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केडीए में डीजल घोटाला : पेट्रोल पंप मालिक और तीन जेई पर एफआईआर, ये है पूरा मामला
Mon, 12 Jul 2021 11:15 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 12 Jul 2021 11:15 PM IST
सार
डीएम ने अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल को जांच सौंपी थी। उनकी जांच में केयर टेकर विभाग में तैनात रहे तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर कमेंद्र सिंह, असत अली सिद्दीकी, रविंद्र प्रकाश दोषी पाए गए हैं। वहीं पेट्रोल पंप मालिक शैलेंद्र अग्रवाल की भी घोटाले में भूमिका मिली है।
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केडीए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्वरूपनगर पुलिस ने कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में हुए डीजल घोटाले में पेट्रोल पंप मालिक और केयर टेकर विभाग के तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। केडीए में अगस्त 2017 से दिसंबर 2019 के बीच डीजल की ज्यादा खपत दिखाकर दो करोड़, 15 लाख 57 हजार रुपर्ये इंधन उपलब्ध करने वाली फर्म में ट्रांसफर कर दिए गए थे।
जिसके मालिक शैलेंद्र अग्रवाल हैं। उनका मेसर्स इंजीनियर्स सर्विस, स्टेशन अधिकृत विक्रेता इंडियन ऑयल, कार्पोेरेशन लिमिटेड के नाम से बेनाझाबर रोड पर पेट्रोल पंप है। घोटाले की शिकायत नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जलकल कर्मचारी समन्वय संघ के अध्यक्ष बचाऊ सिंह ने तत्कालीन कमिश्नर और जिलाधिकारी से की थी।
डीएम ने अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल को जांच सौंपी थी। उनकी जांच में केयर टेकर विभाग में तैनात रहे तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर कमेंद्र सिंह, असत अली सिद्दीकी, रविंद्र प्रकाश दोषी पाए गए हैं। वहीं पेट्रोल पंप मालिक शैलेंद्र अग्रवाल की भी घोटाले में भूमिका मिली है।
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वह कोई भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके कि उनके खाते में अधिक भुगतान कैसे पहुंचा। लिहाजा जांच में पेट्रोल पंप मालिक को भी दोषी माना गया। थानाप्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि केयर टेकर विभाग के सुनील कुमार तिवारी की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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जिसके मालिक शैलेंद्र अग्रवाल हैं। उनका मेसर्स इंजीनियर्स सर्विस, स्टेशन अधिकृत विक्रेता इंडियन ऑयल, कार्पोेरेशन लिमिटेड के नाम से बेनाझाबर रोड पर पेट्रोल पंप है। घोटाले की शिकायत नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जलकल कर्मचारी समन्वय संघ के अध्यक्ष बचाऊ सिंह ने तत्कालीन कमिश्नर और जिलाधिकारी से की थी।
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डीएम ने अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) बसंत लाल को जांच सौंपी थी। उनकी जांच में केयर टेकर विभाग में तैनात रहे तत्कालीन तीन जूनियर इंजीनियर कमेंद्र सिंह, असत अली सिद्दीकी, रविंद्र प्रकाश दोषी पाए गए हैं। वहीं पेट्रोल पंप मालिक शैलेंद्र अग्रवाल की भी घोटाले में भूमिका मिली है।
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वह कोई भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके कि उनके खाते में अधिक भुगतान कैसे पहुंचा। लिहाजा जांच में पेट्रोल पंप मालिक को भी दोषी माना गया। थानाप्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि केयर टेकर विभाग के सुनील कुमार तिवारी की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।