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रिसर्च में मदद करेंगे आईआईटियंस
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 12 Jan 2015 02:52 AM IST
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आईआईटी का तीन दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन पूर्व छात्र बिठूर गए। वहां पुरानी यादें ताजा कीं। बाद में डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने पूर्व छात्रों को लंच पर बुलाया।
पूर्व छात्रों ने कहा कि रिसर्च में हर संभव मदद की जाएगी। डायरेक्टर ने पूर्व छात्रों को सम्मानित किया और कहा कि पूर्व छात्रों से आईआईटी का मान-सम्मान है। आईआईटियंस को जोड़ने का अभियान जारी रहेगा।
1980 बैच के आईआईटियंस ने रविवार को भी खूब मौज-मस्ती की। पहले लैब, लाइब्रेरी, लेक्चर हॉल कांप्लेक्स गए, फिर हॉस्टल में जाकर वर्तमान छात्रों से बातचीत की। सुविधा-संसाधन की जरूरतों के बारे में पूछा। फैकल्टी चेयर स्थापित करने की जरूरत है क्या?
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ऐसा हुआ तो क्या फायदा होगा। इस पर वर्तमान छात्रों ने कहा कि फैकल्टी चेयर स्थापित होने से रिसर्च में मदद मिलती है। स्कॉलरशिप की मदद से अच्छे प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलता है। यह व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। इस पर पूर्व छात्रों ने गुरु दक्षिणा देने का ऐलान किया।
सबने कहा कि जो जरूरत होगी, वह व्यवस्था कराई जाएगी। इसके बाद पूर्व छात्रों ने लंच किया, फिर बिठूर भ्रमण पर निकल गए। यहां सीता की रसोई, लव-कुश मंदिर, इस्कॉन मंदिर, सुधांशु महाराज का आश्रम देखा। बिठूर घाट जाकर गंगा के जल का आचमन किया।
आईआईटियंस ने कहा कि गंगा आर्थिक स्रोत का बड़ा जरिया है। इसकी सुरक्षा, संरक्षा जरूरी है। भारत सरकार की पहल शानदार है। बाद में आईआईटियंस कैंपस आए और एक दूसरे से फिर मिलने का वादा करके अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए।
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पूर्व छात्रों ने कहा कि रिसर्च में हर संभव मदद की जाएगी। डायरेक्टर ने पूर्व छात्रों को सम्मानित किया और कहा कि पूर्व छात्रों से आईआईटी का मान-सम्मान है। आईआईटियंस को जोड़ने का अभियान जारी रहेगा।
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1980 बैच के आईआईटियंस ने रविवार को भी खूब मौज-मस्ती की। पहले लैब, लाइब्रेरी, लेक्चर हॉल कांप्लेक्स गए, फिर हॉस्टल में जाकर वर्तमान छात्रों से बातचीत की। सुविधा-संसाधन की जरूरतों के बारे में पूछा। फैकल्टी चेयर स्थापित करने की जरूरत है क्या?
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ऐसा हुआ तो क्या फायदा होगा। इस पर वर्तमान छात्रों ने कहा कि फैकल्टी चेयर स्थापित होने से रिसर्च में मदद मिलती है। स्कॉलरशिप की मदद से अच्छे प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलता है। यह व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। इस पर पूर्व छात्रों ने गुरु दक्षिणा देने का ऐलान किया।
सबने कहा कि जो जरूरत होगी, वह व्यवस्था कराई जाएगी। इसके बाद पूर्व छात्रों ने लंच किया, फिर बिठूर भ्रमण पर निकल गए। यहां सीता की रसोई, लव-कुश मंदिर, इस्कॉन मंदिर, सुधांशु महाराज का आश्रम देखा। बिठूर घाट जाकर गंगा के जल का आचमन किया।
आईआईटियंस ने कहा कि गंगा आर्थिक स्रोत का बड़ा जरिया है। इसकी सुरक्षा, संरक्षा जरूरी है। भारत सरकार की पहल शानदार है। बाद में आईआईटियंस कैंपस आए और एक दूसरे से फिर मिलने का वादा करके अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए।