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दहेज हत्या में पति को फांसी की सजा
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इटावा। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट शीरीन जैदी ने साढ़े पांच साल पूर्व हुई दहेज हत्या में पति को दोषी करार दिया है। जज ने पति को फांसी की सजा सुनाई है। आरोपी सास व ससुर को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त किया गया है। महिला के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला दबाना आया था। इस पर पुलिस ने हत्या की धारा भी बढ़ाई थी।
अपर शासकीय अधिवक्ता दंड तरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि सहसों थानाक्षेत्र के गांव टिटावली निवासी मुनीम सिंह ने अपनी बेटी सुगम की शादी 20 मई 2013 को बकेवर थाना क्षेत्र के गांव नगला मोतीराम मौजा कुशगवां अहिरान निवासी यशपाल से की थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज नाम पर तीन लाख रुपये की मांग करने लगे। इसके बाद 17 मई 2016 को ससुराल के ग्रामीणों से मुनीम को सूचना मिली कि बेटी सुगम की जलकर मौत हो गई है। इस पर जब मुनीम बेटी के ससुराल पहंचे तो वहां सुगम का जला हुआ शव पड़ा था और घर पर कोई भी ससुराली नहीं था। सुगम के पिता की ओर से ही बकेवर थाने में पति यशपाल, ससुर राजेंद्र सिंह, सास मिथलेश व देवर हरपाल के खिलाफ दहेज हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
विवेचना में पुलिस ने देवर हरपाल को निकाल दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने हत्या की धारा में बढ़ाकर पति, सास व ससुर के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों व गवाहों को सुनने के बाद यशपाल को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने यशपाल को फांसी की सजा सुनाई।
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अपर शासकीय अधिवक्ता दंड तरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि सहसों थानाक्षेत्र के गांव टिटावली निवासी मुनीम सिंह ने अपनी बेटी सुगम की शादी 20 मई 2013 को बकेवर थाना क्षेत्र के गांव नगला मोतीराम मौजा कुशगवां अहिरान निवासी यशपाल से की थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज नाम पर तीन लाख रुपये की मांग करने लगे। इसके बाद 17 मई 2016 को ससुराल के ग्रामीणों से मुनीम को सूचना मिली कि बेटी सुगम की जलकर मौत हो गई है। इस पर जब मुनीम बेटी के ससुराल पहंचे तो वहां सुगम का जला हुआ शव पड़ा था और घर पर कोई भी ससुराली नहीं था। सुगम के पिता की ओर से ही बकेवर थाने में पति यशपाल, ससुर राजेंद्र सिंह, सास मिथलेश व देवर हरपाल के खिलाफ दहेज हत्या की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
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विवेचना में पुलिस ने देवर हरपाल को निकाल दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने हत्या की धारा में बढ़ाकर पति, सास व ससुर के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों व गवाहों को सुनने के बाद यशपाल को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने यशपाल को फांसी की सजा सुनाई।
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