{"_id":"6aa857e94255bdceb9091852","slug":"eight-professors-from-iit-kanpur-achieve-a-major-milestone-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1651263-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: आईआईटी कानपुर के आठ प्रोफेसरों को मिली बड़ी उपलब्धि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: आईआईटी कानपुर के आठ प्रोफेसरों को मिली बड़ी उपलब्धि
विज्ञापन
कानपुर। आईआईटी कानपुर के आठ प्रोफेसर को शोध कार्यों और तकनीक विकसित करने के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें देश की प्रतिष्ठित विज्ञान अकादमियों की फेलोशिप के लिए चुना गया है। चार प्रोफेसर द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया (एनएएसआई) और चार इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (आईएनएसए) के फेलो बने हैं। सभी की फेलोशिप एक जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। आईआईटी निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल और अन्य फैकल्टी ने चयनित प्रोफेसरों को बधाई दी है।
-- -- -- -- -- -- -- -
दवा वितरण प्रणाली और जल शोधन तकनीक पर काम
- एनएएसआई के फेलो चुने गए मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने बायो-एमईएमएस, लैब-ऑन-चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक्स, सेंसर, ध्वनिक मेटामटेरियल्स और जल शोधन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह वर्तमान में सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक हैं और सीएसआईआर-सीरी, पिलानी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
सेमीकंडक्टर कंपनियां मॉडल कर रहीं इस्तेमाल
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. योगेश एस चौहान को उन्नत सिलिकॉन ट्रांजिस्टर और हाई-पावर आरएफ तकनीक के क्षेत्र में शोध के लिए फेलो चुना गया है। यह ट्रॉजिस्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बेहद छोटे स्विच की तरह होते हैं। मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरे इेक्ट्रॉनिक उकपरणों में इनकी बड़ी भूमिका रहती हे। जैसे जैसे चिप में ट्रॉजिस्टर की संख्या बढ़ती है, उनका सही तरीके से काम करना और डिजाइन करना चुनौतीपूर्ण होता जाता है। प्रो. चौहान ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसका इस्तेमाल दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियां सर्किट डिजाइन में कर रही हैं।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
चिकित्सा क्षेत्र में कई फ्लेक्सिबल उपकरण बनाए
- केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सिद्धार्थ पांडा को सेंसर तकनीक, विशेष रूप से केमिकल सेंसर, फ्लेक्सिबल और प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उपकरणों के विकास में योगदान के लिए सम्मान मिला है। उनके शोध का उपयोग रोग निदान, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण निगरानी में हो रहा है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
कंप्यूटर सिमुलेशन तकनीक की विकसित
- केमिस्ट्री विभाग के प्रो. निशांत नारायणन नायर को मॉलिक्यूलर डायनामिक्स, हाइब्रिड क्वांटम मैकेनिक्स-मॉलिक्यूलर मैकेनिक्स और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के तंत्र से जुड़े शोध के लिए फेलो चुना गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
एआई की मदद से जान रहे दिल का हाल
- आईएनएसए के नए फेलो में गणित विभाग के प्रो. बीवी रथीश कुमार शामिल हैं। उन्हें एप्लाइड मैथमेटिक्स, वेवलेट आधारित पीडीई विधियों, इमेज प्रोसेसिंग, हृदय प्रवाह और कैंसर मॉडलिंग में एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के इस्तेमाल से जुड़े कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने कंप्यूटर को बड़ी मात्रा में आंकड़ों और तस्वीरों से पैटर्न समझने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वैज्ञानिक शरीर में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं का मॉडल तैयार कर उनका अध्ययन अधिक बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
कैंसर की टारगेटेड मेडिसिन तकनीक पर किए शोध
- बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. रामसुब्बू शंकररामकृष्णन का चयन मेम्ब्रेन प्रोटीन्स की बायोफिजिक्स, प्लांट एक्वापोरिन्स के विकासवादी सिद्धांत, नॉन-कोवेलेंट इंटरैक्शन और कैंसर अनुसंधान में पेप्टाइड आधारित इनहिबिटर्स के विकास पर मौलिक शोध के लिए हुआ है। कैंसर की टारगेटेड मेडिसिन पर शोध किया हे।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
कृत्रिम और प्राकृतिक प्रत्यारोपण पर किया रिसर्च
- मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. कांतेश बलानी को बायोसर्फेस पर कोशिकीय प्रतिक्रिया, बायोमैटेरियल्स पर प्रोटीन डी-एडहीजन के विजुअलाइजेशन और बायोमेडिकल अनुसंधान के लिए उन्नत मल्टीफंक्शनल कंपोजिट्स के विकास में योगदान के लिए आईएनएसए फेलोशिप मिली है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विस्कोइलास्टिक फ्लूइड मैकेनिक्स के क्षेत्र में किए कार्य
- केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. विश्वनाथन शंकर को विस्कोइलास्टिक शीयर फ्लो में लीनियर अस्थिरताओं, इलास्टिक टर्बुलेंस, फ्लो ट्रांजिशन और कॉम्प्लेक्स फ्लूइड्स में ड्रैग रिडक्शन को समझने से जुड़े महत्वपूर्ण शोध के लिए फेलो चुना गया है।
विज्ञापन
दवा वितरण प्रणाली और जल शोधन तकनीक पर काम
- एनएएसआई के फेलो चुने गए मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने बायो-एमईएमएस, लैब-ऑन-चिप, नैनो टेक्नोलॉजी, माइक्रोफ्लूइडिक्स, सेंसर, ध्वनिक मेटामटेरियल्स और जल शोधन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वह वर्तमान में सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक हैं और सीएसआईआर-सीरी, पिलानी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
विज्ञापन
सेमीकंडक्टर कंपनियां मॉडल कर रहीं इस्तेमाल
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. योगेश एस चौहान को उन्नत सिलिकॉन ट्रांजिस्टर और हाई-पावर आरएफ तकनीक के क्षेत्र में शोध के लिए फेलो चुना गया है। यह ट्रॉजिस्टर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बेहद छोटे स्विच की तरह होते हैं। मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरे इेक्ट्रॉनिक उकपरणों में इनकी बड़ी भूमिका रहती हे। जैसे जैसे चिप में ट्रॉजिस्टर की संख्या बढ़ती है, उनका सही तरीके से काम करना और डिजाइन करना चुनौतीपूर्ण होता जाता है। प्रो. चौहान ने ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसका इस्तेमाल दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियां सर्किट डिजाइन में कर रही हैं।
विज्ञापन
चिकित्सा क्षेत्र में कई फ्लेक्सिबल उपकरण बनाए
- केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. सिद्धार्थ पांडा को सेंसर तकनीक, विशेष रूप से केमिकल सेंसर, फ्लेक्सिबल और प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उपकरणों के विकास में योगदान के लिए सम्मान मिला है। उनके शोध का उपयोग रोग निदान, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण निगरानी में हो रहा है।
कंप्यूटर सिमुलेशन तकनीक की विकसित
- केमिस्ट्री विभाग के प्रो. निशांत नारायणन नायर को मॉलिक्यूलर डायनामिक्स, हाइब्रिड क्वांटम मैकेनिक्स-मॉलिक्यूलर मैकेनिक्स और एंटीबायोटिक प्रतिरोध के तंत्र से जुड़े शोध के लिए फेलो चुना गया है।
एआई की मदद से जान रहे दिल का हाल
- आईएनएसए के नए फेलो में गणित विभाग के प्रो. बीवी रथीश कुमार शामिल हैं। उन्हें एप्लाइड मैथमेटिक्स, वेवलेट आधारित पीडीई विधियों, इमेज प्रोसेसिंग, हृदय प्रवाह और कैंसर मॉडलिंग में एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के इस्तेमाल से जुड़े कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने कंप्यूटर को बड़ी मात्रा में आंकड़ों और तस्वीरों से पैटर्न समझने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वैज्ञानिक शरीर में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं का मॉडल तैयार कर उनका अध्ययन अधिक बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
कैंसर की टारगेटेड मेडिसिन तकनीक पर किए शोध
- बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. रामसुब्बू शंकररामकृष्णन का चयन मेम्ब्रेन प्रोटीन्स की बायोफिजिक्स, प्लांट एक्वापोरिन्स के विकासवादी सिद्धांत, नॉन-कोवेलेंट इंटरैक्शन और कैंसर अनुसंधान में पेप्टाइड आधारित इनहिबिटर्स के विकास पर मौलिक शोध के लिए हुआ है। कैंसर की टारगेटेड मेडिसिन पर शोध किया हे।
कृत्रिम और प्राकृतिक प्रत्यारोपण पर किया रिसर्च
- मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. कांतेश बलानी को बायोसर्फेस पर कोशिकीय प्रतिक्रिया, बायोमैटेरियल्स पर प्रोटीन डी-एडहीजन के विजुअलाइजेशन और बायोमेडिकल अनुसंधान के लिए उन्नत मल्टीफंक्शनल कंपोजिट्स के विकास में योगदान के लिए आईएनएसए फेलोशिप मिली है।
विस्कोइलास्टिक फ्लूइड मैकेनिक्स के क्षेत्र में किए कार्य
- केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. विश्वनाथन शंकर को विस्कोइलास्टिक शीयर फ्लो में लीनियर अस्थिरताओं, इलास्टिक टर्बुलेंस, फ्लो ट्रांजिशन और कॉम्प्लेक्स फ्लूइड्स में ड्रैग रिडक्शन को समझने से जुड़े महत्वपूर्ण शोध के लिए फेलो चुना गया है।