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Kanpur News: उर्सला में नहीं बन सके दिव्यांगता कार्ड, बिना ईएनटी विशेषज्ञ के चला दिव्यांग बोर्ड
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कानपुर। उर्सला में बृहस्पतिवार को लगने वाला दिव्यांग बोर्ड बिना ईएनटी सर्जन के चला। यहां दिव्यांगता का कार्ड बनवाने आए दिव्यांगों को लौटना पड़ा। नेत्र रोग विशेषज्ञ के तौर पर डॉ. डीएस राजपूत ने अपनी सेवाएं दीं। होमगार्ड रिश्वत प्रकरण में उनका नाम भी शामिल था लेकिन सबूतों के अभाव में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है। होमगार्ड भर्ती के लिए बनाए गए बोर्ड से उन्हें हटा दिया गया है लेकिन दिव्यांग बोर्ड में वे अभी भी शामिल हैं।
सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि अधिकतर डॉक्टरों की ड्यूटी बोर्डों में लगी है। बाकी वैकल्पिक व्यवस्था से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं। दिव्यांग बोर्ड में तीन डॉक्टरों का पैनल रहता है। अभी तक इसमें ईएनटी विशेषज्ञ के तौर पर उर्सला के डॉ. राजेश वर्मा, अस्थि रोग में डॉ. आशीष मिश्रा और नेत्र में डॉ. डी एस राजपूत शामिल थे लेकिन डॉ. राजेश वर्मा की होमगार्ड भर्ती के लिए पुलिस के बोर्ड में ड्यूटी लगी है और अब उर्सला अस्पताल के पास एक भी स्थायी डॉक्टर नहीं है। इसलिए बृहस्पतिवार को बोर्ड में ईएनटी के लिए दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने आए लोगों को लौटा दिया गया और उन्हें सोमवार को कांशीराम अस्पताल बुलाया गया है।
शासन के आदेश का इंतजार
उर्सला अस्पताल में दोनों आरोपी डॉक्टर डॉ. प्रवीण सक्सेना और डॉ. महेश के 48 घंटे जेल में रहने के बाद स्वत: निलंबन तो हो गया है लेकिन अब उर्सला प्रशासन को शासन के आदेश का इंतजार है। अस्पताल से एक ही विभाग के दो डॉक्टर चले जाने के बाद ओपीडी से लेकर ओटी तक में संकट आ गया है। निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि 48 घंटे जेल में रहने के बाद सरकारी डॉक्टर का निलंबन स्वत नियमानुसार हो जाता है लेकिन हम लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
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सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि अधिकतर डॉक्टरों की ड्यूटी बोर्डों में लगी है। बाकी वैकल्पिक व्यवस्था से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं। दिव्यांग बोर्ड में तीन डॉक्टरों का पैनल रहता है। अभी तक इसमें ईएनटी विशेषज्ञ के तौर पर उर्सला के डॉ. राजेश वर्मा, अस्थि रोग में डॉ. आशीष मिश्रा और नेत्र में डॉ. डी एस राजपूत शामिल थे लेकिन डॉ. राजेश वर्मा की होमगार्ड भर्ती के लिए पुलिस के बोर्ड में ड्यूटी लगी है और अब उर्सला अस्पताल के पास एक भी स्थायी डॉक्टर नहीं है। इसलिए बृहस्पतिवार को बोर्ड में ईएनटी के लिए दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने आए लोगों को लौटा दिया गया और उन्हें सोमवार को कांशीराम अस्पताल बुलाया गया है।
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शासन के आदेश का इंतजार
उर्सला अस्पताल में दोनों आरोपी डॉक्टर डॉ. प्रवीण सक्सेना और डॉ. महेश के 48 घंटे जेल में रहने के बाद स्वत: निलंबन तो हो गया है लेकिन अब उर्सला प्रशासन को शासन के आदेश का इंतजार है। अस्पताल से एक ही विभाग के दो डॉक्टर चले जाने के बाद ओपीडी से लेकर ओटी तक में संकट आ गया है। निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि 48 घंटे जेल में रहने के बाद सरकारी डॉक्टर का निलंबन स्वत नियमानुसार हो जाता है लेकिन हम लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
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