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दिल के अरमां आंसुओं में बह गए...
अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2016 01:33 AM IST
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किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय कपूर के जन्मदिन पर फैंस एसोसिएशन की ओर से बाबूपुरवा ईदगाह मैदान में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया।
देर रात मुशायरे में पहुंचीं सलमा आगा ने ‘दिल के अरमा आंसुओं में बह गए‘ व शायर मुनव्वर राणा ने ‘रोशनी देती हुईं सब लालटेनें बुझ गईं, खत नहीं आया तो मांओं की आरजुएं बुझ गईं‘ सुनाकर माहौल बनाया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अनवर जलाल पुरी ने न तेरा है न मेरा, ये हिन्दुस्तान सबका है, नहीं समझी गई यह बात तो नुकसान सबका है सुनाईं। इसके बाद मो. कलीम ने मां का महत्व बताते हुए कहा कि अगर मां रूठ जाए तो जन्नत रूठ जाएगी।
अलताफ जिया ने जल रहा है मेरा दीया कैसे मेहरबां हो गई हवा कैसे, सारी बस्ती तो एक जैसी थी, सिर्फ मेरा ही घर जला कैसे, बसीम बरेलवी ने अपने कलाम में कहा कि रोशनी लाने से बेहतर था दिल आबाद हो घर सन्नाटा चरागों से नहीं जाता।
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अंजुम रहबर ने कहा कि मजबूरियों के नाम सब छोड़ना पड़ा दिल तोड़ना पड़ा, मेरी पसंद और थी सबकी और, इतनी सी बात पर घर छोड़ा सुनाया तो पंडाल तालियों को गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसी कड़ी में मिशम गोपालपुरी, सज्जाद झंझट, नकहत अमरौही, खुर्शीद हैदर, माजिद देवबंदी, शहजाद कलीम जौहर आदि ने भी शेर पड़े।
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देर रात मुशायरे में पहुंचीं सलमा आगा ने ‘दिल के अरमा आंसुओं में बह गए‘ व शायर मुनव्वर राणा ने ‘रोशनी देती हुईं सब लालटेनें बुझ गईं, खत नहीं आया तो मांओं की आरजुएं बुझ गईं‘ सुनाकर माहौल बनाया।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अनवर जलाल पुरी ने न तेरा है न मेरा, ये हिन्दुस्तान सबका है, नहीं समझी गई यह बात तो नुकसान सबका है सुनाईं। इसके बाद मो. कलीम ने मां का महत्व बताते हुए कहा कि अगर मां रूठ जाए तो जन्नत रूठ जाएगी।
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अलताफ जिया ने जल रहा है मेरा दीया कैसे मेहरबां हो गई हवा कैसे, सारी बस्ती तो एक जैसी थी, सिर्फ मेरा ही घर जला कैसे, बसीम बरेलवी ने अपने कलाम में कहा कि रोशनी लाने से बेहतर था दिल आबाद हो घर सन्नाटा चरागों से नहीं जाता।
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अंजुम रहबर ने कहा कि मजबूरियों के नाम सब छोड़ना पड़ा दिल तोड़ना पड़ा, मेरी पसंद और थी सबकी और, इतनी सी बात पर घर छोड़ा सुनाया तो पंडाल तालियों को गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसी कड़ी में मिशम गोपालपुरी, सज्जाद झंझट, नकहत अमरौही, खुर्शीद हैदर, माजिद देवबंदी, शहजाद कलीम जौहर आदि ने भी शेर पड़े।