Mahoba: क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मौत का मामला, उप निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज
Mahoba Crime: जांच में तत्कालीन एसपी, थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण यादव, व्यापारी सुरेश सोनी, ब्रह्मदत्त के खिलाफ आत्महत्या के लिए उसकाने व भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय तैनात रहे सभी दरोगा और सिपाहियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच चल रही है।
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महोबा जिले में कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी मौत के मामले की जांच चल रही है। इसमें आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने पर महोबा में तैनात रहे उप निरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उप निरीक्षक पर सात लाख 697 रुपये आय से अधिक व्यय करने की पुष्टि हुई है।
मामले की विवेचना भ्रष्टाचार निवारण संगठन लखनऊ करेगी। भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी के प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र सिंह ने शहर कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी के ऊपर हुए हमले व उपचार के दौरान मौत होने के मामले में एसआईटी ने जांच की थी।
एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच की गई है। मूलरूप से कानपुर देहात के सिवली थाना क्षेत्र के मारंग मेहथा गांव निवासी स्वतंत्र कुमार वर्ष 2020 में महोबा में उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वह जनपद बलरामपुर के रहरा बाजार थाना में तैनात है।
22 लाख से अधिक की आय अर्जित की गई
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से की गई जांच में उप निरीक्षक स्वतंत्र कुमार ने लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहने की अवधि में अपनी आय के सभी वैध स्रोतों से 22 लाख 43 हजार 227 रुपये की आय अर्जित की गई। इसी अवधि में उनके द्वारा 29 लाख 43 हजार 924 रुपये व्यय पाया गया।
यह था पूरा मामला
कबरई के क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी ने सात सितंबर 2020 को तत्कालीन एसपी मणिलाल पाटीदार पर छह लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। अगले दिन उनके गले में गोली लग गई थी और कानपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मामले की जांच एसआईटी ने की थी।
भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा दर्ज
जांच में तत्कालीन एसपी, थानाध्यक्ष कबरई देवेंद्र शुक्ला, सिपाही अरुण यादव, व्यापारी सुरेश सोनी, ब्रह्मदत्त के खिलाफ आत्महत्या के लिए उसकाने व भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय तैनात रहे सभी दरोगा और सिपाहियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच चल रही है। इससे पहले भी कई उप निरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हो चुका है।