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पानी के महत्व समझें, व्यर्थ में बर्बाद न करें
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर देहात
Updated Thu, 23 Apr 2015 01:52 AM IST
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कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुधवार को मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान व हमारा जल, हमारा जीवन पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
पेयजल समस्या व उसका निराकरण, भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन से जल बचाना आदि पर चर्चा की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने पानी के महत्व पर प्रकाश डाला।
माती कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुधवार को जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह ने मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान व हमारा जल, हमारा जीवन पर एक दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया।
उन्होंने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। सेमिनार के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक जल स्रोत एवं वर्षा जल के प्रभावी संचयन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान योजना शुरू की गई है।
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योजना क्रियान्वयन के लिए सरकार ने जिले में जल बचाओ समिति का गठन किया है। जिसमें सिंचाई, कृषि, जल निगम, ग्राम्य विकास, लघु सिंचाई, भू-गर्भ जल, वन उद्यान आदि विभागों के अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
कहा कि दिन-प्रतिदिन गिरते हुए भू-जल स्तर से प्रत्येक वर्ष गर्मियों में पेयजल संबंधी समस्याएं खड़ी होती हैं। भूजल संरक्षण एवं वर्षा जल का संचयन किया जा सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जल संचयन के संबंध में लोगों को अधिक से अधिक जागरूक होने की जरूरत है। जिससे लोग पानी के महत्व को समझकर उसे व्यर्थ में बर्बाद न करें।
सेमिनार में जिला विकास अधिकारी राजितराम मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों मे पेयजल जागरूकता की ज्यादा जरूरत है। कार्ययोजना बनाकर पेयजल समस्या का समाधान किया जा सकता है।
उपकृषि निदेशक आरके तिवारी ने कहा कि पेयजल को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। गर्मी की शुरुआत होते ही पशु, पक्षियों सहित सभी को पानी की अधिक जरूरत होती है। ऐसे में पहले से ही संचित कर रखा गया पानी पेयजल संबंधी समस्याओं को दूर करने सहायक हो सकता है।
सेमिनार के दौरान सलाहकार पेयजल एवं स्वच्छता व विषय विशेषज्ञ हाइड्रोलॉजिस्ट एनके चौधरी ने कहा कि जिले में अभी तक किसी विकासखंड में पेयजल का संकट नहीं है।
जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण व बचाव के तरीकों पर कारगर कदम उठाए जाने की जरूरत है। कहा कि आधुनिक कृषि में ड्रिप एवं स्प्रिकलर से सिंचाई को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन शिवशंकर गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण विभाग की शोभा चतुर्वेदी, जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन, जल गुणवत्ता सलाहकार शांतिस्वरूप, एचआरडी मुश्ताक रसूल, एमआईएफ मो. शफी आदि ने अपने विचार रखे।
इस दौरान भूमि सुधार निगम के मुकेश कुमार, अधिशाषी अभियंता जल निगम, उपजिलाधिकारी राजीव पांडेय, सुश्री शेरी, विनीता सिंह, मोहन सिंह, अधिशाषी अभियंता जल निगम परियोजना निदेशक विवेक त्रिपाठी, ईओ सुशील कुमार दोहरे सहित बीडीओ प्रधान आदि लोग मौजूद रहे।
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पेयजल समस्या व उसका निराकरण, भूजल संरक्षण, वर्षा जल संचयन से जल बचाना आदि पर चर्चा की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने पानी के महत्व पर प्रकाश डाला।
माती कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुधवार को जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह ने मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान व हमारा जल, हमारा जीवन पर एक दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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उन्होंने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। सेमिनार के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से प्राकृतिक जल स्रोत एवं वर्षा जल के प्रभावी संचयन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान योजना शुरू की गई है।
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योजना क्रियान्वयन के लिए सरकार ने जिले में जल बचाओ समिति का गठन किया है। जिसमें सिंचाई, कृषि, जल निगम, ग्राम्य विकास, लघु सिंचाई, भू-गर्भ जल, वन उद्यान आदि विभागों के अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
कहा कि दिन-प्रतिदिन गिरते हुए भू-जल स्तर से प्रत्येक वर्ष गर्मियों में पेयजल संबंधी समस्याएं खड़ी होती हैं। भूजल संरक्षण एवं वर्षा जल का संचयन किया जा सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जल संचयन के संबंध में लोगों को अधिक से अधिक जागरूक होने की जरूरत है। जिससे लोग पानी के महत्व को समझकर उसे व्यर्थ में बर्बाद न करें।
सेमिनार में जिला विकास अधिकारी राजितराम मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों मे पेयजल जागरूकता की ज्यादा जरूरत है। कार्ययोजना बनाकर पेयजल समस्या का समाधान किया जा सकता है।
उपकृषि निदेशक आरके तिवारी ने कहा कि पेयजल को लेकर लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। गर्मी की शुरुआत होते ही पशु, पक्षियों सहित सभी को पानी की अधिक जरूरत होती है। ऐसे में पहले से ही संचित कर रखा गया पानी पेयजल संबंधी समस्याओं को दूर करने सहायक हो सकता है।
सेमिनार के दौरान सलाहकार पेयजल एवं स्वच्छता व विषय विशेषज्ञ हाइड्रोलॉजिस्ट एनके चौधरी ने कहा कि जिले में अभी तक किसी विकासखंड में पेयजल का संकट नहीं है।
जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण व बचाव के तरीकों पर कारगर कदम उठाए जाने की जरूरत है। कहा कि आधुनिक कृषि में ड्रिप एवं स्प्रिकलर से सिंचाई को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन शिवशंकर गुप्ता, प्रदूषण नियंत्रण विभाग की शोभा चतुर्वेदी, जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन, जल गुणवत्ता सलाहकार शांतिस्वरूप, एचआरडी मुश्ताक रसूल, एमआईएफ मो. शफी आदि ने अपने विचार रखे।
इस दौरान भूमि सुधार निगम के मुकेश कुमार, अधिशाषी अभियंता जल निगम, उपजिलाधिकारी राजीव पांडेय, सुश्री शेरी, विनीता सिंह, मोहन सिंह, अधिशाषी अभियंता जल निगम परियोजना निदेशक विवेक त्रिपाठी, ईओ सुशील कुमार दोहरे सहित बीडीओ प्रधान आदि लोग मौजूद रहे।