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प्रदूषण से बढ़े खर्राटे और चिड़चिड़ा हुआ मिजाज, अब इस परेशानी से जूझ रहे लोग
Mon, 07 Jan 2019 10:49 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 07 Jan 2019 10:49 AM IST
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डेढ़ साल से ऑक्सीजन लेकर सो रहे कानपुर में कल्याणपुर के मोहम्मद उस्मान फारूकी का कहना है कि खर्राटों से नींद पूरी नहीं होती। ऑक्सीजन लेवल घटने से चिड़चिड़ापन आ गया है, सोकर उठते हैं तो फ्रेश रहने के बजाए थकान रहती है और सिर में वाइब्रेशन होता है।
खर्राटों की दिक्कत बढ़ने से डॉक्टर ने उन्हें बाईपेप का सुझाव दिया है। फारूकी के अलावा प्रदूषण की वजह से खर्राटों की दिक्कत बढ़ने के कारण आक्सीजन लेकर सोने वाले कई मरीज स्लीप फाउंडेशन के निशुल्क कैंप में परीक्षण कराने आए। खर्राटों से शरीर में ऑक्सीजन घटने से रोगियों के कई और अंग प्रभावित हुए हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, आईएमए और स्लीप फाउंडेशन के बैनर तले निशुल्क कैंप का आयोजन स्वरूपनगर स्थित डॉ. लालचंदानी ईएनटी सेंटर में किया गया। इसका उद्घाटन विधायक नीलिमा कटियार ने किया। मौके पर आए मरीजों ने खर्राटे होने से नाक में लगातार संक्रमण, दिन में काम करते-करते सो जाना, सीने में दर्द उठना आदि दिक्कतों के संबंध में बताया।
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खर्राटों की दिक्कत बढ़ने से डॉक्टर ने उन्हें बाईपेप का सुझाव दिया है। फारूकी के अलावा प्रदूषण की वजह से खर्राटों की दिक्कत बढ़ने के कारण आक्सीजन लेकर सोने वाले कई मरीज स्लीप फाउंडेशन के निशुल्क कैंप में परीक्षण कराने आए। खर्राटों से शरीर में ऑक्सीजन घटने से रोगियों के कई और अंग प्रभावित हुए हैं।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, आईएमए और स्लीप फाउंडेशन के बैनर तले निशुल्क कैंप का आयोजन स्वरूपनगर स्थित डॉ. लालचंदानी ईएनटी सेंटर में किया गया। इसका उद्घाटन विधायक नीलिमा कटियार ने किया। मौके पर आए मरीजों ने खर्राटे होने से नाक में लगातार संक्रमण, दिन में काम करते-करते सो जाना, सीने में दर्द उठना आदि दिक्कतों के संबंध में बताया।
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रोगियों की जांच स्लीप फाउंडेशन के अध्यक्ष सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने की। इस मौके पर स्लीप टेस्ट के लिए 100 रोगियों का चयन किया गया। नींद के दौरान उनके शरीर में ऑक्सीजन लेवल और विभिन्न अंगों की स्थिति का रिकार्ड एक चिप में दर्ज हो जाएगा। इस चिप के आधार पर रोगियों की डायग्नोसिस तैयार होगी।
आंकड़ा
- कुल खर्राटा रोगी- 350
- पुरुष (23 वर्ष से 78 वर्ष आयु) 80 फीसदी
- महिला इसी आयु वर्ग की- 18 फीसदी
- बच्चे 10 साल से कम आयु वर्ग- दो फीसदी
खर्राटा रोग के मरीजों में नए लक्षण
- महिलाओं की तरह 15 फीसदी पुरुष खर्राटा रोगियों में सुबह सोकर उठने के बाद सिर दर्द के लक्षण पाए गए।
- एडीनॉयड ग्रंथि बच्चों में होती है, बड़े होने पर गायब हो जाती है, लेकिन 50 साल की उम्र के रोगियों में बार-बार संक्रमण के कारण यह ग्रंथि पाई गई।
- प्रदूषण से श्वांसनली में संक्रमण के कारण 23 साल के युवा भी रोग की गिरफ्त में हैं, वैसे यह 40 साल की उम्र तक के लोगों को होता रहा है।
आंकड़ा
- कुल खर्राटा रोगी- 350
- पुरुष (23 वर्ष से 78 वर्ष आयु) 80 फीसदी
- महिला इसी आयु वर्ग की- 18 फीसदी
- बच्चे 10 साल से कम आयु वर्ग- दो फीसदी
खर्राटा रोग के मरीजों में नए लक्षण
- महिलाओं की तरह 15 फीसदी पुरुष खर्राटा रोगियों में सुबह सोकर उठने के बाद सिर दर्द के लक्षण पाए गए।
- एडीनॉयड ग्रंथि बच्चों में होती है, बड़े होने पर गायब हो जाती है, लेकिन 50 साल की उम्र के रोगियों में बार-बार संक्रमण के कारण यह ग्रंथि पाई गई।
- प्रदूषण से श्वांसनली में संक्रमण के कारण 23 साल के युवा भी रोग की गिरफ्त में हैं, वैसे यह 40 साल की उम्र तक के लोगों को होता रहा है।