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Kanpur News: नाड़ी बताती बीमारी पर देखने से डॉक्टरों का परहेज

Mon, 03 Nov 2025 02:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Nov 2025 02:02 AM IST
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Doctors refrain from looking at the disease that indicates the pulse
एसोसिएशन फिजीशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के यूपी चैप्टर चेयरमैन डॉ. संजय टंडन व अन्य। - फोटो : संवाद
कानपुर। अधूरी डायग्नोसिस पर रोगियों का इलाज हो रहा। डॉक्टर रोगियों से ढंग से बात नहीं करते, नाड़ी यानी नब्ज तक नहीं देखते। सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखकर ही दवा लिख देते हैं। इससे अधूरी डायग्नोसिस बन पाती है। यह बात एसोसिएशन फिजीशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के यूपी चैप्टर चेयरमैन डॉ. संजय टंडन ने की। रोगियों की क्लीनिकल साइड पर अधिक ध्यान देने पर एपीआई ने बेंच टू बेड साइड मुहिम शुरू की है। डॉक्टर रोगी के पास जाएं, उससे बात करें, नब्ज देखें, फिर इलाज करें।
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एपीआई पदाधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों ने नब्ज देखना ही बंद कर दिया है। जांच रिपोर्ट के भरोसे न रहें। डॉक्टरों को अपना दिमाग, आंख, नाक, कान भी इस्तेमाल करना चाहिए। रोगियों का इलाज कागज देखकर नहीं होता। रोगी के दर्द बताने पर तुरंत सीटी स्कैन न कराने लगें, पहले उसकी हिस्ट्री लें और लक्षण देखें। रोगी की हिस्ट्री डायग्नोसिस का आधार होता है। अभी डायग्नोस्टिक पर प्रैक्टिस चल रही है। वर्ष 1970 के पहले सीटी स्कैन नहीं था तब भी रोगियों का इलाज होता था।
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डॉ. टंडन ने बताया कि 50 फीसदी डायग्नोसिस रोगी से बात करके बनती है। 25 फीसदी डायग्नोसिस रोगी की नब्ज, शरीर आदि की जांच करके बनती है। 25 फीसदी के लिए जांचें कराई जाती हैं। क्लीनिकल लक्षण देखेे बिना सिर्फ सीटी, एमआरआई आदि जांचों से काम नहीं चलेगा। फिजीशियन से कहा जा रहा है कि वे फिर पुराने तरीके क्लीनिकल साइड पर आएं और रोगियों का इलाज करें।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य और एपीआई की यूपी चेयर पर्सन (इलेक्ट) डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि डॉक्टर को कम से कम एक मिनट रोगी की नब्ज देखनी चाहिए। नब्ज से शरीर के अंदरूनी अंगों की सेहत पता चलती है। हृदय रोग, मेनिनजाइटिस, टाइफाइड आदि बारे में संकेत मिल जाते हैं। रोगी की जांच का यह भी अभिन्न अंग है। यूपीएपीआई के संयुक्त सचिव डॉ. एसके गौतम ने कहा कि बेंच टू बेड साइड मुहिम के जरिये डॉक्टरों का क्लीनिकल साइड की तरफ तवज्जो बढ़ाना है।

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पैथोलॉजी लैब भी दे रहीं गलत रिपोर्ट
एपीआई पदाधिकारियों का कहना है कि गली-गली में पैथोलॉजी लैब खुल गईं। ये बहुत गलत रिपोर्ट भी दे देती हैं। एक दिन की बुखार की हिस्ट्री में टाइफाइड पॉजिटिव की रिपोर्ट दे देती हैं। गूगल, सोशल मीडिया और एआई के नुस्खों पर इलाज न करें। इनमें गलत जानकारी भी होती है। केजीएमयू के डॉ. एससी चौधरी और डॉ. अतुल मेहरोत्रा ने कहा कि बीमारियों की रोकथाम पर अधिक ध्यान दें। जीभ पर नियंत्रण रखें और पैरों का इस्तेमाल करें।
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