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फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण: अभ्यर्थी तलाशने और लेनदेन का काम देखने वाले मास्टरमाइंड पिता-पुत्र गिरफ्तार

Mon, 10 Jun 2024 12:26 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 10 Jun 2024 12:26 AM IST
सार

फर्जी शिक्षक भर्ती मामले में अभ्यर्थी तलाशने और लेनदेन का काम देखने वाले मास्टरमाइंड पिता-पुत्र गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

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Fake teacher recruitment case: mastermind Father-son arrested
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षक भर्ती घोटाले में फरार चल रहे अंतरजनदीय गैंग के मास्टरमाइंड पिता-पुत्र को एसआईटी ने वाराणसी और महराजगंज से गिरफ्तार कर लिया है। पिता हरेंद्र पांडेय चित्रकूट इंटर कॉलेज वाराणसी में गणित का शिक्षक था। अभ्यर्थी तलाशने और उनसे सेटिंग करने का काम संभालता था। बेटा प्रकाश पांडेय महराजगंज के महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में लेक्चरर है। लेनदेन का काम प्रकाश पांडेय ही देखता था। रुपये इसी के खाते में आते थे। दोनों से पूछताछ में एक सेवानिवृत डीआईओएस और डीआईओएस कार्यालय कानपुर के दो बाबुओं के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
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डीसीपी सेंट्रल आरएस गौतम ने एसीपी कर्नलगंज कार्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि कर्नलगंज थाना पुलिस ने वाराणसी के जैतपुरा निवासी हरेंद्र पांडेय और उनके बेटे प्रकाश पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। हरेंद्र पांडेय और इसके पहले जेल भेजे गए लालजी के बीच 30 साल से संबंध थे। लालजी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में बाबू था। हरेंद्र का काम बोर्ड में पड़ता रहता था, इस वजह से दोनों संपर्क में आ गए थे। पहले जेल भेजे गए मिर्जापुर के दिनेश कुमार पांडेय और अभिनव त्रिपाठी डीआईओएस से संबंधित काम देखते थे। हरेंद्र अभ्यर्थी तलाशने और फिर उनकी नियुक्ति कराने के लिए सेटिंग करता था। साथ ही बेटे प्रकाश के बैंक खाते में रुपया जमा कराता था। इसके बाद प्रकाश पूरा लेनदेन संभालता था। नौ शिक्षकों की भर्ती में पांच हरेंद्र के संपर्क के थे, तो चार दिनेश और अभिनव के।
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एक पूर्व डीआईओएस व दो बाबूओं के नाम आए सामने
फर्जी शिक्षक घोटाले में गिरफ्तार पिता-पुत्र से पूछताछ में कानपुर में तैनात रहे एक डीआईओएस व एक सेवानिवृत बाबू समेत कई कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। हरेंद्र ने बताया कि मामले में जेल भेजा गया दिनेश रिश्ते में उसका साला है, जबकि अभिनव दिनेश का दोस्त है। दिनेश और अभिनव की कानपुर में तैनात रहे सेवानिवृत डीआईओएस और सेवानिवृत बाबू से खासी पहचान थी। यह डीआईओएस और सेवानिवृत बाबू मिर्जापुर में बीएसए और डायट में तैनात थे, तभी से उनकी जान पहचान थी। इसी के चलते पहले दिनेश और अभिनव ने लालजी के माध्यम से शिक्षक सेवा चयन बोर्ड से सेटिंग कर एडी माध्यमिक की फर्जी आईडी से मेल भिजवाई। फिर पूर्व डीआईओएस व बाबू के जरिये बिना सत्यापन के शिक्षकों का पैनल विद्यालयों को भिजवा दिया था।

 

आर्य कन्या इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल ने की थी रिक्षा की नियुक्ति के सत्यापन की मांग
आर्य कन्या इंटर कॉलेज में रिक्षा पांडेय की नियुक्ति हुई। वहां प्रिंसिपल रेखा और रिक्षा पांडेय हिंदी की शिक्षक थीं। रेखा के रहते मैनेजमेंट ने रिक्षा की नियुक्ति करा दी। इस पर रेखा को शक हुआ और उन्होंने नियुक्ति का सत्यापन कराने के लिए एडी माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेज दिया। बताते हैं पहले तो मामला अफसरों ने बराबर कर दिया, लेकिन रेखा ने फिर से बोर्ड और विभाग के अन्य अधिकारियों को पत्र भेजकर रिक्षा की नियुक्ति के सत्यापन के संबंध में पत्र लिखा। इसके बाद एडी ने जांच कराई, तो फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया। फरवरी 2024 में कमेटी गठित की गई। जांच के दौरान वर्तमान डीआईओएस अरुण कुमार की तहरीर पर अरविंद सिंह यादव, स्वाती द्विवेदी, आशीष कुमार पांडेय समेत नौ लोगों के खिलाफ कर्नलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।

 
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आरोपी बोला... लोभस्य पापस्य कारणम
पुलिस हिरासत में हरेंद्र पांडेय ने कहा कि ‘लोभस्य पापस्य कारणम’। मतलब लोभ पाप का कारण है। कहा कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में नियुक्त किए गए लाल जी सिंह मिर्जापुर स्कूल में प्रबंधक दिनेश पांडेय और केबीपीजी कॉलेज में लैब टेक्नीशियन अभिनव त्रिपाठी और मैंने लेक्चरर की फर्जी भर्ती की साजिश रची थी। पैनल बनाकर आठ महीने में अंजाम दिया गया।

नेपाल भागने की फिराक में थे पिता-पुत्र
मास्टरमाइंड पिता-पुत्र भारत छोड़कर नेपाल भागने की फिराक में थे। सूत्रों के अनुसार वाराणसी से प्रकाश महराजगंज से परिवार के साथ गोरखपुर पहुंच गया था। यहीं पर पिता हरेंद्र भी आ गया था। दोनों गोरखपुर के एक होटल में ठहरे थे। इसी बीच पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। प्रकाश की पत्नी व परिवार के लोगों ने पिता-पुत्र की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए हंगामा भी किया। पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद प्रकाश के मोबाइल पर एक फोन आया। फोन करने वाले ने पूछा, पहुंच गए गए नेपाल। इस पर टीम में शामिल एक अफसर ने कहा कि नेपाल नहीं कानपुर के लिए निकल गए हैं दोनों।
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