Kanpur: कंपनी के फंड को इधर-उधर नहीं कर पाएंगे संचालक, सीएस और ऑडिट कमेटी के लिए नियम हुए सख्त
Kanpur News: कंपनियों के लेनदेन के खुलासे को काफी विस्तृत कर दिया गया है। इससे निवेशकों को अधिक जानकारी मिलेगी। कंपनियों को उनके लेनदेन की प्रकृति के अनुसार खुलासा करने की अनुमति मिलेगी। ऑडिट कमेटी और स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका बढ़ाई गई है।
विस्तार
कंपनियों और उसकी सहायक कंपनियों के फंड व निवेश में कंपनी संचालक गड़बड़ी नहीं कर पाएंगे। कंपनियों से जुड़े लोगों की वित्तीय निगरानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) बढ़ाने जा रहा है। कंपनी सचिव (सीएस) और ऑडिट कमेटी के लिए नियम सख्त करते हुए कंपनी के संबंधित पक्ष के लेनदेन का प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। लेनदेन सही हुआ या नहीं, कंपनी के हित में इसको भी प्रमाणित करना होगा।
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान कानपुर चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष सीएस अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सेबी ने कंपनियों से जुड़े लेनदेन के संबंध में नया सर्कुलर जारी किया है। इसमें लेनदेन से जुड़ी पारदर्शिता, उद्योग मानकों और प्रमाणन को मजबूत करने के लिए नए नियम शामिल किए गए हैं। कंपनियों के खुलासे (डिस्क्लोजर) से संबंधित नए नियम बनाए गए हैं।
कंपनी को पूरी जानकारी देनी होगी
तीन स्तरों व्यापक, सीमित और न्यूनतम पर खुलासे करने होंगे। व्यापक स्तर में कोई महत्वपूर्ण लेनदेन किया गया है, तो कंपनी को पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें संबंधित पक्ष की जानकारी, मूल्य निर्धारण तंत्र, कंपनी और निवेशकों पर प्रभाव, हितों के टकराव की स्थिति बतानी होगी। सीमित खुलासा में केवल लेनदेन का सारांश और उसके प्रभाव की जानकारी देनी होगी।
संबंधित पक्ष लेनदेन कंपनी के सर्वोत्तम हित में है
न्यूनतम खुलासा में यदि कोई छोटी धनराशि संबंधित को दी गई है, तो मूलभूत जानकारी देनी होगी। उन्होंने बताया कि सेबी ने पहली बार ऑडिट कमेटी प्रमाणन की अनिवार्यता लागू की है। अब कंपनी के मुख्य प्रबंधकीय कार्मिक और ऑडिट कमेटी को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित पक्ष लेनदेन कंपनी के सर्वोत्तम हित में है। लेनदेन उद्योग मानकों और बाजार दर के अनुसार किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार का अनुचित लाभ नहीं दिया गया है।
लेनदेन का बहुत सावधानी से मूल्यांकन करना होगा
सीएस श्रुति श्रीवास्तव ने बताया कि ऑडिट कमेटी भूमिका बढ़ा दी गई है। ऑडिट कमेटी को हर संबंधित पक्ष के लेनदेन को मंजूरी देने से पहले जांच करनी होगी। कमेटी को देखना होगा कि सौदा बाजार दर के अनुसार और कंपनी के हित में है या नहीं। इससे लेनदेन की विश्वसनीयता बढ़ेगी। एक कंपनी सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनी इन नए नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है या नहीं। इसके अतिरिक्त ऑडिट कमेटी पर दबाव और जवाबदेही बढ़ेगी। ऑडिट कमेटी से पुष्टि के साथ ही कंपनी के प्रमाणपत्र भी पेश किए गए हैं। ऑडिट कमेटी को संबंधित पार्टी के लेनदेन का बहुत सावधानी से मूल्यांकन करना होगा। उन्होंने बताया कि नए नियम एक अप्रैल से प्रभावी होंगे।
यह होगा लाभ
कंपनियों के लेनदेन के खुलासे को काफी विस्तृत कर दिया गया है। इससे निवेशकों को अधिक जानकारी मिलेगी। कंपनियों को उनके लेनदेन की प्रकृति के अनुसार खुलासा करने की अनुमति मिलेगी। ऑडिट कमेटी और स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका बढ़ाई गई है।