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ये डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट हैं हड़ताल पर, आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी
Mon, 17 Jun 2019 12:57 PM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 17 Jun 2019 12:57 PM IST
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कोलकाता के नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज के डॉ. परिमह मुखोपाध्याय के साथ मारपीट की घटना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार को कानपुर में सभी निजी चिकित्सक सुबह छह बजे से 24 घंटे की हड़ताल पर रहेंगे। निजी डॉक्टर इस दौरान ओपीडी में मरीजों को नहीं देखेंगे।
मेडिकल कॉलेज और सबंद्ध अस्पतालों के सीनियर, जूनियर रेजीडेंट भी ओपीडी नहीं करेंगे लेकिन इमरजेंसी और सर्जरी करेंगे। हड़ताल के दौरान आकस्मिक सेवाएं चलेंगी। हर अस्पताल में दुर्घटना के घायलों का इलाज भी होगा। हड़ताल के कारण ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। आईएमए ने सोमवार सुबह 10 बजे से आपात बैठक बुलाई है। इसमें अगली रणनीति तय होगी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कानपुर नगर शाखा की अध्यक्ष डॉ. अर्चना भदौरिया और सचिव डॉ. बृजेंद्र शुक्ला ने नेशनल आईएमए के हड़ताल के आह्वान पर सभी चिकित्सा संगठनों का सहयोग मांगा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि चिकित्सा संस्थानों में हिंसा रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बने। इसमें दोषी पर भारी जुर्माना लगाए जाने के साथ सात वर्ष की सजा का प्रावधान किया जाए।
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मेडिकल कॉलेज और सबंद्ध अस्पतालों के सीनियर, जूनियर रेजीडेंट भी ओपीडी नहीं करेंगे लेकिन इमरजेंसी और सर्जरी करेंगे। हड़ताल के दौरान आकस्मिक सेवाएं चलेंगी। हर अस्पताल में दुर्घटना के घायलों का इलाज भी होगा। हड़ताल के कारण ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाएगी। आईएमए ने सोमवार सुबह 10 बजे से आपात बैठक बुलाई है। इसमें अगली रणनीति तय होगी।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कानपुर नगर शाखा की अध्यक्ष डॉ. अर्चना भदौरिया और सचिव डॉ. बृजेंद्र शुक्ला ने नेशनल आईएमए के हड़ताल के आह्वान पर सभी चिकित्सा संगठनों का सहयोग मांगा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि चिकित्सा संस्थानों में हिंसा रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कानून बने। इसमें दोषी पर भारी जुर्माना लगाए जाने के साथ सात वर्ष की सजा का प्रावधान किया जाए।
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सीनियर और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर भी सोमवार को हड़ताल पर रहेंगे
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ, फॉग्सी, कॉग्सी, भारतीय बालरोग अकादमी ने आईएमए के आह्वान का समर्थन किया है। मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों और दूसरे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। निजी डॉक्टरों की हड़ताल 18 जून को सुबह छह बजे तक रहेगी।
मेडिकल कॉलेज कानपुर के सीनियर और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर भी सोमवार को हड़ताल पर रहेंगे। वे ओपीडी नहीं करेंगे, सिर्फ इमरजेंसी और सर्जरी करेंगे। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने हैलट और दूसरे संबंद्ध अस्पतालों के अधिकारियों को मैसेज भेजकर इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट, बाल रोग चिकित्सालय, जच्चा-बच्चा, कार्डियोलॉजी, जेके कैंसर, संक्रामक रोग अस्पताल हैं। प्राचार्य ने बताया कि रेजीडेंट ओपीडी नहीं करेंगे लेकिन इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं होगी। ओपीडी में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सभी गंभीर रोगियों को देखेंगे। ओपीडी में जो भी रोगी आएगा उसे लौटाया नहीं जाएगा। जिन रोगियों की सर्जरी होनी है, उनके ऑपरेशन किए जाएंगे। घायलों को देखा जाएगा।
कुछ रोगी पहले से फोन पर समय लेकर आते हैं, उन्हें सोमवार को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए समय दिए जाने से मना कर दिया गया है। वहीं, उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुन्नालाल और एसीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज देखे जाएंगे। डॉक्टर काली पट्टी बांधकर सिर्फ विरोध दर्ज कराएंगे।
मेडिकल कॉलेज कानपुर के सीनियर और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर भी सोमवार को हड़ताल पर रहेंगे। वे ओपीडी नहीं करेंगे, सिर्फ इमरजेंसी और सर्जरी करेंगे। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने हैलट और दूसरे संबंद्ध अस्पतालों के अधिकारियों को मैसेज भेजकर इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट, बाल रोग चिकित्सालय, जच्चा-बच्चा, कार्डियोलॉजी, जेके कैंसर, संक्रामक रोग अस्पताल हैं। प्राचार्य ने बताया कि रेजीडेंट ओपीडी नहीं करेंगे लेकिन इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं होगी। ओपीडी में सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर सभी गंभीर रोगियों को देखेंगे। ओपीडी में जो भी रोगी आएगा उसे लौटाया नहीं जाएगा। जिन रोगियों की सर्जरी होनी है, उनके ऑपरेशन किए जाएंगे। घायलों को देखा जाएगा।
कुछ रोगी पहले से फोन पर समय लेकर आते हैं, उन्हें सोमवार को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए समय दिए जाने से मना कर दिया गया है। वहीं, उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुन्नालाल और एसीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज देखे जाएंगे। डॉक्टर काली पट्टी बांधकर सिर्फ विरोध दर्ज कराएंगे।