{"_id":"5c346e47bdec225719190b66","slug":"dm-s-big-decision-to-get-rid-of-stray-cattle","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कानपुरः आवारा मवेशियों से निजात दिलाने को डीएम का बड़ा फैसला, बनेंगे आश्रय स्थल, कमेटियां गठित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुरः आवारा मवेशियों से निजात दिलाने को डीएम का बड़ा फैसला, बनेंगे आश्रय स्थल, कमेटियां गठित
Tue, 08 Jan 2019 03:41 PM IST
gaurav gaurav
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: gaurav gaurav
Updated Tue, 08 Jan 2019 03:41 PM IST
विज्ञापन
स्कूल में आवारा जानवर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के कानपुर में किसानों को आवारा मवेशियों से निजात दिलाने के लिए जिलाधिकारी ने बड़ा निर्देश जारी किया है। जनपद के 10 ब्लॉकों में आश्रय स्थल का काम पूरा हो चुका है। आवारा मवेशियों की निगरानी के लिए 3 श्रेणियों में कमेटियां गठित की गई हैं।
सीएम के तय समय के अनुसार अब तीन दिन बाकी
किसानों को आवारा गोवंश की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन ने 10 जनवरी तक कानपुर देहात जिले में 21 आश्रय स्थल का बनाने के निर्देश जारी किए हैं लेकिन अभी तक कई ब्लाकों में आश्रय स्थल का निर्माण शुरु भी नहीं हो सका है। जिससे निर्धारित समय में इनका निर्माण पूरा होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इधर किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। आक्रोशित किसान गोवंशों को खदेड़ कर कहीं स्कूल तो कहीं स्टेडियम में बंद कर रहे हैं।
फसलों को उजाड़ रहे छुट्टा गोवंश से निजात के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 जनवरी तक सभी जिलों में गोवंश आश्रय स्थल निर्माण के निर्देश 2 जनवरी को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए दिए थे। इसके बाद डीएम राकेश कुमार सिंह ने बैठक कर तीन जनवरी से भूमि का चिंहाकंन करने का काम शुरु कराया था। सीडीओ को चयनित गांवों में गोवंश आश्रय स्थल का निर्माण मनरेगा के तहत कराने के लिए कहा गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई जगह तेजी दिखाई लेकिन डेरापुर ब्लाक के चिंहित गांव खल्ला व बड़ा गांव भिक्खी में अभी तक काम शुरु नहीं हो सका। सरवनखेड़ा ब्लाक के बिलसरायां व करसा में आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है यहां सोमवार को एसडीएम आनंद कुमार सिंह ने निरीक्षण किया। विलसरांया गांव की प्रस्तावित जमीन 24 बीघे जमीन में घेराबंदी करने के लिए खांई खुदवाई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीएम के तय समय के अनुसार अब तीन दिन बाकी
किसानों को आवारा गोवंश की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन ने 10 जनवरी तक कानपुर देहात जिले में 21 आश्रय स्थल का बनाने के निर्देश जारी किए हैं लेकिन अभी तक कई ब्लाकों में आश्रय स्थल का निर्माण शुरु भी नहीं हो सका है। जिससे निर्धारित समय में इनका निर्माण पूरा होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इधर किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। आक्रोशित किसान गोवंशों को खदेड़ कर कहीं स्कूल तो कहीं स्टेडियम में बंद कर रहे हैं।
विज्ञापन
फसलों को उजाड़ रहे छुट्टा गोवंश से निजात के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 जनवरी तक सभी जिलों में गोवंश आश्रय स्थल निर्माण के निर्देश 2 जनवरी को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए दिए थे। इसके बाद डीएम राकेश कुमार सिंह ने बैठक कर तीन जनवरी से भूमि का चिंहाकंन करने का काम शुरु कराया था। सीडीओ को चयनित गांवों में गोवंश आश्रय स्थल का निर्माण मनरेगा के तहत कराने के लिए कहा गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई जगह तेजी दिखाई लेकिन डेरापुर ब्लाक के चिंहित गांव खल्ला व बड़ा गांव भिक्खी में अभी तक काम शुरु नहीं हो सका। सरवनखेड़ा ब्लाक के बिलसरायां व करसा में आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है यहां सोमवार को एसडीएम आनंद कुमार सिंह ने निरीक्षण किया। विलसरांया गांव की प्रस्तावित जमीन 24 बीघे जमीन में घेराबंदी करने के लिए खांई खुदवाई जा रही है।
विज्ञापन
एसडीएम ने दिए काम में तेजी लाने के निर्देश
स्कूल में आवारा जानवर
एसडीएम ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। बीडीओ बब्बन राय ने बताया कि आश्रय स्थल के आसपास एक मीटर गहरी व एक मीटर चौड़ी खांई खुदवाई जानी है। जिसका काम करसा व बिलसरायां में चल रहा है। इसके बाद टीन शेड, चरही आदि का निर्माण कराया जाएगा। रसूलाबाद ब्लाक के असालतगंज तथा गंभीरा में भूमि का चिंहाकंन करके जेसीबी से खुदाई शुरु कराई गई है। सहायक खंड विकास अधिकारी पीके दीक्षित ने बताया कि अधिकतम सौ मवेशियों के रखने की व्यवस्था एक आश्रय स्थल पर होगी। मैथा ब्लाक के ककरदही, कडां व रैपालपुर में खांई की खुदाई शुरु है। इसी तरह से संदलपुर, मलासा, अमरौधा आदि ब्लाकों में काम तेजी नहीं पकड़ रहा है। सीएम की ओर से निर्धारित कि गए समय की बात करें तो आश्रय स्थल का निर्माण पूरा कराने के लिए जिला प्रशासन के पास केवल तीन दिन बचे हैं।