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पीएचसी पर रात में नहीं रुकते डॉक्टर, उपचार को भटकते मरीज

Sun, 06 Jun 2021 01:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 01:12 AM IST
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Doctors do not stop at night at PHC, patients wandering for treatment
सरवनखेड़ा। ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई पीएचसी स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं। डॉक्टर व कर्मियों के चिकित्सालय में बने आवास में नहीं ठहरने से भवन खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। रात में लोगों को उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। अस्पतालों में बिजली पानी की व्यवस्थाएं भी दुरुस्त नहीं हैं। इससे लोगों का रुख अब इन सरकारी अस्पतालों की ओर कम ही हो रहा है।
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पीएचसी गुजराई में सफाई व्यवस्था बदहाल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुजराई में 11:30 बजे सन्नाटा पसरा था। अस्पताल में केवल एक डॉक्टर ऐश्वर्या पांडेय व फार्मासिस्ट सरोज सचान तैनात हैं। इसमें डॉ. ऐश्वर्या पांडेय की अक्सर जिला अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी लग जाती है। इससे केवल फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल रहता है।
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अस्पताल के कमरों में गंदगी फैली मिली। स्टाफ के रुकने के लिए बने आवासों के दरवाजे टूटे मिले। ग्रामीणों ने बताया कि आवासों में कोई रुकता नहीं है। ऑपरेशन थियेटर, चेंज रूम में ताला लटका नजर आया। नियमित रुप से बेहतर उपचार न मिलने से ग्रामीण अब स्वास्थ्य परेशानी पर जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पतालों में जाते हैं।
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कुरर्वा खुर्द पीएचसी में नहीं विद्युतीकरण
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुर्वाखुर्द में सुबह 8 बजे से शुरू हुई ओपीडी में दोपहर 11 बजे तक एक भी मरीज नहीं आया। केंद्र में डॉ. देवेंद्र सिंह व फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सचान मौजूद मिले। अस्पताल में बिजली की व्यवस्था नहीं है। डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि स्टॉफ की कमी है। बिजली न होने से गर्मी के इस मौसम में स्टाफ व मरीज परेशान रहते हैं। इस केंद्र में भी देखरेख के अभाव में आवास बदहाल हैं।
औषधि वितरण कक्ष में ताला लटका मिला। अस्पताल में सीजन पर दवाएं कम मिलने की बात कर्मियों ने बताई। ग्रामीणों ने बताया कि इलाज के नाम पर खानापूरी हो रही है। कभी डॉक्टर नहीं तो कभी दवाएं नहीं मिलतीं है। इससे मरीजों ने अस्पताल जाना ही बंद कर दिया है।
लैब असिस्टेंट नहीं, जांच कराने में समस्या
सरवनखेड़ा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सरवनखेड़ा में शनिवार को डॉ. परवेश आलम ओपीडी में मरीजों को देखते मिले। दोपहर एक बजे तक कुल 32 मरीजों का इलाज किया गया। ब्लॉक स्तरीय अस्पताल में एक साल से लैब असिस्टेंट की नियुक्ति नहीं है।
परिसर में तीन हैंडपंप लगे हैं इसमें एक साल से दो खराब हैं। उन्हें ठीक नहीं कराया जा रहा है। इससे गांवों से आने वाले मरीजों व तीमारदारों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। अस्पताल में दो डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक नर्स, दो स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्वॉय, एक स्वीपर, एक आया की तैनाती है।

रनियां, गुजराई व कुरवाखुर्द पीएचसी में स्टॉफ की कमी है। इससे समस्या आती है। इस बाबत उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। मौजूद संसाधन व व्यवस्था से सभी पीएचसी का बेहतर ढंग से संचालन करने की कोशिश जारी है। - डॉ विशाल दिवाकर, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सरवनखेड़ा
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