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कानपुर: गायत्री प्रजापति के सीए के यहां ईडी का छापा, कई दस्तावेज भी किए जब्त
Wed, 30 Dec 2020 09:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 30 Dec 2020 09:55 PM IST
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गायत्री प्रसाद प्रजापति (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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जेल में बंद प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति और उसके करीबियों के यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने बुधवार को छापा मारा। कानपुर में गायत्री और उसके बेटे अनिल प्रजापति के सीए उमेश खंडेलवाल के यहां टीम ने घंटों जांच-पड़ताल की।
तमाम दस्तावेज भी जब्त किए। सीए पर इनका काला धन बोगस कंपनियों के माध्यम से सफेद करने का आरोप है। सीए के स्वरूप नगर स्थित कार्यालय में छापा पड़ने से खलबली मच गई। कार्यालय जिस परिसर में बना हुआ है, वहां पर कई अन्य सीए के भी कार्यालय हैं।
सुबह सात बजे ही टीम सीए के कार्यालय पहुंच गई। देरशाम तक टीमों ने दस्तावेज खंगाले। गायत्री प्रजापति के बेटे अनिल पर काला धन सफेद करने के लिए तमाम बोगस कंपनियां चलाने के आरोप हैं। जांच में सामने आया है कि गायत्री ने अपने यहां काम करने वाले नौकरों के नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदी है।
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कोलकाता, दिल्ली, मुंबई में इनकी कंपनियों का पता दिखाया गया है। वास्तव में इस तरह की कंपनियां वजूद में नहीं है। ईडी इससे पहले गायत्री प्रजापति और उसके बेटों के अलावा कई अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सीए का नाम सामने आने के बाद उसके यहां कार्रवाई की गई है।
पूर्व मंत्री खनन घोटाले में भी नामजद है। इस घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई के मुकदमे को ही आधार बनाकर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मंत्री बनने से पूर्व गायत्री की कुल घोषित आय लगभग 40-45 लाख रुपये थी, लेकिन जांच में उसकी आय करीब तीन करोड़ रुपये पाई गई। इसके अलावा 22-25 ऐसी बेनामी संपत्तियों का पता चला है, जो कृषि भूमि या फ्लैट के रूप में हैं।
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तमाम दस्तावेज भी जब्त किए। सीए पर इनका काला धन बोगस कंपनियों के माध्यम से सफेद करने का आरोप है। सीए के स्वरूप नगर स्थित कार्यालय में छापा पड़ने से खलबली मच गई। कार्यालय जिस परिसर में बना हुआ है, वहां पर कई अन्य सीए के भी कार्यालय हैं।
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सुबह सात बजे ही टीम सीए के कार्यालय पहुंच गई। देरशाम तक टीमों ने दस्तावेज खंगाले। गायत्री प्रजापति के बेटे अनिल पर काला धन सफेद करने के लिए तमाम बोगस कंपनियां चलाने के आरोप हैं। जांच में सामने आया है कि गायत्री ने अपने यहां काम करने वाले नौकरों के नाम पर बेनामी संपत्ति खरीदी है।
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कोलकाता, दिल्ली, मुंबई में इनकी कंपनियों का पता दिखाया गया है। वास्तव में इस तरह की कंपनियां वजूद में नहीं है। ईडी इससे पहले गायत्री प्रजापति और उसके बेटों के अलावा कई अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सीए का नाम सामने आने के बाद उसके यहां कार्रवाई की गई है।
पूर्व मंत्री खनन घोटाले में भी नामजद है। इस घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई के मुकदमे को ही आधार बनाकर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मंत्री बनने से पूर्व गायत्री की कुल घोषित आय लगभग 40-45 लाख रुपये थी, लेकिन जांच में उसकी आय करीब तीन करोड़ रुपये पाई गई। इसके अलावा 22-25 ऐसी बेनामी संपत्तियों का पता चला है, जो कृषि भूमि या फ्लैट के रूप में हैं।