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बाघों का कुनबा बढ़ाने वाली त्रुशा की मौत: लंबे समय से चल रही थी बीमार, 14 शावकों को दिया था जन्म, पढ़ें कहानी

Tue, 12 Sep 2023 01:46 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 12 Sep 2023 01:46 PM IST
सार

Kanpur News: वर्ष 2010 में फर्रुखाबाद के जंगल से बाघिन त्रुशा और बाघ अभय को लाया गया था। 2017 तक दोनों की मेटिंग से 10 शावकों ने जन्म लिया था। इसके बाद पीलीभीत के जंगल से पकड़कर लाए गए आदमखोर बाघ प्रशांत और त्रुशा की मेटिंग कराई गई, तो 2017 में चार शावकों का जन्म हुआ।

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Death of Trusha, who increased the clan of tigers, She was ill for a long time, had given birth to 14 cubs
बाघिन त्रुशा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर चिड़ियाघर में दर्शकों को अब बाघिन त्रुशा की दहाड़ नहीं सुनाई देगी। लंबे समय से बीमार चल रही त्रुशा (19.5) ने सोमवार को अस्पताल परिसर में अंतिम सांस ली। बाघिन ने चिड़ियाघर में सात साल में 14 शावकों को जन्म दिया था। देश में बाघों की जनसंख्या बढ़ाने में कानपुर चिड़ियाघर का नाम जाना जाता है।

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बाघिन का मंगलवार को चिड़ियाघर के अधिकारियों की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया जाएगा। छह साल से यहां पर एक भी बाघिन शावक को जन्म नहीं दे सकी है। चिड़ियाघर के डॉक्टरों के अनुसार बाघ की औसतन उम्र 16 से 17 साल होती है। बाघिन त्रुशा ने तय उम्र से करीब ढ़ाई वर्ष अधिक जीवन जीया।
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दिसंबर 2022 में बाघिन की तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद डाॅक्टर अस्पताल परिसर में रखकर इलाज कर रहे थे। डॉक्टर की जांच में मुंह में कैसर निकला था। उसके जबड़े का ऊपरी हिस्सा धीरे-धीरे गल चुका था। रविवार सुबह खाना नहीं खाया था। सोमवार दोपहर को उसने दम तोड़ दिया।

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त्रुशा की कहानी
वर्ष 2010 में फर्रुखाबाद के जंगल से बाघिन त्रुशा और बाघ अभय को लाया गया था। 2017 तक दोनों की मेटिंग से 10 शावकों ने जन्म लिया था। इसके बाद पीलीभीत के जंगल से पकड़कर लाए गए आदमखोर बाघ प्रशांत और त्रुशा की मेटिंग कराई गई, तो 2017 में चार शावकों का जन्म हुआ।

वर्तमान में चिड़ियाघर में 10 बाघ हैं
इनका नाम अमर, अकबर, एंथोनी और अंबिका रखा गया। अदला-बदली स्कीम के तहत जोधपुर चिड़ियाघर में अंबिका, एंथोनी को भेज दिया गया था। अमर को गोरखपुर भेजा गया था। साल 2018 में अकबर की मौत हो गई थी। इसके बाद ये जोड़ी टूट गई। वर्तमान में चिड़ियाघर में 10 बाघ हैं, जिनमें चार नर और छह मादा हैं लेकिन एक भी मादा शावकों को जन्म नहीं दे सकी है।

त्रुशा ने अपनी औसतन उम्र से ज्यादा जीवन जीया। काफी वृद्ध थी। मुंह में कैंसर था, उसका इलाज चल रहा था। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।  -नावेद इकराम, रेंजर चिड़ियाघर

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