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UP: बसपा के लिए कन्नौज से दूर रही दिल्ली, जिला बनाने का भी नहीं मिला फायदा, इस सीट पर कभी नहीं मिली जीत
Sat, 16 Mar 2024 08:03 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 16 Mar 2024 08:03 PM IST
सार
बसपा शासन में 1997 में कन्नौज को अलग जिला बनाया गया था। कन्नौज संसदीय सीट पर बसपा को कभी भी जीत नहीं मिली है।
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कन्नौज स्टेशन की प्रतिकात्मक फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अब से ठीक चार दशक पहले 1984 में अपने गठन के बाद से ही बसपा का कन्नौज में एक बार भी खाता नहीं खुल सका है। इन चार दशक के दौरान हुए 12 चुनाव के दौरान बसपा दूसरे और तीसरे नंबर तक पहुंची, लेकिन अव्वल मुकाम हासिल नहीं कर सकी। यहां के लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए प्रदेश में बसपा शासन के दौरान कन्नौज को 1997 में जिला बनाकर नई पहचान भी दी गई। इसके बावजूद सियासी कामयाबी नहीं हो सका।
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वर्ष 1967 में गठिक कन्नौज संसदीय सीट पर बारी-बारी से सभी प्रमुख पार्टियों को कामयाबी मिलती रही है। शुरू के दौरान में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस के उम्मीदवार कामयाब होते रहे। 90 के दशक में यहां सपा का दबदबा हो गया। समाजवादी पार्टी ने लगातार सात चुनाव में कामयाबी हासिल की। अपने सुनहरे दौर में कांग्रेस भी यहां से दो बार कामयाबी का मजा चख चुकी है। भाजपा को भी पिछले चुनाव में मोदी लहर के दौरान और उससे पहले वर्ष 1996 में यहां जीत हासिल हुई है। इन सबके बीच सूबे की सियासत में खास दबदबा रखने के बावजूद बसपा को यहां कभी भी लोकसभा चुनाव में कामयाबी नहीं हासिल हुई। यहां से एक अदद जीत के लिए पार्टी की ओर से कई प्रयोग किए गए। स्थानीय से लेकर बाहर के चेहरों को मौका दिया गया। सवर्ण, पिछड़ा और मुस्लिम चेहरों को भी बारी-बारी से मौका दिया, लेकिन नतीजा नहीं हासिल हुआ है।
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इस बार के दांव पर सभी की निगाह
अब एक बार फिर से बसपा ने यहां से इसी लोकसभा क्षेत्र की रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम चेहरे के रूप में अकील अहमद पट्टा को मौका दिया गया है। इसके पहले पार्टी ने वर्ष 2000 के उपचुनाव में पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे अकबर अहमद डंपी को उतारा था। कामयाबी नहीं मिली थी। इस बार फिर से पार्टी ने मुस्लिम चेहरे पर दांव लगायाहै। देखने वाली बात होगी कि इस बार बसपा की यह रणनीति किस हद तक कारगर साबित होगी।
पिछले चुनाव में गठबंधन के तहत नहीं उतरा उम्मीदवार
लोकसभा 2019 के चुनाव के दौरान बसपा का सपा से गठबंधन था। गठबंधन की वजह कर यह सीट सपा के हिस्से में आई। इस वजह कर बसपा ने यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। उसके पहले 2014 के चुनाव में बसपा के उम्मीदवार रहे निर्मल तिवारी 2019 के चुनाव में भाजपा में शामिल हो गए थे।
अब एक बार फिर से बसपा ने यहां से इसी लोकसभा क्षेत्र की रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम चेहरे के रूप में अकील अहमद पट्टा को मौका दिया गया है। इसके पहले पार्टी ने वर्ष 2000 के उपचुनाव में पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे अकबर अहमद डंपी को उतारा था। कामयाबी नहीं मिली थी। इस बार फिर से पार्टी ने मुस्लिम चेहरे पर दांव लगायाहै। देखने वाली बात होगी कि इस बार बसपा की यह रणनीति किस हद तक कारगर साबित होगी।
पिछले चुनाव में गठबंधन के तहत नहीं उतरा उम्मीदवार
लोकसभा 2019 के चुनाव के दौरान बसपा का सपा से गठबंधन था। गठबंधन की वजह कर यह सीट सपा के हिस्से में आई। इस वजह कर बसपा ने यहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। उसके पहले 2014 के चुनाव में बसपा के उम्मीदवार रहे निर्मल तिवारी 2019 के चुनाव में भाजपा में शामिल हो गए थे।
विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक बार कामयाबी
लोकसभा चुनाव की ही तरह बसपा को विधानसभा चुनाव में भी कामयाबी के लिए जूझना पड़ा है। सिर्फ एक बार 2007 के चुनाव के दौरान जब पूरे प्रदेश में बसपा की लहर चली थी, तब यहां से सिर्फ तिर्वा सीट पर कामयाबी मिली थी। उसके पहले और उसके बाद अब तक बसपा को किसी भी विधानसभा चुनाव में किसी भी सीट पर कामयाबी नहीं मिल सकी है।
लोकसभा चुनाव की ही तरह बसपा को विधानसभा चुनाव में भी कामयाबी के लिए जूझना पड़ा है। सिर्फ एक बार 2007 के चुनाव के दौरान जब पूरे प्रदेश में बसपा की लहर चली थी, तब यहां से सिर्फ तिर्वा सीट पर कामयाबी मिली थी। उसके पहले और उसके बाद अब तक बसपा को किसी भी विधानसभा चुनाव में किसी भी सीट पर कामयाबी नहीं मिल सकी है।
कन्नौज के चुनाव में बसपा का प्रदर्शन
- 1984: कोई प्रत्याशी नहीं
- 1989: अशोक सिंह, 20560 वोट पाकर चौथा स्थान
- 1991: कोई प्रत्याशी नहीं
- 1996: भगवानदीन शाक्य, 154586 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 1998: भगवानदीन कुशवाहा, 133106 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 1999: सुघर सिंह पाल, 118492 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 2000: उपचुनाव में अकबर अहमद डंपी, 247329 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2004: राजेश सिंह, 15699 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2009: डॉ. महेशचंद्र वर्मा, 221887 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2014: निर्मल तिवारी, 127785 वोट पाकर तीसरे स्थान पर
- 2019: कोई उम्मीदवार नहीं
- 1984: कोई प्रत्याशी नहीं
- 1989: अशोक सिंह, 20560 वोट पाकर चौथा स्थान
- 1991: कोई प्रत्याशी नहीं
- 1996: भगवानदीन शाक्य, 154586 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 1998: भगवानदीन कुशवाहा, 133106 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 1999: सुघर सिंह पाल, 118492 वोट पाकर तीसरा स्थान
- 2000: उपचुनाव में अकबर अहमद डंपी, 247329 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2004: राजेश सिंह, 15699 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2009: डॉ. महेशचंद्र वर्मा, 221887 वोट पाकर दूसरा स्थान
- 2014: निर्मल तिवारी, 127785 वोट पाकर तीसरे स्थान पर
- 2019: कोई उम्मीदवार नहीं