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आईआईटी कानपुर में बीओजी का भरोसा जीतने में उपनिदेशक कामयाब, बढ़ा कद
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 25 Nov 2018 10:24 AM IST
सार
- फैकल्टी फोरम का विरोध बेअसर, कई कमेटियों के बने चेयरमैन, आर्थिक मामलों में स्वीकृति
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आईआईटी कानपुर
विस्तार
आईआईटी कानपुर में फैकल्टी फोरम का विरोध झेल रहे उपनिदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल का कद इंस्टीट्यूट प्रशासन ने काफी बढ़ा दिया है। खास बात है कि तमाम आरोपों के बाद भी बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) ने प्रो. मणिंद्र पर पूरा भरोसा किया है।
बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही इंस्टीट्यूट प्रशासन ने प्रो. अग्रवाल की शक्तियों में वृद्घि की है और उन्हें कई कमेटियों का चेयरमैन भी बना दिया है। शनिवार को जारी आदेश में प्रो. अग्रवाल अब एक करोड़ रुपये तक बिल्डिंग वर्क के लिए धनराशि स्वीकृत कर सकते हैं।
अभी तक उनके पास महज 28 लाख रुपये तक की स्वीकृति देने का अधिकार था। इसके अलावा खरीददारी करने, कई बिल को स्वीकृत करने की शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। अभी तक जो केवल बीओजी की स्वीकृति से ही होता था।
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बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही इंस्टीट्यूट प्रशासन ने प्रो. अग्रवाल की शक्तियों में वृद्घि की है और उन्हें कई कमेटियों का चेयरमैन भी बना दिया है। शनिवार को जारी आदेश में प्रो. अग्रवाल अब एक करोड़ रुपये तक बिल्डिंग वर्क के लिए धनराशि स्वीकृत कर सकते हैं।
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अभी तक उनके पास महज 28 लाख रुपये तक की स्वीकृति देने का अधिकार था। इसके अलावा खरीददारी करने, कई बिल को स्वीकृत करने की शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। अभी तक जो केवल बीओजी की स्वीकृति से ही होता था।
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आईआईटी कानपुर
एक हजार करोड़ के प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग भी करेंगे
प्रो. अग्रवाल को इंस्टीट्यूट प्रशासन ने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसमें करीब 600 करोड़ रुपये की हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी की तरफ से मिलने वाले फंड व अन्य संस्थानों से मिले करीब 400 करोड़ के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
कई सीनियर प्रोफेसर हैं उपनिदेशक के साथ
भले ही फैकल्टी फोरम के करीब 150 प्रोफेसर उपनिदेशक के विरोध में खड़े हैं, लेकिन करीब इतने ही सीनियर प्रोफेसर उनके पक्ष में भी हैं। प्रो. अग्रवाल की साख देश और दुनिया में काफी अच्छी है। यही कारण है कि इंस्टीट्यूट प्रशासन पद्मश्री से सम्मानित प्रो. अग्रवाल पर किसी तरह का अविश्वास न जताते हुए उनकी जिम्मेदारियों को बढ़ाने में जुट गई है।
प्रो. अग्रवाल को इंस्टीट्यूट प्रशासन ने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसमें करीब 600 करोड़ रुपये की हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी की तरफ से मिलने वाले फंड व अन्य संस्थानों से मिले करीब 400 करोड़ के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
कई सीनियर प्रोफेसर हैं उपनिदेशक के साथ
भले ही फैकल्टी फोरम के करीब 150 प्रोफेसर उपनिदेशक के विरोध में खड़े हैं, लेकिन करीब इतने ही सीनियर प्रोफेसर उनके पक्ष में भी हैं। प्रो. अग्रवाल की साख देश और दुनिया में काफी अच्छी है। यही कारण है कि इंस्टीट्यूट प्रशासन पद्मश्री से सम्मानित प्रो. अग्रवाल पर किसी तरह का अविश्वास न जताते हुए उनकी जिम्मेदारियों को बढ़ाने में जुट गई है।