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बाढ़ प्रभावित गांवों का डीएम, एसपी ने किया निरीक्षण
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महदेवा गांव में तिरपाल के नीचे गुजर बसर करता परिवार। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
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राजपुर (कानपुर देहात)। डीएम जेपी सिंह, एसपी केशव कुमार के साथ मंगलवार को राजपुर ब्लॉक से निकली यमुना नदी के किनारे बसे जैसलपुर व महदेवा गांव पहुंचे। जैसलपुर गांव के प्राइमरी स्कूल में रह रहे बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनी। उसके बाद नाव के जरिए महदेवा गांव में बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों के परिवार से मिले। साथ ही उनकी व्यवस्थाएं भी देखी।
वहीं, महदेवा में ऊंचे स्थान पर तिरपाल से झोपड़ी बनाकर रह रहे पांच बाढ़ पीड़ितों से तहसील स्तरीय से मिलने वाली राहत सामग्री की जानकारी ली। प्रधान रामकेश कठेरिया ने डीएम को बताया कि यमुना नदी में बाढ़ से गांव के 50 परिवार प्रभावित हुए हैं। लोगों के कच्चे घर ढह गए। घरों में अभी भी पानी भरा है। ऐसे में पीड़ित परिवारों को तहसील प्रशासन ने प्राइमरी स्कूल व पंचायत भवन में ठहराया है। 15 से अधिक पीड़ित परिवार को तहसील प्रशासन की ओर से मिलने वाला भोजन नाकाफी साबित हो रहा है। गांव का रास्ता जलमग्र हैं। प्राइवेट नाव के जरिये लोगों का आना जाना हो रहा है। डीएम ने एसडीएम रमेश चंद्र को चार नावों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
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चार किलोमीटर पक्के रास्ते की मांग
जैसलपुर गांव के प्रधान रामकेश कठेरिया, महेंद्र सिंह, शिवशंकर, नरेंद्र सिंह ने डीएम को बताया कि हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने से महदेवा गांव में पानी भर जाता है। जैसलपुर गांव तक पक्की सड़क बनी है। जो बाढ़ में डूब जाती है। ग्रामीणों ने महदेवा को खटकर को जोड़ने वाली चार किलोमीटर पक्की सड़क बनवाने की मांग की।
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स्थायी गौशाला की मांग
जैसलपुर गांव के नरेंद्र सिंह ने डीएम को बताया कि बीहड़ पट्टी में बसे गांव में सबसे बड़ी समस्या छुट्टा मवेशियों की है। छुट्टा मवेशी किसानों की फसलों को चौपट कर देते हैं। ग्रामीणों ने स्थायी गोशाला बनवाने की मांग की। डीएम ने गोशाला बनवाने का आश्वासन दिया है।
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बाढ़ से प्रधान का मकान ढहा
यमुना नदी में बाढ़ से महदेवा गांव निवासी जैसलपुर प्रधान रामकेश कठेरिया का कच्चा मकान बाढ़ के कारण ढह गया। यमुना नदी का पानी प्रधान के घर में अभी भी भरा है। जानकारी के बाद डीएम ने प्रधान के घर का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रधान ने गांव के भूमिहीन लोगों को पक्के मकानों की मांग की।
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वहीं, महदेवा में ऊंचे स्थान पर तिरपाल से झोपड़ी बनाकर रह रहे पांच बाढ़ पीड़ितों से तहसील स्तरीय से मिलने वाली राहत सामग्री की जानकारी ली। प्रधान रामकेश कठेरिया ने डीएम को बताया कि यमुना नदी में बाढ़ से गांव के 50 परिवार प्रभावित हुए हैं। लोगों के कच्चे घर ढह गए। घरों में अभी भी पानी भरा है। ऐसे में पीड़ित परिवारों को तहसील प्रशासन ने प्राइमरी स्कूल व पंचायत भवन में ठहराया है। 15 से अधिक पीड़ित परिवार को तहसील प्रशासन की ओर से मिलने वाला भोजन नाकाफी साबित हो रहा है। गांव का रास्ता जलमग्र हैं। प्राइवेट नाव के जरिये लोगों का आना जाना हो रहा है। डीएम ने एसडीएम रमेश चंद्र को चार नावों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
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चार किलोमीटर पक्के रास्ते की मांग
जैसलपुर गांव के प्रधान रामकेश कठेरिया, महेंद्र सिंह, शिवशंकर, नरेंद्र सिंह ने डीएम को बताया कि हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने से महदेवा गांव में पानी भर जाता है। जैसलपुर गांव तक पक्की सड़क बनी है। जो बाढ़ में डूब जाती है। ग्रामीणों ने महदेवा को खटकर को जोड़ने वाली चार किलोमीटर पक्की सड़क बनवाने की मांग की।
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स्थायी गौशाला की मांग
जैसलपुर गांव के नरेंद्र सिंह ने डीएम को बताया कि बीहड़ पट्टी में बसे गांव में सबसे बड़ी समस्या छुट्टा मवेशियों की है। छुट्टा मवेशी किसानों की फसलों को चौपट कर देते हैं। ग्रामीणों ने स्थायी गोशाला बनवाने की मांग की। डीएम ने गोशाला बनवाने का आश्वासन दिया है।
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बाढ़ से प्रधान का मकान ढहा
यमुना नदी में बाढ़ से महदेवा गांव निवासी जैसलपुर प्रधान रामकेश कठेरिया का कच्चा मकान बाढ़ के कारण ढह गया। यमुना नदी का पानी प्रधान के घर में अभी भी भरा है। जानकारी के बाद डीएम ने प्रधान के घर का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रधान ने गांव के भूमिहीन लोगों को पक्के मकानों की मांग की।