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घोड़े और खच्चर को बीहड़ में ले जाकर मौत का इंजेक्शन दिया, जानिए, आखिर क्यों मार दिया जाता है

Mon, 20 Aug 2018 10:32 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 20 Aug 2018 10:32 PM IST
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Death injection to glanders farsi patient horse and mule
घोड़े व खच्चर को जहरीला इंजेक्शन देते पशु चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
यूपी के औरैया में सदर विकास खंड के कसबा खानपुर में लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स फारसी से ग्रसित घोड़े और खच्चर को सोमवार को मौत का इंजेक्शन दिया गया। मरने के बाद दोनों जानवरों को दफना दिया गया। इस काम में लगी पशु चिकित्सा विभाग की पूरी टीम सुरक्षा जैकेट पहने रही। बीमारी सामने आने के बाद डीएम ने दोनों जानवरों को मारकर दफनाने का आदेश दिया था।
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 पशु चिकित्सा विभाग की ओर से प्रतिमाह घोड़ोें व खच्चरों के खून के सैंपल हिसार स्थित लैब को भेजी जाती है। बीते दिनों लैब से आई रिपोर्ट में कसबा खानपुर निवासी रहीश के घोड़े और पप्पू के खच्चर को ग्लैंडर्स फारसी बीमारी से ग्रसित बताया गया। बीमारी लाइलाज और संक्रमण फैलाने वाली होने के चलते जानवरों को मार दिया जाता है। पिछले माह कसबा खानपुर में ही अतीक के दो घोड़ों को ग्लैंडर फारसी बीमारी से ग्रसित पाए जाने पर मौत की नींद सुला दिया गया था।
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टीम ने बीहड़ में ले जाकर मौत का इंजेक्शन दिया

Death injection to glanders farsi patient horse and mule
घोड़े व खच्चर को जहरीला इंजेक्शन देते पशु चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को घोड़े और खच्चर को पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने बीहड़ में ले जाकर मौत का इंजेक्शन दिया। मौत के बाद दोनों जानवरों को दफना दिया गया। इस काम को अंजाम देने में पशु चिकित्सा विभाग से डॉ. मोहर सिंह, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. बृजभूषण यादव, डॉ. कमल किशोर, पशुधन प्रसाद अधिकारी बमुरीपुर हरवेंद्र सिंह, क्योंटरा से कृष्ण मोहन द्विवेदी, करमपुर से दशरथ सिंह, हंसुलिया से अंकित शुक्ला के अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विनोद कुमार, इंद्रजीत व सुभाष को लगाया गया था। डॉ मोहर सिंह ने बताया कि यह बीमारी घोड़ों में होने पर उनका कोई इलाज नहीं है। बीमारी घोड़ों से मनुष्य में चली जाती है। हालांकि मनुष्यों का इलाज संभव है, जो लगभग छह माह तक चलता है। 
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