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बेटी का डॉक्टर बनने का सपना टूटता देख बुंदेलखंड में किसान ने दी जान, नहीं जुटा पाया कोचिंग की फीस
Sun, 07 Jul 2019 12:46 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 07 Jul 2019 12:46 AM IST
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बुंदेलखंड में बेटी की फीस जुटाने में नाकाम किसान ने आग लगाकर दी जान
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा में इंटर में 70 फीसदी अंक लेकर पास हुई बिटिया का डॉक्टर बनने का सपना टूटता देख तनाव में घिरे किसान ने आग लगाकर खुदकुशी कर ली। किसान ने मेडिकल के कंप्टीशन की तैयारी के लिए चार दिन पहले ही बेटी का दाखिला कानपुर के एक कोचिंग सेंटर में कराया था।
कोचिंग की फीस के लिए रकम का इंतजाम न होने पर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के केंद्र में कोतवाली देहात क्षेत्र के महोखर गांव का महेश शुक्ला (46) का परिवार। महज दो बीघा जमीन से घर-परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे महेश की बेटी संध्या ने इसी साल 70 फीसदी अंकों के साथ इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
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कोचिंग की फीस के लिए रकम का इंतजाम न होने पर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के केंद्र में कोतवाली देहात क्षेत्र के महोखर गांव का महेश शुक्ला (46) का परिवार। महज दो बीघा जमीन से घर-परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे महेश की बेटी संध्या ने इसी साल 70 फीसदी अंकों के साथ इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
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महेश के बेटे राहुल ने बताया कि संध्या का रुझान मेडिकल टेस्ट की तैयारी की तरफ होने से पिता ने कुछ पैसों का जुगाड़ करके चार दिन पहले ही उसका दाखिला कानपुर की एक कोचिंग क्लास में कराया था। कोचिंग को बाकी फीस अदा करने और भविष्य में डॉक्टरी की पढ़ाई पर होने वाले खर्च का दबाव उनके दिमाग में घर कर गया था।
दो साल पहले बड़ी बहन सपना की शादी के लिए कर्ज से जुटाए 50 हजार रुपये की अदायगी भी बाकी थी। इसको लेकर वह दो दिन से तनाव में थे। मजदूरी करके घर को आर्थिक सहयोग देने वाले राहुल व उसके भाई ने कोई न कोई रास्ता निकाल लेने का भरोसा दिया लेकिन महेश शुक्ला को इससे तसल्ली नहीं हुई।
बेटे राहुल ने बताया कि शुक्रवार की शाम जब घर के सब लोग अपने-अपने काम में लगे थे तो पिता जी ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। भीतर रखा मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। धुआं देखकर अंदाजा लगा तो दरवाजा तोड़कर घर के लोग भीतर दाखिल हुए। गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में उन्हें जिला अस्पताल लाए, जहां कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।
दो साल पहले बड़ी बहन सपना की शादी के लिए कर्ज से जुटाए 50 हजार रुपये की अदायगी भी बाकी थी। इसको लेकर वह दो दिन से तनाव में थे। मजदूरी करके घर को आर्थिक सहयोग देने वाले राहुल व उसके भाई ने कोई न कोई रास्ता निकाल लेने का भरोसा दिया लेकिन महेश शुक्ला को इससे तसल्ली नहीं हुई।
बेटे राहुल ने बताया कि शुक्रवार की शाम जब घर के सब लोग अपने-अपने काम में लगे थे तो पिता जी ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। भीतर रखा मिट्टी का तेल डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। धुआं देखकर अंदाजा लगा तो दरवाजा तोड़कर घर के लोग भीतर दाखिल हुए। गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में उन्हें जिला अस्पताल लाए, जहां कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई।