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खुलासा: कर्मचारियों के खातों से निकला 10 लाख पीएफ, कंसल्टेंट के पास थे निदेशकों के डिजिटल हस्ताक्षर
Thu, 15 Sep 2022 09:52 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 15 Sep 2022 09:52 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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कानपुर में रनियां की जाहिद लेदर कंपनी के कर्मचारियों के पीएफ खातों से 10 लाख रुपये निकाले गए हैं। पहली बार 10 अप्रैल 2021 को रुपये निकाले गए। इसके बाद मार्च 2022 तक छह और दावे कर रकम निकाली गई। नया खुलासा यह हुआ है कि कंपनी निदेशकों के डिजिटल हस्ताक्षर कंसल्टेंट के पास थे। हालांकि इतने महत्वपूर्ण हस्ताक्षर कंसल्टेंट के पास कैसे पहुंचे, इसकी जांच शुरू हो गई है।
इस मामले में केस्को के पीएफ घोटाले के मास्टर माइंड मुकुल चौबे का भी कनेक्शन मिल रहा है। मुकुल ने सैकड़ों कर्मचारियों की जानकारी जुटाकर लाखों रुपये निकाल लिए थे। दरअसल, पीएफ निकालने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। इसमें किसी कंपनी के कर्मचारियों के आवेदन आने के बाद उससे जुड़ी जानकारी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये संबंधित नियोक्ता की ओर से सत्यापित की जाती है।
जन्मतिथि, नाम, पता और उसके दावे का सत्यापन होता है। सामान्यता किसी कंपनी में वहां के एचआर के पास या कंपनी के निदेशकों के पास डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। इस मामले में निदेशकों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पता चला है कि यहां के कर्मचारियों के पीएफ का कामकाज एक कंसल्टेंट को दे दिया गया था।
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इस मामले में केस्को के पीएफ घोटाले के मास्टर माइंड मुकुल चौबे का भी कनेक्शन मिल रहा है। मुकुल ने सैकड़ों कर्मचारियों की जानकारी जुटाकर लाखों रुपये निकाल लिए थे। दरअसल, पीएफ निकालने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। इसमें किसी कंपनी के कर्मचारियों के आवेदन आने के बाद उससे जुड़ी जानकारी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये संबंधित नियोक्ता की ओर से सत्यापित की जाती है।
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जन्मतिथि, नाम, पता और उसके दावे का सत्यापन होता है। सामान्यता किसी कंपनी में वहां के एचआर के पास या कंपनी के निदेशकों के पास डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। इस मामले में निदेशकों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पता चला है कि यहां के कर्मचारियों के पीएफ का कामकाज एक कंसल्टेंट को दे दिया गया था।
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वही डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये दावों के संबंध में प्रक्रिया पूरी करता था। मुकुल चौबे भी कंसल्टेंट का काम करता था। ऐसे में आशंका है कि इस कंपनी का काम भी इसके पास रहा हो और उसने फर्जीवाड़ा कर पीएफ निकाल लिया हो। क्षेत्रीय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के प्रवर्तन अधिकारी संजय कुमार निगम ने मंगलवार को जाहिद शौकत, राशिक शौकत, शरीक शौकत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
तीनों मेसर्स जाहिद लेदर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ग्राम चिरौरा रनियां में निदेशक हैं। इन पर फर्जी पीएफ खाताधारकों की सूची लगाकर और उसे प्रमाणित कर पीएफ निकालने का आरोप है। एक अन्य मामले में प्रवर्तन अधिकारी वंदना पांडेय ने ललित गुप्ता, मुकुल चौबे पर पीएफ के खाते से फर्जी खाता धारकों की सूची लगाकर पैसा निकालने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया है। इन सभी मामलों में अपराध का तरीका और एक ही व्यक्ति से जुड़ाव निकल रहा है। मुकुल चौबे को इस मामले में भी आरोपी बनाया गया है।
तीनों मेसर्स जाहिद लेदर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ग्राम चिरौरा रनियां में निदेशक हैं। इन पर फर्जी पीएफ खाताधारकों की सूची लगाकर और उसे प्रमाणित कर पीएफ निकालने का आरोप है। एक अन्य मामले में प्रवर्तन अधिकारी वंदना पांडेय ने ललित गुप्ता, मुकुल चौबे पर पीएफ के खाते से फर्जी खाता धारकों की सूची लगाकर पैसा निकालने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराया है। इन सभी मामलों में अपराध का तरीका और एक ही व्यक्ति से जुड़ाव निकल रहा है। मुकुल चौबे को इस मामले में भी आरोपी बनाया गया है।