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Kanpur News: 12 साल में डॉ. शाहीन ने जीएसवीएम में एक भी फोन नहीं किया
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कानपुर। दिल्ली विस्फोट में फंसी डॉ. शाहीन सईद के आने की खबर से एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में चर्चाएं गर्म रहीं। परिसर में रहने वाले चिकित्सा शिक्षकों का कहना था कि वर्ष 2013 के बाद डॉ. शाहीन ने किसी को एक फोन तक नहीं किया। विभाग के डॉक्टरों से भी बात नहीं की। वह कहां है और क्या कर रही है... यह भी किसी को नहीं बताया।
मंगलवार को खुफिया एजेंसियों के डॉ. शाहीन को कॉलेज परिसर लाने की चर्चा रही। फार्माकोलॉजी विभाग और परिसर में फिर से डॉ. शाहीन के संबंध में बातों का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों का कहना था कि शुरू से ही डॉ. शाहीन के घर आने-जाने वालों की संख्या कम रही है। एक-दो लोग ही उसके घर जाते रहे। इसके अलावा पारिवारिक मामलों को उसने किसी से कभी शेयर नहीं किया। विभाग के चिकित्सा शिक्षकों से सीमित बातें करती रही।
कॉलेज परिसर में रह रहे लोगों ने बताया कि जब वर्ष 2013 में डॉ. शाहीन गायब हुईं तो किसी को कुछ पता ही नहीं चला। फोन मिलाने पर फोन अटैंड नहीं हुआ फिर फोन स्विच ऑफ हो गया। विभाग में अनुपस्थित रहने के बाद कॉलेज प्रबंधन को सूचना दी गई। इस पर जो पता लिखाया गया था उस पर कई नोटिस भेजी जाती रहीं। नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया गया। बाद में बर्खास्तगी हो गई।
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मंगलवार को खुफिया एजेंसियों के डॉ. शाहीन को कॉलेज परिसर लाने की चर्चा रही। फार्माकोलॉजी विभाग और परिसर में फिर से डॉ. शाहीन के संबंध में बातों का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों का कहना था कि शुरू से ही डॉ. शाहीन के घर आने-जाने वालों की संख्या कम रही है। एक-दो लोग ही उसके घर जाते रहे। इसके अलावा पारिवारिक मामलों को उसने किसी से कभी शेयर नहीं किया। विभाग के चिकित्सा शिक्षकों से सीमित बातें करती रही।
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कॉलेज परिसर में रह रहे लोगों ने बताया कि जब वर्ष 2013 में डॉ. शाहीन गायब हुईं तो किसी को कुछ पता ही नहीं चला। फोन मिलाने पर फोन अटैंड नहीं हुआ फिर फोन स्विच ऑफ हो गया। विभाग में अनुपस्थित रहने के बाद कॉलेज प्रबंधन को सूचना दी गई। इस पर जो पता लिखाया गया था उस पर कई नोटिस भेजी जाती रहीं। नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया गया। बाद में बर्खास्तगी हो गई।
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