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डिस्लेक्सिया पीड़ितों के लिए खुशखबरी, अब एप से पहचान पाएंगे अक्षर, उच्चारण का भी हो पाएगा ज्ञान
Wed, 23 Oct 2019 04:49 PM IST
शिखा पांडेय
दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर
दिव्यांश सिंह, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 23 Oct 2019 04:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
कानपुर आईआईटी के प्रोफसरों ने डिस्लेक्सिया (पढ़ने-समझने में कठिनाई) एवं डिस्ग्राफिया (लेखन विकार) से ग्रसित बच्चों के लिए एक एप तैयार किया है। एएसीडीडी (असिस्टिव एप्लीकेशन फॉर चिल्ड्रेन विद डिस्लेक्सिया एंड डिस्ग्राफिया) नामक इस एप से बच्चे आसानी से अक्षर पहचान पाएंगे। साथ ही उनको उच्चारण का भी ज्ञान हो पाएगा।
आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. बृजभूषण व उनकी टीम के सदस्य डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. शत्रुता रॉय ने यह एप विकसित किया है। इस एप में हिंदी भाषा केसभी स्वर एवं व्यंजन उपलब्ध हैं। डॉ. बृजभूषण ने बताया कि एप तीन चरणों में काम करता है।
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आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. बृजभूषण व उनकी टीम के सदस्य डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. शत्रुता रॉय ने यह एप विकसित किया है। इस एप में हिंदी भाषा केसभी स्वर एवं व्यंजन उपलब्ध हैं। डॉ. बृजभूषण ने बताया कि एप तीन चरणों में काम करता है।
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पहले चरण में एप को खोलने पर मोबाइल की स्क्रीन पर नीले एवं गुलाबी रंग के बिंदु नजर आते हैं। जिनको मिलाकर बच्चा हिंदी वर्णमाला के अक्षरों को बनाता है। अक्षर को बनाने से बच्चे को उसकी आकृति का पता चलता है। साथ ही अक्षर बनने केबाद मोबाइल से उस शब्द के उच्चारण भी होता है।
ऐसे में बच्चे को शब्द के उच्चारण एवं लेखन का अंतर स्पष्ट हो जाता है। दूसरे चरण में टेस्ट कर सकते हैं कि बच्चे ने अभी तक क्या सीखा है। तीसरे चरण में 100 से ज्यादा शब्द हैं जिनको बच्चे को पहचानकर लिखना होता है। एप को सर्टिफिकेशन एवं कॉपीराइट के लिए भारत सरकार केपास भेजा गया है।
ऐसे में बच्चे को शब्द के उच्चारण एवं लेखन का अंतर स्पष्ट हो जाता है। दूसरे चरण में टेस्ट कर सकते हैं कि बच्चे ने अभी तक क्या सीखा है। तीसरे चरण में 100 से ज्यादा शब्द हैं जिनको बच्चे को पहचानकर लिखना होता है। एप को सर्टिफिकेशन एवं कॉपीराइट के लिए भारत सरकार केपास भेजा गया है।