खुशखबरी: डायबिटिक रोगियों के नहीं कटेंगे पैर, बैक्टीरिया को खा जाएंगे बैक्टीरियोफाज, जानिए क्या होंगे फायदे
डायबिटीज रोगियों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि अब घाव होने पर उनके पैर नहीं कटेंगे। दरअसल, हैलट में इस साल से नए सॉल्युशन पर शोध होगा, जो पैर में घाव होने पर बैक्टीरिया को खा जाएगा।
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कानपुर में डायबिटीज रोगियों के पैर में घाव होने पर कटने की नौबत नहीं आएगी। पैर में गैंगरीन नहीं हो पाएगा। बैक्टीरियोफाज वायरस पैरों में सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खा लेंगे। इससे घाव जल्दी भर जाएगा। डायबिटिक फुट के रोगियों के घाव में बैक्टीरियोफाज से बनी दवा का घोल डाला जाएगा।
इस दवा पर अगले साल जनवरी से शोध शुरू हो जाएगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि अनियंत्रित डायबिटीज रहने से रोगियों को न्यूरोपैथी हो जाती है। इससे तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं। इसके साथ ही वैस्कुलोपैथी भी हो सकती है।
इसमें नसों में खराबी आ जाती है। इसके अलावा डायबिटीज के दुष्प्रभाव के कारण रोगी के अंग में सेंसेशन कम होता है। रोगियों के पैर में बार-बार चोट लगती है। उन्हें पता नहीं चलता और घाव बना रहता है। घाव के बैक्टीरिया बायोफिल्म बना लेते हैं।
यह एक तरह की शील्ड होती है। इससे एंटीबायोटिक का प्रभाव घाव में नहीं जा पाता और बैक्टीरिया पनपा करते हैं। बैक्टीरियाफाज वाली यह नई दवा शील्ड को तोड़ देते हैं। वायरस घातक बैक्टीरिया को खा जाते हैं। इसके साथ ही एंटीबायोटिक भी असर करती है।
इससे घाव जल्दी भर जाता है। उन्होंने बताया कि इस दवा का इस्तेमाल संबंधी शोध देश के 20 केंद्रों पर होगा। इसमें एक सेंटर हैलट में बनेगा। शोध में डायबिटिक फुट के 20 रोगियों को शामिल किया जाएगा। जनवरी वर्ष 2023 में इसे शुरू किया जाएगा।