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खिचड़ी का त्योहार, 14-15 पर ‘रार’
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 13 Jan 2015 02:52 AM IST
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पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी संक्रांति की तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कोई 14 तारीख बता रहा है तो किसी का कहना है कि खिचड़ी 15 तारीख को मनाई जाएगी। पर अधिकतर का मानना है कि मकर संक्रांति 15 को ही पड़ेगी।
इसके पीछे उनका अपना तर्क भी है। उनका कहना है कि सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश सूर्यास्त के बाद 7:30 बजे करेगा इस लिहाज से पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जाएगा।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य केवल दूसरी राशि में ही नहीं जाता है बल्कि अपना रास्ता भी बदलता है। विज्ञान की भाषा में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने अक्ष के दोनों ध्रुवों की ओर झुकती है।
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जब यह झुकाव उत्तरी ध्रुव की ओर होता है तब सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता नजर आता है। 14 जनवरी को यही होता है इसे सूर्य का उत्तरायण होना कहते हैं। इस दिन से जहां दिन बड़े होेने लगते हैं वहीं सूर्य की किरणें भी तेज होने लगती हैं।
पंडित उमाशंकर शर्मा ने बताया कि सूर्य की गति के कारण ही संक्रांति की तारीख बदल रही है। अगले 60 साल बाद मकर संक्रांति का दिन फिर बदलेगा।
यह प्रक्रिया 431 सालों तक जारी रहेगी इसके बाद सूर्य गति के चलते तिथियां वापस लौटना शुरू करेंगी।
उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से पुण्य काल 15 जनवरी को ही माना जाएगा। पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि 72 साल में सूर्य में एक अंश का अंतर आता है और इसी कारण कई दशक बाद एक दिन का अंतर आया है।
इससे पहले 13 जनवरी को भी संक्रांति पड़ चुकी है। इस बार सायं काल 7.30 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह सिर्फ काशी की है। अलग-अलग शहरों में सूर्य के उदय और अस्त होने का अंतर आएगा।
जिस कारण देश के कुछ अंचलों में 14 जनवरी को संक्रांति मनाएंगे और कुछ अंचलों में 15 जनवरी को मनाएंगे। ज्योतिषाचार्य दीपक पांडेय भी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति बात कह रहे हैं।
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इसके पीछे उनका अपना तर्क भी है। उनका कहना है कि सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश सूर्यास्त के बाद 7:30 बजे करेगा इस लिहाज से पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जाएगा।
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मकर संक्रांति के दिन सूर्य केवल दूसरी राशि में ही नहीं जाता है बल्कि अपना रास्ता भी बदलता है। विज्ञान की भाषा में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने अक्ष के दोनों ध्रुवों की ओर झुकती है।
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जब यह झुकाव उत्तरी ध्रुव की ओर होता है तब सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता नजर आता है। 14 जनवरी को यही होता है इसे सूर्य का उत्तरायण होना कहते हैं। इस दिन से जहां दिन बड़े होेने लगते हैं वहीं सूर्य की किरणें भी तेज होने लगती हैं।
पंडित उमाशंकर शर्मा ने बताया कि सूर्य की गति के कारण ही संक्रांति की तारीख बदल रही है। अगले 60 साल बाद मकर संक्रांति का दिन फिर बदलेगा।
यह प्रक्रिया 431 सालों तक जारी रहेगी इसके बाद सूर्य गति के चलते तिथियां वापस लौटना शुरू करेंगी।
उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से पुण्य काल 15 जनवरी को ही माना जाएगा। पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि 72 साल में सूर्य में एक अंश का अंतर आता है और इसी कारण कई दशक बाद एक दिन का अंतर आया है।
इससे पहले 13 जनवरी को भी संक्रांति पड़ चुकी है। इस बार सायं काल 7.30 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह सिर्फ काशी की है। अलग-अलग शहरों में सूर्य के उदय और अस्त होने का अंतर आएगा।
जिस कारण देश के कुछ अंचलों में 14 जनवरी को संक्रांति मनाएंगे और कुछ अंचलों में 15 जनवरी को मनाएंगे। ज्योतिषाचार्य दीपक पांडेय भी 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति बात कह रहे हैं।