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फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर असलहे बेचने का भंडाफोड़

Wed, 26 Jul 2017 04:18 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 26 Jul 2017 04:18 PM IST
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Fake weapons licensing and blackmarketing gang busted
अवैध शस्त्र लाइसेंंस बनाने वाले चार गिरफ्तार
कानपुर शहर में अराजकतत्वों का फर्जी लाइसेंस बनाकर उनको शस्त्र बेचने का गोरखधंधा चल रहा है। मंगलवार को एटीएस ने चार असलहा दुकानदारों को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया। चारों दुकानदारों से अब तक 29 फर्जी लाइसेंस बनाकर असलहा बेचने का पता चला है। इसमें ज्यादातर असलहे नक्सलियों को बेचने की बात सामने आई है। इसके अलावा अराजकतत्वों को कारतूस सप्लाई का भी पता चला है। एटीएस ने कुछ और दुकानदारों के शामिल होने का शक जताया है। जिनके खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं।
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सीओ मनीष चंद्र सोनकर का कहना है कि अभी जांच शुरू हुई। इसमें और भी फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। आतंकियों से जुड़े दुकानदार से मिला था सुराग एटीएस ने उज्जैन-भोपाल पैसेंजर ब्लास्ट कांड में शहर से सात आतंकियों को पकड़ा था। उनसे पूछताछ में एटीएस को पता चला कि वे गीतानगर स्थित शस्त्र दुकानदार से कारतूस और हथियार लेते हैं। एटीएस ने उनकी निशानदेही पर दुकानदार को उठाकर पूछताछ की, तो इस ‘खेल’ का पता चला।

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एटीएस को दुकानदार से पता चला

Fake weapons licensing and blackmarketing gang busted
डेमो पिक

दुकानदार स्टॉक लेजर में किस तरह से फर्जीवाड़ा करते हैं। इस बारे में भी एटीएस को उसी दुकानदार से पता चला था। उसने पूछताछ में कुछ दुकानदारों के नाम बताए थे। जो अराजकतत्वों को हथियार और कारतूस बेचते थे। मुंगेर निवासी है मास्टर माइंड एटीएस ने दुकानदार से मिली लीड पर काम शुरू किया तो उन्हें पता चला कि बिहार के मुंगेर जिला निवासी राज किशोर राय इस ‘खेल’ का मास्टर माइंड है। उसको 2014 में एसटीएफ ने पकड़ा था, लेकिन वह कुछ दिनों में ही बेल पर छूट गया था। इसके बाद से वह साथी उपेंद्र सिंह के साथ दोबारा यह काम करने लगा था। एटीएस को पता चला है कि वह कानपुर के दुकानदारों से फर्जी लाइसेंस बनवाकर सौ से ज्यादा राइफल, बंदूक और पिस्टल ले जा चुका है। इसमें 29 असलहों को एटीएस ने ट्रेस कर लिया है, जबकि शेष असलहा का अभी पता नहीं चला है।

इस तरह बनाते हैं फर्जी लाइसेंस

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डेमो पिक
कानपुर शहर के कई असलहा दुकानदार लाइसेंस बनवाकर शस्त्र बेचने का ठेका लेते हैं। वे जिलाधिकारी के फर्जी मोहर और साइन से लाइसेंस बनाते हैं। वे ज्यादातर दूसरे जिलों का फर्जी लाइसेंस बनाते हैं। इसके बाद उस पर असलहा चढ़ाकर उसे बेच देते हैं। वे इतनी सफाई से लाइसेंस बनाते थे कि असलहा खरीदने वाले को भी पता नहीं रहता है कि उसका लाइसेंस फर्जी है। इसके साथ ही वे फर्जी टीएल (ट्रैवलिंग लाइसेंस) और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) भी बनाते थे। यह दूसरे जिलों से असलहा खरीदने वालों के लिए बेहद जरूरी होता है। इन्होंने महिलाओं के नाम पर भी फर्जी लाइसेंस बनाकर असलहों को बेचा है। इसका फायदा मिलता है सूबे सहित देश में शस्त्र लाइसेंस को चेक करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। इसका फायदा उठाकर दुकानदार फर्जी लाइसेंस बना देते थे। अगर कोई असलहा धारक रिन्युवल कराने भी जाता है तो मजिस्ट्रेट सिर्फ लाइसेंस और असलहा का नंबर मिलाकर साइन कर देते हैं।
 
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नहीं चेक करवाते लाइसेंस असली है या फर्जी

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डेमो पिक
वे यह नहीं चेक करवाते हैं कि यह लाइसेंस असली है या फर्जी। अब असलहा विभाग को अपडेट कर लाइसेंस धारकों को यूनिक आईडी नंबर जारी किया गया है। इससे फर्जी लाइसेंस पर शिकंजा कस सकता है। नक्सल प्रभावित जिलों में बेचे गए हैं ज्यादातर असलहे एटीएस की जांच में पता चला कि ज्यादातर असलहे मुंगेर, बेगू सराय और अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में बेचे गए हैं। राज किशोर राय इन इन असलहों को वहां ले जाता है। वहां पर पुलिस का मूवमेंट बेहद कम है। अब इस स्थिति में इन असलहों को बरामद करना एटीएस के लिए चुनौती है।

इनको पकड़ा गया 
विजय खन्ना, स्वामी खन्ना आर्मरी, मेस्टन रोड - अमरजीत नियोगी, स्वामी एके नियोगी एंडी कंपनी, मेस्टन रोड - जैनुल आबदीन, स्वामी पूर्वांचल गन हाउस, मेस्टन रोड - राजीव शुक्ला, स्वामी जय जवान आर्म्स डीलर, मेस्टन रोड

इससे पहले भी पकड़े जा चुके हैं दुकानदार शहर में इससे पहले भी नक्सलियों और आतंकियों को कारतूस सप्लाई करने में कई दुकानदार पकड़े जा चुके हैं, लेकिन असलहा बेचने का यह पहला मामला है। वो भी फर्जी लाइसेंस है। एटीएस अफसरों का कहना है कि यह यूपी का पहला मामला है। जब फर्जी लाइसेंस पर इतनी भारी मात्रा में असलहे बेचे गए हैं।
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