फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर असलहे बेचने का भंडाफोड़
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सीओ मनीष चंद्र सोनकर का कहना है कि अभी जांच शुरू हुई। इसमें और भी फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। आतंकियों से जुड़े दुकानदार से मिला था सुराग एटीएस ने उज्जैन-भोपाल पैसेंजर ब्लास्ट कांड में शहर से सात आतंकियों को पकड़ा था। उनसे पूछताछ में एटीएस को पता चला कि वे गीतानगर स्थित शस्त्र दुकानदार से कारतूस और हथियार लेते हैं। एटीएस ने उनकी निशानदेही पर दुकानदार को उठाकर पूछताछ की, तो इस ‘खेल’ का पता चला।
एटीएस को दुकानदार से पता चला
दुकानदार स्टॉक लेजर में किस तरह से फर्जीवाड़ा करते हैं। इस बारे में भी एटीएस को उसी दुकानदार से पता चला था। उसने पूछताछ में कुछ दुकानदारों के नाम बताए थे। जो अराजकतत्वों को हथियार और कारतूस बेचते थे। मुंगेर निवासी है मास्टर माइंड एटीएस ने दुकानदार से मिली लीड पर काम शुरू किया तो उन्हें पता चला कि बिहार के मुंगेर जिला निवासी राज किशोर राय इस ‘खेल’ का मास्टर माइंड है। उसको 2014 में एसटीएफ ने पकड़ा था, लेकिन वह कुछ दिनों में ही बेल पर छूट गया था। इसके बाद से वह साथी उपेंद्र सिंह के साथ दोबारा यह काम करने लगा था। एटीएस को पता चला है कि वह कानपुर के दुकानदारों से फर्जी लाइसेंस बनवाकर सौ से ज्यादा राइफल, बंदूक और पिस्टल ले जा चुका है। इसमें 29 असलहों को एटीएस ने ट्रेस कर लिया है, जबकि शेष असलहा का अभी पता नहीं चला है।
इस तरह बनाते हैं फर्जी लाइसेंस
नहीं चेक करवाते लाइसेंस असली है या फर्जी
इनको पकड़ा गया
विजय खन्ना, स्वामी खन्ना आर्मरी, मेस्टन रोड - अमरजीत नियोगी, स्वामी एके नियोगी एंडी कंपनी, मेस्टन रोड - जैनुल आबदीन, स्वामी पूर्वांचल गन हाउस, मेस्टन रोड - राजीव शुक्ला, स्वामी जय जवान आर्म्स डीलर, मेस्टन रोड
इससे पहले भी पकड़े जा चुके हैं दुकानदार शहर में इससे पहले भी नक्सलियों और आतंकियों को कारतूस सप्लाई करने में कई दुकानदार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन असलहा बेचने का यह पहला मामला है। वो भी फर्जी लाइसेंस है। एटीएस अफसरों का कहना है कि यह यूपी का पहला मामला है। जब फर्जी लाइसेंस पर इतनी भारी मात्रा में असलहे बेचे गए हैं।