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हफ्ते में तीन दिन ही अस्पताल आते चिकित्सक

Mon, 07 Jun 2021 12:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 12:54 AM IST
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Doctors come to the hospital only three days a week
कानपुर देहात/शिवली। मैथा ब्लॉक में दो लाख की आबादी पर ब्लॉक पीएचसी व औनहां, शिवली, रंजीतपुर, मैथा स्टेशन सहित चार न्यू पीएचसी हैं। इन पांच पीएचसी में कुल सात डॉक्टरों की तैनाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां तैनात कुछ चिकित्सकों का हाल तो यह हैं कि उनका मोह सरकारी से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल की तरफ है।
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विभाग सही से जांच करा ले तो कई डॉक्टर अपनी ही पीएचसी तक नहीं पहुंच सकेंगे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिले का कानपुर शहर के नजदीक होने से यहां तैनात डॉक्टर हफ्ते में दो से तीन दिन ही आते हैं। बाकी दिनों में तैनात फर्मासिस्ट या अन्य कर्मचारी मरीजों को देखते हैं।
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जिला प्रशासन भले ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हो, लेकिन हालात यह है कि आज भी गांव के लोगों उपचार के लिए शहर के प्राइवेट अस्पताल जाते हैं। यहां तक की सामान्य इलाज भी गांवों में स्थित पीएचसी में नहीं मिल पा रहा है। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो चुके हैं।
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परिसर में झाड़ियां खड़ी हैं, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रात में इमरजेंसी के दौरान लोगों को शिवली सीएचसी के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। इससे मरीजों के साथ तीमारदारों को भी परेशान होना पड़ता है। चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सक कई दिनों तक अस्पताल नहीं आते हैं। इससे यहां पर लोग फार्मासिस्ट से उपचार कराने को मजबूर हैं।
औनहां पीएचसी बदहाल, डॉक्टरों के आवास जर्जर
शिवली। न्यू पीएचसी औनहां देखरेख के अभाव में बदहाल होती जा रही है। यहां साफ सफाई आदि पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालात यह हैं कि औनहा के न्यू पीएचसी के परिसर में बबूल के पेड़ लगे हुए है। यहां बने डॉक्टर के आवास बदहाल हो चुके हैं। इनमें कोई नहीं रुकता है।
इससे रात में मरीजों को उपचार के लिए शिवली सीएचसी या फिर जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं पानी की टंकी खराब पड़ी है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व तैनात डॉक्टर व कर्मचारियों को पानी के लिए भटकना पड़ता है।
फार्मासिस्ट न होने से दवा का वितरण प्रभावित
शिवली। मैथा स्टेशन रोड पर स्थित न्यू पीएचसी पर एक डॉ. राजीव शेखर तथा वार्ड ब्वॉय रामकिशन की तैनाती है। यहां पर तैनात फार्मासिस्ट आशुतोष यादव को असिस्टेंट डायरेक्टर स्वास्थ्य कानपुर के यहां डेढ़ साल पहले संबद्ध कर दिया गया था। तब से किसी भी फर्मासिस्ट की तैनाती नहीं की गई है। इससे मरीजों को दवा का वितरण नहीं हो पाता है। अस्पताल में तैनात डॉक्टर ही मरीजों का उपचार व दवा का वितरण करते हैं। चिकित्सक के न होने पर मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है।
शिवली पीएचसी में दिन में ही मिलता उपचार
शिवली। कस्बे में करीब आठ हजार की आबादी के लिए चार दशक पहले न्यू पीएचसी खोली गई थी। वहीं कस्बे से दो किलोमीटर दूर सीएचसी है। केवल दिन में यहां डॉक्टर इलाज के लिए मौजूद रहते है। तय समय के बाद कस्बे के मरीज निजी डॉक्टरों के सहारे रहते हैं। शिवली के वतन अग्निहोत्री, साहुल दीक्षित, विजय कुमार मौजी ने बताया कि पीएचसी में भी 24 घंटे सेवा शुरू होनी चाहिए। इससे कस्बा सहित क्षेत्र के लोगों को सहूलियत मिल सकेगी।
मैथा के किसी भी पीएचसी में आकस्मिक स्वास्थ्य सेवा चलने के बजाय शिवली सीएचसी में चलती है। मैथा में एंबुलेंस सेवा मौजूद है। अन्य पीएचसी में ओपीडी चालू करने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों के न आने की जानकारी नहीं है, जांच की जाएगी।

- डॉ. सिद्धार्थ पाठक, प्रभारी मैथा पीएचसी।
मांडा स्वास्थ्य उपकेंद्र पर नहीं हो रहा टीकाकरण
मांडा स्वास्थ्य उपकेंद्र भी काफी बदहाल है। भवन जर्जर होने से यहां पर टीकाकरण भी नहीं हो पाता है। यहां तैनात एएनएम मैथा ब्लॉक पीएचसी में महिलाओं का उपचार करतीं हैं। इस कारण क्षेत्र की महिलाओं व बच्चों को टीकाकरण के लिए पीएचसी तक चक्कर लगाना पड़ता है।
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