन ने कहा कि इस मामले में वह दोषी पाया जाता है, तो अपनी पूरी संपत्ति बाबू सिंह की बेटियों के नाम कर देगा। उसने सपा मुखिया अखिलेश यादव समेत सपाइयों को चुनौती भी दी। कहा कि अगर जमीन हड़पने का दोष नहीं साबित होता है, तो आरोप लगा रहे सपाई भी अपनी एक चौथाई संपत्ति उन बेटियों के नाम कर दें।

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Farmer suicide case, Priyaranjans big allegation, said Akhilesh Yadav was behind the conspiracy
kanpur farmer suicide case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में सीएमएम कोर्ट में हाईकोर्ट का आदेश दाखिल करने के बाद शुक्रवार को डॉ. प्रियरंजन आशु दिवाकर श्यामनगर स्थित अपने घर पहुंचा और मीडिया से बात की। आरोप लगाया कि वर्षों कब्जे में रही जमीन को बाबू सिंह को वापस दिलाने और मैनपुरी में मिली हार का बदला लेने के लिए सपाइयों ने उनके खिलाफ साजिश रची है।

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस षड्यंत्र के पीछे हैं। कहा कि पूर्व सांसद राजाराम की वर्षों से इस जमीन पर नजर थी। इसमें सपा नेता नरेंद्र यादव उनके बेटे दीपक यादव भी शामिल हैं। आशु दिवाकर ने दावा किया कि बाबू सिंह ने आत्महत्या नहीं की, उनकी हत्या की गई है। बाबू सिंह की हत्या में वही लोग शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी सुसाइड नोट लिखा है।
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इस फर्जी सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट भी नहीं आ सकी। आरोप लगाया कि बाबू को वसीयत में मिली जमीन हाथ से जाते देख सपाइयों ने षड्यंत्र रचा है। कहा कि अब इस धर्मयुद्ध में आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। इसमें उनकी हत्या भी हो सकती है, इसके जिम्मेदार सपा मुखिया अखिलेश यादव और अन्य सपाई होंगे।

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दोषी निकला, तो अपनी संपत्ति किसान की बेटियों नाम कर दूंगा
प्रियरंजन ने कहा कि इस मामले में वह दोषी पाया जाता है, तो अपनी पूरी संपत्ति बाबू सिंह की बेटियों के नाम कर देगा। उसने सपा मुखिया अखिलेश यादव समेत सपाइयों को चुनौती भी दी। कहा कि अगर जमीन हड़पने का दोष नहीं साबित होता है, तो आरोप लगा रहे सपाई भी अपनी एक चौथाई संपत्ति उन बेटियों के नाम कर दें। इस चुनौती के लिए सपाइयों को सामने आना चाहिए।

सपा के विरोधी थे बाबू सिंह यादव
डॉ. प्रियरंजन ने कहा कि बाबू सिंह की संपत्ति सपा सरकार में सपाइयों द्वारा हड़पी गई थी। वहीं बाबू सिंह के मौत के जिम्मेदार हैं। इसलिए वे समाजवादी पार्टी के विरोधी थे। लिहाजा बाबू सिंह अपने रिश्तेदार बबलू के माध्यम से जमीन छुड़वाने के लिए उसके पास आए थे। बताया कि वह सिर्फ दो बार बाबू सिंह के घर गए। एक बार बीजेपी का झंडा लगाने और दोबारा उनके आग्रह पर चाय पीने।

सपा मुखिया से की थी पैरवी, कहा था-यादव का मामला है, दूर रहो
डॉ. प्रियरंजन ने बताया कि बाबू सिंह अपने रिश्तेदार बबलू यादव व ड्राइवर के माध्यम से उसके संपर्क में आए। इस दौरान सपा की सरकार थी। तब उन्होंने अखिलेश यादव से बाबू सिंह यादव की जमीन वापस दिलाने की पैरवी की थी। उनसे कहा था कि बाबू सिंह ड्राइवर के रिश्तेदार हैं। कम से कम उनकी इतनी मदद करवा दीजिए।

भाजपा सरकार आने के बाद फिर गुहार लगाई
इस पर अखिलेश यादव ने साफ मना कर दिया था। कहा था कि यादवों का मामला है, इससे आप दूर रहो। इसके बाद भाजपा सरकार आने के बाद फिर बाबू सिंह और उसकी बेटियों ने उससे गुहार लगाई। इसके बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के हस्तक्षेप से हुई जांच पर जमीन वापस मिली।

जमीन वर्ष 2022 में बाबू सिंह के नाम पर आई
मामले में एसडीएम सदर के आदेश पर ही चकेरी थाने में नरेंद्र यादव पर 2019 में मुकदमा हुआ। इसमें नरेंद्र यादव की नौ माह बाद गिरफ्तारी हुई। फिर वह करीब छह माह जेल में भी रहा। इसके बाद से यह रंजिश रखने लगा। यह जमीन वर्ष 2022 में बाबू सिंह के नाम पर आई थी।

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