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फर्जी शिक्षिका अनामिका प्रकरण: 2010 में रामनाथ के संपर्क में आया था मास्टर माइंड पुष्पेंद्र
Tue, 16 Jun 2020 09:30 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 16 Jun 2020 09:30 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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हरदोई जिले में अनामिका प्रकरण का मास्टर माइंड पुष्पेंद्र वर्ष 2010 में जिले के शिक्षा विभाग के प्रधान लिपिक रामनाथ के संपर्क में आया था। उसके बाद जिले में एक शिक्षिका की नियुक्ति भी कराई गई। हालांकि साढ़े तीन साल बाद शिक्षिका को फर्जी बता उसकी सेवा समाप्त कर दी गई थी।
फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी वाले अनामिका प्रकरण का एसटीएफ द्वारा सोमवार को खुलासा किया गया था। इसमें जिले के शिक्षा विभाग में प्रधान लिपिक रहा रामनाथ जो वर्तमान में जीआईसी पाली से संबद्ध था, उसे भी गिरफ्त में लिया गया है। सूत्रों की माने तो 2010 में रामनाथ बीएसए विभाग में ही प्रधान लिपिक था।
उसी दौरान अनामिका प्रकरण का मास्टर माइंड मुख्य अभियुक्त पुष्पेंद्र रामनाथ के संपर्क में आया था। इसके बाद ही पुष्पेंद्र ने जिले के सुरसा कस्तूरबा स्कूल में एक शिक्षिका का चयन कराया। जिसकी पुष्टि बीआरसी पर योगदान आख्या रजिस्टर से हुई है।
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2011 में जिले में बा स्कूल सुरसा की इमारत नहीं बनी थी। इसे भूरज सेवा संस्थान सीतापुर रोड पर संचालित किया जा रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि रामनाथ द्वारा तैनात कराई गई शिक्षिका ने स्कूल के पास ही कमरा लिया था। उससे मिलने पुष्पेंद्र भी कभी-कभी आता था।
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फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी वाले अनामिका प्रकरण का एसटीएफ द्वारा सोमवार को खुलासा किया गया था। इसमें जिले के शिक्षा विभाग में प्रधान लिपिक रहा रामनाथ जो वर्तमान में जीआईसी पाली से संबद्ध था, उसे भी गिरफ्त में लिया गया है। सूत्रों की माने तो 2010 में रामनाथ बीएसए विभाग में ही प्रधान लिपिक था।
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उसी दौरान अनामिका प्रकरण का मास्टर माइंड मुख्य अभियुक्त पुष्पेंद्र रामनाथ के संपर्क में आया था। इसके बाद ही पुष्पेंद्र ने जिले के सुरसा कस्तूरबा स्कूल में एक शिक्षिका का चयन कराया। जिसकी पुष्टि बीआरसी पर योगदान आख्या रजिस्टर से हुई है।
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2011 में जिले में बा स्कूल सुरसा की इमारत नहीं बनी थी। इसे भूरज सेवा संस्थान सीतापुर रोड पर संचालित किया जा रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि रामनाथ द्वारा तैनात कराई गई शिक्षिका ने स्कूल के पास ही कमरा लिया था। उससे मिलने पुष्पेंद्र भी कभी-कभी आता था।
बीएसए हेमंत राव ने बताया कि जांच में पता चला है कि 2009 से 2013 तक रामनाथ यहीं था। उसके बाद उनका स्थानांतरण सीतापुर हुआ और फिर 2015 में वह जिले में आ गया। जनवरी 2019 में डीएम पुलकित खरे ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया था। अनियमितताएं मिलने पर उसे जीआईसी पाली से संबद्ध कर दिया था। तब से वह वहीं था।
पार्ट टाइम से वार्डन बनी थी शिक्षिका
डीसी बालिका अविनाश पंाडे ने बताया कि शिक्षिका से संबंधित अभिलेखों खंगाले गए तो उसके प्रपत्रों की फाइल गायब मिली। लेकिन उसका नियुक्ति पत्र मिल गया है। शिक्षिका की नियुक्ति गृह विज्ञान पार्ट टाइम शिक्षिका के पद पर सुरसा के कस्तूरबा स्कूल में 20 जून 2011 को हुई थी। 30 जून 2011 को उसको अंग्रेजी विषय से फुलटाइम शिक्षिका इसी स्कूल में बना दिया गया।
इसके बाद 5 दिसंबर 2011 को सुरसा बा स्कूल से कार्यमुक्त कर दी गई। छह दिसंबर 2011 को बेंहदर बा स्कूल में उसे वार्डन पद पर तैनात कर दिया गया। उसका विषय अंग्रेजी बताया गया। वह मई 2014 तक कार्य करती रही। एक व दो दिसंबर 2014 को वह आरएल पर रही। तीन दिसंबर को सामूहिक निरीक्षण जिले भर का कराया गया। तत्कालीन बीईओ ने उसे छुट्टी पर पाया और रजिस्टर पर उसे फर्जी बता सेवा समाप्ति की संस्तुति कर दी थी।
पार्ट टाइम से वार्डन बनी थी शिक्षिका
डीसी बालिका अविनाश पंाडे ने बताया कि शिक्षिका से संबंधित अभिलेखों खंगाले गए तो उसके प्रपत्रों की फाइल गायब मिली। लेकिन उसका नियुक्ति पत्र मिल गया है। शिक्षिका की नियुक्ति गृह विज्ञान पार्ट टाइम शिक्षिका के पद पर सुरसा के कस्तूरबा स्कूल में 20 जून 2011 को हुई थी। 30 जून 2011 को उसको अंग्रेजी विषय से फुलटाइम शिक्षिका इसी स्कूल में बना दिया गया।
इसके बाद 5 दिसंबर 2011 को सुरसा बा स्कूल से कार्यमुक्त कर दी गई। छह दिसंबर 2011 को बेंहदर बा स्कूल में उसे वार्डन पद पर तैनात कर दिया गया। उसका विषय अंग्रेजी बताया गया। वह मई 2014 तक कार्य करती रही। एक व दो दिसंबर 2014 को वह आरएल पर रही। तीन दिसंबर को सामूहिक निरीक्षण जिले भर का कराया गया। तत्कालीन बीईओ ने उसे छुट्टी पर पाया और रजिस्टर पर उसे फर्जी बता सेवा समाप्ति की संस्तुति कर दी थी।