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फतेहपुर: सीएम की पैरवी पर सऊदी अरब से आ सका युवक का शव
Wed, 30 Sep 2020 02:22 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 30 Sep 2020 02:22 AM IST
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सीएम की पैरवी पर सउदी अरब से आ सका युवक का शव
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पैरवी पर चार माह बाद युवक का शव सऊदी अरब से गांव आ सका। बेटे का शव देखते ही मां की चीत्कार सुन लोगों का कलेजा बैठ गया। 29 जनवरी को मां ने बेटा को तिलक लगाकर सऊदी अरब भेजा था।
लेकिन जाने के 35 दिन बाद बेटे के मरने की खबर मिली। चार माह के लंबे संघर्ष के बाद बेटे का शव गांव पहुंचा। थरियांव थाना क्षेत्र के चक कोर्रा सादात गांव के रहने वाले सुखराम डाक विभाग में पोस्टमैन हैं। इन्होंने अपने बेटे संदीप को सऊदी अरब में ड्राइविंग के लिए भेजा था।
लेकिन संदीप ने पहुंचने पर बताया कि उससे बकरी चराने का काम लिया जा रहा है। वीडियो कॉल करके मालिक से प्रताड़ित किए जाने की बात बताई थी। चार अप्रैल को संदीप के एक अन्य साथी ने उसके मरने की सूचना दी थी।
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पिता सुखराम और भाई सर्वेश शव लाने के लिए डीएम संजीव सिंह, सदर विधायक विक्रम सिंह, सांसद निरंजन ज्योति से मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी से मिले। इसके बाद शव लाने के लिए एंबेसी से संपर्क किया गया।
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लेकिन जाने के 35 दिन बाद बेटे के मरने की खबर मिली। चार माह के लंबे संघर्ष के बाद बेटे का शव गांव पहुंचा। थरियांव थाना क्षेत्र के चक कोर्रा सादात गांव के रहने वाले सुखराम डाक विभाग में पोस्टमैन हैं। इन्होंने अपने बेटे संदीप को सऊदी अरब में ड्राइविंग के लिए भेजा था।
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लेकिन संदीप ने पहुंचने पर बताया कि उससे बकरी चराने का काम लिया जा रहा है। वीडियो कॉल करके मालिक से प्रताड़ित किए जाने की बात बताई थी। चार अप्रैल को संदीप के एक अन्य साथी ने उसके मरने की सूचना दी थी।
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पिता सुखराम और भाई सर्वेश शव लाने के लिए डीएम संजीव सिंह, सदर विधायक विक्रम सिंह, सांसद निरंजन ज्योति से मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी से मिले। इसके बाद शव लाने के लिए एंबेसी से संपर्क किया गया।
भाई सर्वेश ने बताया कि संदीप के मालिक ने पहले सहमति पत्र लिया है। सहमति पत्र में संदीप के आत्महत्या की बात स्वीकार कराई गई है। सहमति पत्र देने के बाद ही शव गांव वापस आ सका। परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं।
चार माह में लाखों रुपये हुए खर्च
रियाद शहर से शव प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। दिल्ली से एंबुलेंस से मंगलवार की सुबह शव गांव पहुंचा। गांव में प्रधान राजेंद्र मौर्य समेत हजारों की भीड़ मौजूद थी। पिता सुखराम ने बताया कि शव पाने की उम्मीद धुंधली हो गई थी।
वीज किसी और का काम किसी का
संदीप का वीजा सुल्तानपुर घोष में एक ब्रोकर ने एक लाख रुपये में बनवाया था। वीजा ड्राइवरी करने का बना था लेकिन उससे भेड़ चरवाते थे।
चार माह में लाखों रुपये हुए खर्च
रियाद शहर से शव प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया। दिल्ली से एंबुलेंस से मंगलवार की सुबह शव गांव पहुंचा। गांव में प्रधान राजेंद्र मौर्य समेत हजारों की भीड़ मौजूद थी। पिता सुखराम ने बताया कि शव पाने की उम्मीद धुंधली हो गई थी।
वीज किसी और का काम किसी का
संदीप का वीजा सुल्तानपुर घोष में एक ब्रोकर ने एक लाख रुपये में बनवाया था। वीजा ड्राइवरी करने का बना था लेकिन उससे भेड़ चरवाते थे।