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सिंचाई न कर पाने से लगा ऐसा सदमा कि खेत में ही गिरकर किसान ने तोड़ दिया दम
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 02 Nov 2017 11:10 PM IST
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मृतक किसान की फाइल फोटो
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खेत में पानी लगाने गए किसान को नहर से पानी नहीं मिल सका। इससे निराश होकर खेत में ही बैठ गया। कुछ देर बाद सदमे के कारण वहीं गिरकर दम तोड़ दिया।
जालौन/माधौगढ़ः नहर से पानी न मिल पाने के कारण खेत की सिंचाई नहीं कर पाए किसान की सदमे में जान चली गई। ग्रामीणों की सूचना पर लेखपाल ने गांव पहुंचकर तहकीकात की। लेखपाल का कहना है कि मामले की स्थिति समझने के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट देंगे।
माधौगढ़ के हरौली गांव के किसान शिशुपाल (59) गुरुवार सुबह खेत में पानी लगाने गए थे, पर नहर से पानी नहीं मिल सका। इससे निराश होकर खेत में ही बैठ गए। कुछ देर बाद सदमे के कारण वहीं गिरकर दम तोड़ दिया। आसपास के खेतों में काम कर रहे किसानों ने उन्हें खेत में पड़ा देखा तो दौड़ कर आए। हिलाडुला कर देखा तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। किसानों की सूचना पर परिजन खेत पर पहुंचे।
शिशुपाल की पत्नी सुखदेवी ने बताया कि हरौली नहर से खेत की सिंचाई होती रही है लेकिन इस बार फुलगेज से पानी न चलने के कारण सिंचाई नहीं हो पा रही है। खेत की सिंचाई के लिए शिशुपाल दो दिन से काफी परेशान थे। सुबह से उन्होंने न किसी से बात की, न ही कुछ खाया। बस खेत में पानी लगाने की बात कहकर घर से चले गए। पानी न मिलने से उनकी सदमा लगने से मौत हो गई।
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शिशुपाल के घर में उनका बेटा अर्पित व नाती गोलू हैं। ग्रामीणों की सूचना पर तहसील से गांव पहुंचे लेखपाल ने जांच पड़ताल की। लेखपाल श्रीप्रकाश का कहना है पूरी पड़ताल के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजेंगे।
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जालौन/माधौगढ़ः नहर से पानी न मिल पाने के कारण खेत की सिंचाई नहीं कर पाए किसान की सदमे में जान चली गई। ग्रामीणों की सूचना पर लेखपाल ने गांव पहुंचकर तहकीकात की। लेखपाल का कहना है कि मामले की स्थिति समझने के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट देंगे।
माधौगढ़ के हरौली गांव के किसान शिशुपाल (59) गुरुवार सुबह खेत में पानी लगाने गए थे, पर नहर से पानी नहीं मिल सका। इससे निराश होकर खेत में ही बैठ गए। कुछ देर बाद सदमे के कारण वहीं गिरकर दम तोड़ दिया। आसपास के खेतों में काम कर रहे किसानों ने उन्हें खेत में पड़ा देखा तो दौड़ कर आए। हिलाडुला कर देखा तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। किसानों की सूचना पर परिजन खेत पर पहुंचे।
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शिशुपाल की पत्नी सुखदेवी ने बताया कि हरौली नहर से खेत की सिंचाई होती रही है लेकिन इस बार फुलगेज से पानी न चलने के कारण सिंचाई नहीं हो पा रही है। खेत की सिंचाई के लिए शिशुपाल दो दिन से काफी परेशान थे। सुबह से उन्होंने न किसी से बात की, न ही कुछ खाया। बस खेत में पानी लगाने की बात कहकर घर से चले गए। पानी न मिलने से उनकी सदमा लगने से मौत हो गई।
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शिशुपाल के घर में उनका बेटा अर्पित व नाती गोलू हैं। ग्रामीणों की सूचना पर तहसील से गांव पहुंचे लेखपाल ने जांच पड़ताल की। लेखपाल श्रीप्रकाश का कहना है पूरी पड़ताल के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजेंगे।