खाली पेट चल बसा, पत्नी बोली-'खाने के पैसे नहीं थे इसलिए हफ्तेभर से नहीं जला चूल्हा'
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खन्ना थाने के घंडुआ गांव निवासी छुट्टन (38) पुत्र बिंदा के पास ढाई बीघे जमीन थी। परिवार में छुट्टन की मां श्यामबाई, पत्नी ऊषा, दो बेटियां शिवानी (6) व रिचा (4) और एक बेटा शिवम (एक साल) है। पत्नी ने बताया कि तंगहाली के चलते खाद-बीज की व्यवस्था न हो पाने से जमीन परती पड़ी थी। पति के पास जॉब कार्ड था, लेकिन बीमारी के कारण बेहद कमजोर हो गया था और मजदूरी नहीं कर पा रहा था। अंत्योदय कार्ड में हर माह 35 किलो खाद्यान्न से गुजारा चल रहा था। पत्नी ने बताया कि घर की जमा-पूंजी पति के इलाज में लग जाने से आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई। यदि मनरेगा का भुगतान हो जाता तो इलाज करा सकती थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। ग्राम प्रधान विशाली यादव का कहना है कि महिला ने पैसे उधार लिए थे जो मजदूरी मेें काट दिए।
ग्रामीण की मौत की सूचना पर रविवार की सुबह एडीएम महेंद्र सिंह और पुलिस गांव पहुंची। मृतक के परिवारीजनों को एडीएम ने पांच हजार और प्रधान ने दो हजार रुपये दिए। साथ ही 50 किलो अनाज दिलाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। जिलाधिकारी अजय कुमार सिंह का कहना है कि एडीएम को मौके पर भेजा गया था। मृतक के घर में आटा पाया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। ग्रामीण मधुमेह का मरीज था। बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई।
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