एक्सक्लूसिव: एसजीएसटी के 200 अफसरों को घर बैठे वेतन, बगैर काम 13.5 करोड़ रुपये से ज्यादा दे चुकी सरकार
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24 जून 2020 को विभाग में कार्यरत 120 प्रशासनिक और आशुलिपिक कर्मचारियों को प्रमोशन देकर वाणिज्यकर अफसर बनाया गया था। कुछ समय बाद तीन महीने की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद भी तैनाती न देकर और तीन महीने की ट्रेनिंग कराई गई। यह ट्रेनिंग 19 अप्रैल 2021 तक चली। इसके 13 महीने बाद भी कहीं पोस्टिंग नहीं दी गई।
इसके अलावा विभाग को उत्तर प्रदेश संघ लोक सेवा आयोग 2016 और 2017 बैच के 80 असिस्टेंट कमिश्नर और वाणिज्यकर अफसर अक्तूबर 2020 में मिले थे। इनकी भी ट्रेनिंग छह महीने चली, लेकिन नौ महीने बाद भी कहीं तैनाती नहीं दी गई। एक अफसर का वेतन औसतन 60 हजार रुपये भी मान लें तो इन लोगों को 13.68 करोड़ रुपये वेतन दिया जा चुका है।
सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में कानपुर समेत पूरे प्रदेश में 175 अफसर ऐसे हैं, जिनके पास दो-दो खंड का काम है। इसके बाद भी ट्रेनिंग पाए अफसरों को तैनात नहीं किया जा रहा है। वाणिज्यकर मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय संयुक्त मंत्री देवर्षि दुबे और जोनल अध्यक्ष रोहित तिवारी का कहना है कि विभाग में जीएसटी लागू होने के बाद से काम बढ़ गया है।
शहर के पांच अफसर हो गए सेवानिवृत्त
शहर के 10 कर्मचारी वाणिज्यकर अफसर बने थे। इनमें से पांच बिना नई पोस्टिंग पाए ही सेवानिवृत्त हो गए हैं। प्रदेश भर में कुल 30 अफसर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आने वाले महीनों में भी कई अफसर सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
पदोन्नति के बाद अधिकारियों को दो तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। एक ट्रेनिंग ऑफिस के काम से संबंधित होती है और दूसरी फील्ड से संबंधित। कोरोना की वजह से दोनों ट्रेनिंग समय पर पूरी नहीं हो पाई थी। हालांकि, अब हो गई है। इधर जब पोस्टिंग की बारी आई तो कमिश्नर छुट्टी पर चली गईं। वे बीते एक महीने से छुट्टी पर हैं। इससे तैनाती नहीं हो पा रही है। कमिश्नर के आते ही अधिकारियों को नई तैनाती मिल जाएगी।
शिशिर प्रकाश, संयुक्त आयुक्त (अवस्थापना) एसजीएसटी