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डॉ. रिजवान प्रकरण: कॉल डिटेल से खुल सकता राज, लेकिन जांच में खानापूरी, पुलिसकर्मियों पर वसूली के लगे हैं आरोप

Mon, 09 Jan 2023 10:43 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 09 Jan 2023 10:43 AM IST
सार

पुलिस ने 11 दिसंबर को बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवार वालों को जेल भेजा था। इस बीच कथित वसूली का खेल सामने आया था। बताया जा रहा था कि रिजवान बांग्लादेशी है, इसके बारे में एक इंस्पेक्टर व एक एडिशनल डीसीपी को पहले से जानकारी थी। एक बिचौलिए के जरिये सभी ने बड़ी वसूली की।

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Dr. Rizwan Case: Secrets can be revealed from call details, policemen are accused of extortion
डॉ. रिजवान मोहम्मद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान से कथित वसूली के मामले में मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल से राज खुल सकता है। जांच टीम कुछ मोबाइल नंबरों की डिटेल खंगाल रही है। हालांकि बिचौलिए पर पुलिस की नरमी है। उससे अब तक विस्तार से पूछताछ तक नहीं की गई। उधर, पुलिस अफसर बेफिक्र हैं।

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एक तरह से जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है। देखना होगा कि जांच पूरी होने के बाद क्या तथ्य आते हैं और क्या कार्रवाई होगी। पुलिस ने 11 दिसंबर को बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान व उसके परिवार वालों को जेल भेजा था। इस बीच कथित वसूली का खेल सामने आया था। बताया जा रहा था कि रिजवान बांग्लादेशी है, इसके बारे में एक इंस्पेक्टर व एक एडिशनल डीसीपी को पहले से जानकारी थी। एक बिचौलिए के जरिये सभी ने बड़ी वसूली की। पुलिस कमिश्नर ने प्रकरण की जांच डीसीपी क्राइम को दी है।

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बिचौलिए के मोबाइल नंबर की सीडीआर खंगाली जा रही है। जिससे ये कनेक्शन मिल सके कि वह संबंधित पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहा। हालांकि जांच में तेजी नहीं है। जांच सिर्फ निपटाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पहले ही सभी को मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी गई है। कागजों की कार्रवाई पूरी करना बाकी है।

सीडीआर से कनेक्शन निकालना आसान नहीं
आमतौर पर पुलिस अधिकारी अब व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत करते हैं। इस तरह के बिचौलिए से अफसर सूझबूझ से संपर्क रखते हैं। किसी न किसी के जरिये ही बातचीत करते हैं। जो भी बातचीत होती है वह व्हाट्सएप कॉल पर होती है। वहीं, एक बात और इस मामले में अहम है।

जिस बिचौलिए का नाम सामने आ रहा है, अफसरों का कहना है कि उसी ने रिजवान को पकड़वाया भी है। ऐसे में उससे बातचीत होना लाजमी भी है। ऐसे में कॉल से कनेक्शन अगर मिलता भी है तो भी बचाव करने में आसानी होगी।

पहले इनकार किया फिर गोपनीय तरीके से जांच दी 
जब ये पूरा मामला उजागर हुआ था तब उच्चाधिकारियों ने जांच कराने की बात खारिज कर दी थी। दावा करते रहे कि आरोप निराधार हैं। मगर गोपनीय तरीके से जांच के आदेश दिए गए। ये भी समझ से परे है। सवाल है कि जब मामला गंभीर है तो उसकी जांच गंभीरता से क्यों नहीं कराई जा रही है।

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